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नगर निगम के खाते में डेढ़ अरब : एक करोड़ का लोन दिया, वापस करना भूले, अब देने होंगे तीन करोड़
Updated Sun, 17 Dec 2017 12:37 AM IST
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21 साल पहले एक करोड़ का लोन लेकर भूले अधिकारी, निगम को अब देने होंगे तीन करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
नगर निगम करनाल की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। पिछले 21 साल में नगर पालिका, नगर परिषद से निगम तक का सफर तय करने के बावजूद निगम के अधिकारियों ने करोड़ों रुपये खजाने में होते हुए भी सरकार से लिया एक करोड़ का लोन वापस नहीं किया। इस पर ब्याज लगने के कारण अब यह 3.17 करोड़ रुपये हो गया है।
बड़ी बात ये है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। अब निगम को एक करोड़ के बदले तीन करोड़ रुपये देने हैं, इनमें से दो करोड़ रुपये का तो ब्याज ही बनता है। ऐसे में यह शहर और निगम को सीधा सा नुकसान होगा। डायरेक्टर लोकल ऑडिट हरियाणा की टीम ने साल 2015-16 की रिपोर्ट में यह मामला सामने आया है।
ऑडिट टीम के अनुसार, नगरपालिका कमेटी ने साल 1996 में शहर में विकास कार्यों के लिए प्रदेश सरकार से एक करोड़ नौ लाख रुपये का लोन लिया था। लोन लेने के बाद निकाय के अधिकारी इसे वापस करना ही भूल गए। पिछले 21 सालों में कितने अधिकारी आए और गए कमेटी आज निगम तक बन गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस लोन को वापस करने की जहमत नहीं उठाई, जबकि आज की बात करें तो निगम के खाते में आज भी 1.61 अरब रुपये जमा हैं। एक तरफ अधिकारी लापरवाही बरतते रहे तो दूसरी ओर सरकार दी गई राशि पर ब्याज लगाती रही। अब यह राशि 3.17 करोड़ रुपये हो चुकी है। निगम के अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब करनाल शहरवासियों से टैक्स के रूप में एकत्र किये गए पैसे में से दो करोड़ रुपये ज्यादा देने होंगे।
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इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार
आम नागरिकों पर टैक्स जमा नहीं कराने पर निगम द्वारा नोटिस देने समेत जुर्माना लगाया जाता है, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते अब निगम को दो करोड़ रुपये ज्यादा वापस देने होंगे। सबसे बड़ा अहम सवाल यह है कि आखिरकार जनता की गाढ़ी कमाई के इस दो करोड़ रुपये का गुनहगार कौन है? नगर निगम में पैसे संभालने की जिम्मेदारी अकाउंट ब्रांच की होती है, लेकिन पिछले 21 साल किसी भी कर्मचारी और अधिकारी ने इतनी बड़ी लापरवाही की तरफ ध्यान नहीं दिया। इसी कारण आज यह राशि तीन करोड़ रुपये भी ज्यादा हो गई।
बन सकती थी कई गलियां और नाले
शहरवासियों का कहना है कि इस दो करोड़ रुपये से शहर में कई विकास कार्य हो सकते थे। दो करोड़ रुपये की राशि कम नहीं होती है, इस राशि से शहर में गलियां और नाले बन सकते थे, जिससे लोगों का लाभ होगा, लेकिन अधिकारी जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा रहे हैं। पार्षद राकेश कुमार ने बताया कि वैसे तो निगम के अधिकारी एक-एक रुपये के लिए जनता को परेशान करते हैं, लेकिन दो करोड़ रुपये का बोझ निगम पर पड़ गया और इसके लिए किसी कर्मचारी व अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। पार्षद का कहना है कि जब वे सड़कों की मरम्मत तक की मांग करते हैं तो दो-दो लाख रुपये के एस्टिमेट तैयार करने से निगम अधिकारी बचते हैं और यहां पर पैसा लुटाया जा रहा है। इस मामले को सदन की बैठक में उठाया जाएगा।
