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आकज शिवरात्रि पर निर्जला व्रत रखने से मिलेगा अति पुण्य
Updated Mon, 12 Feb 2018 11:33 PM IST
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आज शिवरात्रि पर निर्जला व्रत रखने से मिलेगा अति पुण्य
अमर उजाला ब्यूूरो
करनाल। आज शिवरात्रि पर्व है। पंडित षष्ठी बल्लभ पांडेय के अनुसार शिवरात्रि पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। 13 फरवरी को प्रदोष युक्त चतुर्दशी होने के कारण है अति उत्तम है। इस दिन प्रदोष व्रत भी है। इससे अलग कई जगहों पर 14 फरवरी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कांवड़िये भी गंगा जल लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। पंडित पांडेय के अनुसार शिवरात्रि को महारात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। पंडित षष्ठी के अनुसार भगवान शिव की पूजा करने के लिए का शुभ समय चार पहर में है। इन चारो पहर में शिवभक्त शिव की अराधना का फल की प्राप्ति कर सकते हैं। पहला पहर 13 फरवरी शाम 6 बजे से 9 बजे तक, रात 9 बजे से 12 बजे तक, 14 फरवरी रात 12 बजे से 3 बजे तक शुभ समय है। भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक करना और बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। पंडित के अनुसार शिव भक्त इस दिन निरजल व्रत रखे तो उन्हें बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होगी। इस व्रत में फल ग्रहण कर सकते हैं। श्रद्धालु सुबह शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की अराधना करें और शिव की पूजा में गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर गन्ने के रस आदि के द्वारा अभिषेक करें। भांग धतुरा अनेक प्रकार के फल व मिष्ठान आदि का भोग लगाएं।
कावड़ लेकर आ रहे है शिव भक्त शिवरात्रि पर्व को लेकर शिव भक्तों में काफी उत्साह है। शिवभक्त हरिद्वार से कावड़ लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शहर व आस-पास के क्षेत्र में सामाज सेवियों द्वारा शिविर लगाकर कावडिय़ों की सेवा की जा रही है। कई जगहों पर कावड़िया आज जलाभिषेक करेंगे तो कई जगहों पर बुधवार को शिवरात्रि मनाई जाएगी। शिवरात्रि के लिए मंदिरों को सजाया गया है। वहीं शहर में और कस्बों में कई जगहों पर भोले बाबा की प्रभातफेरियां भी निकाली जा रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूूरो
करनाल। आज शिवरात्रि पर्व है। पंडित षष्ठी बल्लभ पांडेय के अनुसार शिवरात्रि पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। 13 फरवरी को प्रदोष युक्त चतुर्दशी होने के कारण है अति उत्तम है। इस दिन प्रदोष व्रत भी है। इससे अलग कई जगहों पर 14 फरवरी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कांवड़िये भी गंगा जल लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। पंडित पांडेय के अनुसार शिवरात्रि को महारात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। पंडित षष्ठी के अनुसार भगवान शिव की पूजा करने के लिए का शुभ समय चार पहर में है। इन चारो पहर में शिवभक्त शिव की अराधना का फल की प्राप्ति कर सकते हैं। पहला पहर 13 फरवरी शाम 6 बजे से 9 बजे तक, रात 9 बजे से 12 बजे तक, 14 फरवरी रात 12 बजे से 3 बजे तक शुभ समय है। भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक करना और बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। पंडित के अनुसार शिव भक्त इस दिन निरजल व्रत रखे तो उन्हें बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होगी। इस व्रत में फल ग्रहण कर सकते हैं। श्रद्धालु सुबह शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की अराधना करें और शिव की पूजा में गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर गन्ने के रस आदि के द्वारा अभिषेक करें। भांग धतुरा अनेक प्रकार के फल व मिष्ठान आदि का भोग लगाएं।
कावड़ लेकर आ रहे है शिव भक्त शिवरात्रि पर्व को लेकर शिव भक्तों में काफी उत्साह है। शिवभक्त हरिद्वार से कावड़ लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शहर व आस-पास के क्षेत्र में सामाज सेवियों द्वारा शिविर लगाकर कावडिय़ों की सेवा की जा रही है। कई जगहों पर कावड़िया आज जलाभिषेक करेंगे तो कई जगहों पर बुधवार को शिवरात्रि मनाई जाएगी। शिवरात्रि के लिए मंदिरों को सजाया गया है। वहीं शहर में और कस्बों में कई जगहों पर भोले बाबा की प्रभातफेरियां भी निकाली जा रही हैं।
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