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चमकी बुखार से डरे लोग, नहीं खरीद रहे लीची
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। बिहार के मुज्जफरपुर में चमकी (दिमागी बुखार) के कारण हुई बच्चों की मौत के बाद करनाल में भी इस चमकी बुखार से लोग दहशत फैल रही है। लोगों को कहना है कि पहले ही डेंगू बुखार से कई लोगों की जान जा चुकी है। अब ये चमकी बुखार आ गया हालांकि सीएमओ की ओर से अलर्ट जारी कर दिया है कि सरकारी अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल में चमकी बुखार से संबंधित कोई भी केस आता है तो उसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें, ताकि उस मरीज का अच्छे से इलाज किया जा सके। वहीं, दूसरी ओर लोग लीची की खरीदारी से दूर भाग रहे हैं।
चमकी दिमागी बुखार है
फिजीशियन डॉ. कमल चराय ने बताया कि चमकी बुखार का दिमागी बुखार कहते हैं। यह बुखार बच्चे और बुजुर्गों को होता है या फिर उन लोगों को होगा जो किसी बीमारी से पहले से ही पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि दिमागी बुखार में तेज बुखार होगा और दौरा भी पड़ेगा। इसमें शुगर लेवल कम हो जाता है, लेकिन समय पर उपचार मिलने पर लोग ठीक हो जाते हैं। ज्यादातर यह कुपोषित बच्चों को होता है क्योंकि वे पौष्टिक आहार नहीं लेते।
लीची खरीदने से डर रहे हैं लोग, रेट हुए कम
लीची को लेकर भी लोग डरे हुए हैं कि लीची से यह चमकी बुखार होता है। इसलिए लोग लीची की खरीदारी ही नहीं कर रहे। पहले लीची 120 रुपये किलोग्राम थी लेकिन अब 60 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गई है। लीची की खरीदारी करने से लोग डर रहे हैं।
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चमकी बुखार को लेकर सभी अस्पतालों को निर्देश जारी किए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग इस बुखार से लड़ने के लिए तैयार है। विभाग की ओर से अलर्ट जारी किया हुआ है। लीची की एक भ्रांति है। ऐसा कुछ नहीं है। लीची के खाने से ही यह नहीं होता है। इसके अन्य भी कारण हैं।-डॉ. रमेश कुमार, सीएमओ, करनाल।
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करनाल। बिहार के मुज्जफरपुर में चमकी (दिमागी बुखार) के कारण हुई बच्चों की मौत के बाद करनाल में भी इस चमकी बुखार से लोग दहशत फैल रही है। लोगों को कहना है कि पहले ही डेंगू बुखार से कई लोगों की जान जा चुकी है। अब ये चमकी बुखार आ गया हालांकि सीएमओ की ओर से अलर्ट जारी कर दिया है कि सरकारी अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल में चमकी बुखार से संबंधित कोई भी केस आता है तो उसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें, ताकि उस मरीज का अच्छे से इलाज किया जा सके। वहीं, दूसरी ओर लोग लीची की खरीदारी से दूर भाग रहे हैं।
चमकी दिमागी बुखार है
फिजीशियन डॉ. कमल चराय ने बताया कि चमकी बुखार का दिमागी बुखार कहते हैं। यह बुखार बच्चे और बुजुर्गों को होता है या फिर उन लोगों को होगा जो किसी बीमारी से पहले से ही पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि दिमागी बुखार में तेज बुखार होगा और दौरा भी पड़ेगा। इसमें शुगर लेवल कम हो जाता है, लेकिन समय पर उपचार मिलने पर लोग ठीक हो जाते हैं। ज्यादातर यह कुपोषित बच्चों को होता है क्योंकि वे पौष्टिक आहार नहीं लेते।
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लीची खरीदने से डर रहे हैं लोग, रेट हुए कम
लीची को लेकर भी लोग डरे हुए हैं कि लीची से यह चमकी बुखार होता है। इसलिए लोग लीची की खरीदारी ही नहीं कर रहे। पहले लीची 120 रुपये किलोग्राम थी लेकिन अब 60 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गई है। लीची की खरीदारी करने से लोग डर रहे हैं।
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चमकी बुखार को लेकर सभी अस्पतालों को निर्देश जारी किए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग इस बुखार से लड़ने के लिए तैयार है। विभाग की ओर से अलर्ट जारी किया हुआ है। लीची की एक भ्रांति है। ऐसा कुछ नहीं है। लीची के खाने से ही यह नहीं होता है। इसके अन्य भी कारण हैं।-डॉ. रमेश कुमार, सीएमओ, करनाल।