बिना चेक और अथॉरिटी के जारी कर दिए 28 लाख
इसके अलावा ऑडिट टीम ने निगम का एक और मामला पकड़ा है। डायरेक्टर लोकल ऑडिट की ओर से साल 2015-16 की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2013 में करनाल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से 28 लाख रुपये की राशि सीधे सर्विस टैक्स विभाग के अकाउंट में जमा कराए पाए गए। ऑडिट टीम ने इस मामले में कहा है कि 28 लाख रुपये टैक्स विभाग में जमा कराने को लेकर न तो अधिकारियों की तरफ से कोई चेक इश्यू किया गया और न ही बैंक को पैसे ट्रांसफर करने की अथॉरिटी दी थी। बावजूद इसके बैंक अधिकारियों ने यह राशि सर्विस टैक्स विभाग को भेज दी। ऑडिट टीम ने सलाह दी है कि तुरंत प्रभाव से इस मामले में पत्र लिखकर पैसा वापस लिया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई : शर्मा
युवा आशीष शर्मा ने कहा कि इस मामले में सबसे पहले तो उन अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, साथ ही इस पैसे की रिकवरी भी कराई जाए, क्योंकि दो करोड़ रुपये शहर के विकास कार्यों में लगाए जा सकते थे। इससे निगम का नहीं बल्कि शहर का नुकसान है, ये सारा पैसा जनता से टैक्स के रूप में वसूला जाता है। पार्षदों को भी इस मामले को उठाना चाहिए, ताकि लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके।
मामले की कराएंगे जांच : ईओ
इस बारे में नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि इस केस को लेकर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों से बात की जाएगी। चेक करने के बाद ही पूरे मामले का पता चल सकता है। ऑडिट रिपोर्ट चेक करके मामले को निपटाया जाएगा, साथ ही इसके पीछे क्या कारण रहे, उनकी भी जांच की जाएगी। मामला पुराना होने के कारण उनके पास ज्यादा जानकारी नहीं है। चेक करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
नगर निगम करनाल की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। पिछले 21 साल में नगर पालिका, नगर परिषद से निगम तक का सफर तय करने के बावजूद निगम के अधिकारियों ने करोड़ों रुपये खजाने में होते हुए भी सरकार से लिया एक करोड़ का लोन वापस नहीं किया। इस पर ब्याज लगने के कारण अब यह 3.17 करोड़ रुपये हो गया है।
बड़ी बात ये है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। अब निगम को एक करोड़ के बदले तीन करोड़ रुपये देने हैं, इनमें से दो करोड़ रुपये का तो ब्याज ही बनता है। ऐसे में यह शहर और निगम को सीधा सा नुकसान होगा। डायरेक्टर लोकल ऑडिट हरियाणा की टीम ने साल 2015-16 की रिपोर्ट में यह मामला सामने आया है।
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ऑडिट टीम के अनुसार, नगरपालिका कमेटी ने साल 1996 में शहर में विकास कार्यों के लिए प्रदेश सरकार से एक करोड़ नौ लाख रुपये का लोन लिया था। लोन लेने के बाद निकाय के अधिकारी इसे वापस करना ही भूल गए। पिछले 21 सालों में कितने अधिकारी आए और गए कमेटी आज निगम तक बन गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस लोन को वापस करने की जहमत नहीं उठाई, जबकि आज की बात करें तो निगम के खाते में आज भी 1.61 अरब रुपये जमा हैं। एक तरफ अधिकारी लापरवाही बरतते रहे तो दूसरी ओर सरकार दी गई राशि पर ब्याज लगाती रही। अब यह राशि 3.17 करोड़ रुपये हो चुकी है। निगम के अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब करनाल शहरवासियों से टैक्स के रूप में एकत्र किये गए पैसे में से दो करोड़ रुपये ज्यादा देने होंगे।
