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Karnal News: पांच साल में 179 बच्चों को बाल श्रम से कराया मुक्त
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- इनमें ज्यादातर 14 वर्ष तक के किशोर शामिल, सीडब्ल्यूसी ने पुलिस की मदद से की कार्रवाई
विशु शर्मा
करनाल। पांच साल में जिले में 179 बच्चे बाल श्रम से मुक्त कराए गए। इनमें सबसे ज्यादा 14 साल के किशोर शामिल हैं। बाल श्रम को रोकने के लिए जिला टास्क फोर्स कमेटी का गठन किया गया है।
करनाल सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) के अध्यक्ष उमेश चानना ने बताया कि जिला टास्क फोर्स के साथ मिलकर सूचना के आधार पर जहां पर 18 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाया जाता है, वहां पर पहले रेकी की जाती है फिर पुलिस की सहायता से दबिश देकर बच्चों को वहां से निकाला जाता है और आश्रम भेजा जाता है।
उन्होंने बताया कि कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के किशोर या बच्चे से मजदूरी करवाता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर बाल और किशोर श्रम अधिनियम 1986 के आधार पर सजा दिलाई जाती है। उमेश चानना ने बताया कि बाल श्रम के मामले में सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों के बच्चे होते हैं।
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उन्होंने बताया कि करनाल की एक कॉलोनी स्थित एक घर में एक व्यक्ति ने काम करने के लिए 18 साल से कम उम्र के बच्चे को रखा हुआ था। जैसे ही उन्हें इस बारे में सूचना मिली, वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उसे मुक्त कराया। वहीं उस व्यक्ति पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया। जिन बच्चों को बाल श्रम के मामले से मुक्त करवाया जाता है, उनको सबसे पहले बाल आश्रम भेजा जाता है। इसके बाद सूचना देकर उनके परिजनों से मिलवा दिया जाता है। जिन बच्चों के परिजनों का पता नहीं चलता उनको बाल आश्रम में भेज दिया जाता है। उमेश चानना ने बताया कि करनाल में साल 2023 में सबसे अधिक बाल श्रम के मामले सामने आए थे। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा 18 साल से कम का है और काम करता हुआ दिखाई देता तो तुरंत सूचना जरूर दें। - संवाद
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पांच वर्षों में आए बाल श्रम के मामलों का ब्योरा
साल लड़के लड़की परिजनों से मिलवाया
2020 26 07 33
2021 16 05 21
2022 33 01 34
2023 72 01 73
2024 18 00 18
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विशु शर्मा
करनाल। पांच साल में जिले में 179 बच्चे बाल श्रम से मुक्त कराए गए। इनमें सबसे ज्यादा 14 साल के किशोर शामिल हैं। बाल श्रम को रोकने के लिए जिला टास्क फोर्स कमेटी का गठन किया गया है।
करनाल सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) के अध्यक्ष उमेश चानना ने बताया कि जिला टास्क फोर्स के साथ मिलकर सूचना के आधार पर जहां पर 18 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाया जाता है, वहां पर पहले रेकी की जाती है फिर पुलिस की सहायता से दबिश देकर बच्चों को वहां से निकाला जाता है और आश्रम भेजा जाता है।
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उन्होंने बताया कि कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के किशोर या बच्चे से मजदूरी करवाता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर बाल और किशोर श्रम अधिनियम 1986 के आधार पर सजा दिलाई जाती है। उमेश चानना ने बताया कि बाल श्रम के मामले में सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों के बच्चे होते हैं।
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उन्होंने बताया कि करनाल की एक कॉलोनी स्थित एक घर में एक व्यक्ति ने काम करने के लिए 18 साल से कम उम्र के बच्चे को रखा हुआ था। जैसे ही उन्हें इस बारे में सूचना मिली, वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उसे मुक्त कराया। वहीं उस व्यक्ति पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया। जिन बच्चों को बाल श्रम के मामले से मुक्त करवाया जाता है, उनको सबसे पहले बाल आश्रम भेजा जाता है। इसके बाद सूचना देकर उनके परिजनों से मिलवा दिया जाता है। जिन बच्चों के परिजनों का पता नहीं चलता उनको बाल आश्रम में भेज दिया जाता है। उमेश चानना ने बताया कि करनाल में साल 2023 में सबसे अधिक बाल श्रम के मामले सामने आए थे। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा 18 साल से कम का है और काम करता हुआ दिखाई देता तो तुरंत सूचना जरूर दें। - संवाद
पांच वर्षों में आए बाल श्रम के मामलों का ब्योरा
साल लड़के लड़की परिजनों से मिलवाया
2020 26 07 33
2021 16 05 21
2022 33 01 34
2023 72 01 73
2024 18 00 18