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30 वर्ष से ज्यादा की महिला व पुरूषों की घर बैठे होगी स्क्रीनिंग, कल से एएनएम व आशा वर्कर्स संभालेंगी कमान
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज (एनसीडी) प्रोग्राम को लेकर पिछले एक महीने से चल रही एएनएम और आशा वर्कर्स की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। सोमवार से ये एएनएम और आशा वर्कर फील्ड में उतरेंगी और घर-घर जाकर 30 वर्ष से ऊपर के पुरुष और महिलाओं को नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज हाइपर टेंशन, शूगर, हार्ट प्रॉबलम, कैंसर और बीपी के लक्षण, बचाओ के बारे में बताएंगी और साथ ही इन बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति का इलाज भी कराएंगी। सोमवार को ये वर्कर आयुष्मान भारत योजना के तहत कुंजपुरा, कुटेल, काछवा, सालवन और सांभली पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाया गया है, इन्हीं के क्षेत्र से एनसीडी प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी।
एएनएम और आशा वर्कर घर-घर जाकर यह जहां 30 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों में क्या-क्या बीमारी लगी हुई है। इसकी भी रिपोर्ट तैयार करेंगी। ताकि पता लग सके कि इस उम्र के व्यक्तियों में सबसे ज्यादा कौन भी बीमारी है, ताकि उसे पहले की रोक दिया जाए। इस दौरान जो व्यक्ति नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज से ग्रस्त पाया गया उसका इन हेल्थ वेलनेस सेंटर पर इलाज कराया जाएगा।
150 से ज्यादा फील्ड में उतरेंगी एएनएम और आशा वर्कर
एनसीडी प्रोजेक्ट को लेकर अगल-अलग ग्रुप में आशा वर्कर्स और एएनएम को ट्रेनिंग दी गई हैं। फिलहाल 150 से ज्यादा आशा वर्कर और एएनएम ट्रेनिंग ले चुकी हैं। जो सोमवार से फील्ड में उतरकर 30 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को जागरूक करेंगी और उनकी बीमारी के बारे में पूछेंगी।
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जिले में 550 हैं कैंसर के मरीज
हरियाणा कैंसर एटलस के अनुसार पूरे जिले में 30 वर्ष की आयु से ऊपर के युवाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिसमें सभी के बीपी, शुगर, हाइपरटेंशन और कैंसर की पहचान की जाएगी। यहां पर लक्षण की पहचान कर मरीजों को रेफर किया जाएगा। इस माध्यम से पता चलाया जाएगा कि जिले में कितने कैंसर के रोगी हैं, कितने बीपी और कितने शुगर के मरीज हैं। इस समय स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 550 कैंसर रोगी हैं। मरीजों की पहचान कर आनलाइन डेटा अपलोड किया जाएगा।
कैंसर के मरीजों को हो पाएगा समय पर इलाज
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि वर्तमान में ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकिल कैंसर कॉमन मिलते हैं, लेकिन इनका तब पता चलता है जब आखिरी स्टेज में होता है। अब युवाओं को लक्षण के आधार पर उन्हें रेफर किया जाएगा, ताकि समय रहते उन पर कंट्रोल किया जा सके। इस प्रोजेक्ट से यह भी सामने आएगा की सबसे ज्यादा कौन सी बीमारी फैल रही है और कितने मरीज हैं, ताकि समय रहते इन बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
एएनएम और आशा वर्कर्स को ग्रुप बनाकर ट्रेनिंग दी गई है, सोमवार से टीमें फील्ड में उतर आएंगे। फिलहाल कुंजपुरा, काछवा, सालवन, कुटेल और सांभली पीएचसी के क्षेत्र में 30 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को एनसीडी के बारे में बताया जाएगा और इनका इलाज भी कराया जाएगा।-डॉ. सरोज बाला, डिप्टी सिविल सर्जन करनाल।
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करनाल। नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज (एनसीडी) प्रोग्राम को लेकर पिछले एक महीने से चल रही एएनएम और आशा वर्कर्स की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। सोमवार से ये एएनएम और आशा वर्कर फील्ड में उतरेंगी और घर-घर जाकर 30 वर्ष से ऊपर के पुरुष और महिलाओं को नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज हाइपर टेंशन, शूगर, हार्ट प्रॉबलम, कैंसर और बीपी के लक्षण, बचाओ के बारे में बताएंगी और साथ ही इन बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति का इलाज भी कराएंगी। सोमवार को ये वर्कर आयुष्मान भारत योजना के तहत कुंजपुरा, कुटेल, काछवा, सालवन और सांभली पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाया गया है, इन्हीं के क्षेत्र से एनसीडी प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी।
एएनएम और आशा वर्कर घर-घर जाकर यह जहां 30 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों में क्या-क्या बीमारी लगी हुई है। इसकी भी रिपोर्ट तैयार करेंगी। ताकि पता लग सके कि इस उम्र के व्यक्तियों में सबसे ज्यादा कौन भी बीमारी है, ताकि उसे पहले की रोक दिया जाए। इस दौरान जो व्यक्ति नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज से ग्रस्त पाया गया उसका इन हेल्थ वेलनेस सेंटर पर इलाज कराया जाएगा।
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150 से ज्यादा फील्ड में उतरेंगी एएनएम और आशा वर्कर
एनसीडी प्रोजेक्ट को लेकर अगल-अलग ग्रुप में आशा वर्कर्स और एएनएम को ट्रेनिंग दी गई हैं। फिलहाल 150 से ज्यादा आशा वर्कर और एएनएम ट्रेनिंग ले चुकी हैं। जो सोमवार से फील्ड में उतरकर 30 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को जागरूक करेंगी और उनकी बीमारी के बारे में पूछेंगी।
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जिले में 550 हैं कैंसर के मरीज
हरियाणा कैंसर एटलस के अनुसार पूरे जिले में 30 वर्ष की आयु से ऊपर के युवाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिसमें सभी के बीपी, शुगर, हाइपरटेंशन और कैंसर की पहचान की जाएगी। यहां पर लक्षण की पहचान कर मरीजों को रेफर किया जाएगा। इस माध्यम से पता चलाया जाएगा कि जिले में कितने कैंसर के रोगी हैं, कितने बीपी और कितने शुगर के मरीज हैं। इस समय स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 550 कैंसर रोगी हैं। मरीजों की पहचान कर आनलाइन डेटा अपलोड किया जाएगा।
कैंसर के मरीजों को हो पाएगा समय पर इलाज
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि वर्तमान में ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकिल कैंसर कॉमन मिलते हैं, लेकिन इनका तब पता चलता है जब आखिरी स्टेज में होता है। अब युवाओं को लक्षण के आधार पर उन्हें रेफर किया जाएगा, ताकि समय रहते उन पर कंट्रोल किया जा सके। इस प्रोजेक्ट से यह भी सामने आएगा की सबसे ज्यादा कौन सी बीमारी फैल रही है और कितने मरीज हैं, ताकि समय रहते इन बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
एएनएम और आशा वर्कर्स को ग्रुप बनाकर ट्रेनिंग दी गई है, सोमवार से टीमें फील्ड में उतर आएंगे। फिलहाल कुंजपुरा, काछवा, सालवन, कुटेल और सांभली पीएचसी के क्षेत्र में 30 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को एनसीडी के बारे में बताया जाएगा और इनका इलाज भी कराया जाएगा।-डॉ. सरोज बाला, डिप्टी सिविल सर्जन करनाल।