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इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार
आम नागरिकों पर टैक्स जमा नहीं कराने पर निगम द्वारा नोटिस देने समेत जुर्माना लगाया जाता है, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते अब निगम को दो करोड़ रुपये ज्यादा वापस देने होंगे। सबसे बड़ा अहम सवाल यह है कि आखिरकार जनता की गाढ़ी कमाई के इस दो करोड़ रुपये का गुनहगार कौन है? नगर निगम में पैसे संभालने की जिम्मेदारी अकाउंट ब्रांच की होती है, लेकिन पिछले 21 साल किसी भी कर्मचारी और अधिकारी ने इतनी बड़ी लापरवाही की तरफ ध्यान नहीं दिया। इसी कारण आज यह राशि तीन करोड़ रुपये भी ज्यादा हो गई।
बन सकती थी कई गलियां और नाले
शहरवासियों का कहना है कि इस दो करोड़ रुपये से शहर में कई विकास कार्य हो सकते थे। दो करोड़ रुपये की राशि कम नहीं होती है, इस राशि से शहर में गलियां और नाले बन सकते थे, जिससे लोगों का लाभ होगा, लेकिन अधिकारी जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा रहे हैं। पार्षद राकेश कुमार ने बताया कि वैसे तो निगम के अधिकारी एक-एक रुपये के लिए जनता को परेशान करते हैं, लेकिन दो करोड़ रुपये का बोझ निगम पर पड़ गया और इसके लिए किसी कर्मचारी व अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। पार्षद का कहना है कि जब वे सड़कों की मरम्मत तक की मांग करते हैं तो दो-दो लाख रुपये के एस्टिमेट तैयार करने से निगम अधिकारी बचते हैं और यहां पर पैसा लुटाया जा रहा है। इस मामले को सदन की बैठक में उठाया जाएगा।
बिना चेक और अथॉरिटी के जारी कर दिए 28 लाख
इसके अलावा ऑडिट टीम ने निगम का एक और मामला पकड़ा है। डायरेक्टर लोकल ऑडिट की ओर से साल 2015-16 की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2013 में करनाल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से 28 लाख रुपये की राशि सीधे सर्विस टैक्स विभाग के अकाउंट में जमा कराए पाए गए। ऑडिट टीम ने इस मामले में कहा है कि 28 लाख रुपये टैक्स विभाग में जमा कराने को लेकर न तो अधिकारियों की तरफ से कोई चेक इश्यू किया गया और न ही बैंक को पैसे ट्रांसफर करने की अथॉरिटी दी थी। बावजूद इसके बैंक अधिकारियों ने यह राशि सर्विस टैक्स विभाग को भेज दी। ऑडिट टीम ने सलाह दी है कि तुरंत प्रभाव से इस मामले में पत्र लिखकर पैसा वापस लिया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई : शर्मा
युवा आशीष शर्मा ने कहा कि इस मामले में सबसे पहले तो उन अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, साथ ही इस पैसे की रिकवरी भी कराई जाए, क्योंकि दो करोड़ रुपये शहर के विकास कार्यों में लगाए जा सकते थे। इससे निगम का नहीं बल्कि शहर का नुकसान है, ये सारा पैसा जनता से टैक्स के रूप में वसूला जाता है। पार्षदों को भी इस मामले को उठाना चाहिए, ताकि लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके।
मामले की कराएंगे जांच : ईओ
इस बारे में नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि इस केस को लेकर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों से बात की जाएगी। चेक करने के बाद ही पूरे मामले का पता चल सकता है। ऑडिट रिपोर्ट चेक करके मामले को निपटाया जाएगा, साथ ही इसके पीछे क्या कारण रहे, उनकी भी जांच की जाएगी। मामला पुराना होने के कारण उनके पास ज्यादा जानकारी नहीं है। चेक करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।