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आईटीआई लाठीचार्ज प्रकरण की जांच में नप सकते हैं पुलिस कर्मचारी

Sun, 23 Jun 2019 01:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2019 01:00 AM IST
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आईटीआई लाठीचार्ज प्रकरण की जांच में नप सकते हैं पुलिस कर्मचारी

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करनाल। आईटीआई के विद्यार्थियों और प्रिंसिपल पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज मामले में मजिस्ट्रेटी जांच पूरी हो गई है। करीब दो माह तक चली इस जांच में सभी आरोपी पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों को शामिल किया गया। वहीं, पीड़ित पक्ष के तौर पर आईटीआई के विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रिंसिपल ने अपने बयान कलमबंद दर्ज कराए हैं। आईटीआई के प्रिंसिपल की तरफ से लाठीचार्ज के बाकायदा सबूत भी सौंपे गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि आगामी सप्ताह में जांच रिपोर्ट डीसी के पास पहुंच जाएगी। इसके बाद ही प्रशासन द्वारा आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बता दें कि पिछले दो माह से लाठीचार्ज प्रकरण की जांच चल रही है। इसके लिए एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई थी। इनमें आईटीआई के डिप्टी डायरेक्टर सुमित सहरावत और आईटीआई करनाल से जसविंद्र संधू को शामिल किया गया था। जांच के दौरान लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मचारियों और पीड़ित आईटीआई स्टाफ को शामिल किया गया। अलग-अलग तिथियों पर कमेटी ने दोनों पक्षों के बयान कलमबंद किए गए हैं। इनमें पुलिस की तरफ से सिक्योरिटी इंचार्ज राजबीर पाढ़ा, सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह, सिटी थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मचारियों के बयान लिए गए। अहम बात ये है कि सभी पुलिस कर्मचारियों ने लगभग एक जैसे ही जवाब दिए हैं। सभी ने कहा है कि लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया। इसके अलावा, प्रिंसिपल का गला पकड़ने और लाठियां भांजने पर सभी ने कहा कि, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ये प्रिंसिपल है। बचाव के लिए पुलिस कर्मचारी कोई ठोस तथ्य नहीं दे पाए, जबकि पीड़ित पक्ष ने अलग-अलग सीडी भी पेश की हैं, जिनमें पुलिस कर्मचारी पथराव के साथ-साथ लाठीचार्ज भी कर रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि आगामी सप्ताह तक जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। इसमें कई पुलिस कर्मचारी नप सकते हैं। गौरतलब है कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने तीन पुलिस कर्मचारियों को लाइनहाजिर कर दिया था।
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12 अप्रैल को हुआ था बवाल
11 अप्रैल को आईटीआई का एक छात्र निकित की रोडवेज की बस की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इससे गुस्साए आईटीआई के विद्यार्थियों ने 12 अप्रैल को सुबह ही जाम लगाने की कोशिश की और रोडवेज बसों पर पथराव किया। इसके बाद छात्रों ने पुलिस पर भी पथराव किया। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने भी विद्यार्थियों पर पथराव किया और हवाई फायर करने पड़े। इसके बाद छात्रों को खदेड़ते हुए उनको आईटीआई परिसर में घेरकर पीटा। बेकाबू हुई पुलिस ने आईटीआई के स्टाफ को भी नहीं बख्शा और आईटीआई के प्रिंसिपल के कार्यालय में घुसकर लाठीचार्ज किया। प्रिंसिपल बलदेव सिंह समेत अन्य शिक्षकों पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। सीएम ने इसकी जांच एमडीएम नरेंद्र पाल मलिक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी को सौंपी थी। पुलिस की कार्यप्रणाली पर अलग से जांच एएसपी मुकेश कुमार को सौंपी गई थी।
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19 जून को एसडीएम के सामने हम पेश हुए थे। एसडीएम ने आश्वासन दिया था कि अब इसमें सुनवाई के लिए अन्य तिथि नहीं दी जाएगी। हमें एसडीएम की जांच पर पूरा भरोसा है। क्योंकि पुलिस कर्मचारियों ने हमारे साथ गलत किया था, इसके बाकायदा सबूत भी कमेटी के सामने पेश किए गए हैं। ऐसे में मुझे पूरा यकीन है कि हमें न्याय मिलेगा। एसडीएम की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
-बलदेव सिंह, प्रिंसिपल, आईटीआई।
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