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पटवारी, कर्लक और ग्रुप डी में लगे सरकारी कर्मचारियों ने भी दी नायब तहसीलदार पद की परीक्षा
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को हुई नायब तहसीलदार पद की परीक्षा में पटवारी, क्लर्क, शिक्षक और ग्रुप डी में लगे सरकारी कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। एक पटवारी ने बताया कि वह अपनी नौकरी से वैसे तो खुश है, लेकिन परीक्षा पास कर वह अधिकारी के बराबर पद पर पहुंचना चाहता है।
उधर, तहसीलदार के कार्यालय में कार्यरत ग्रुप डी कर्मचारी भी अपने साहब को देखकर नायब तहसीलदार बनने की लालसा से परीक्षा देना आया। वहीं, तहसील में क्लर्क पद पर कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहता है। क्योंकि एक तहसीलदार के पास मजिस्ट्रेट की पावर होती है। इसके बल पर ही वह कठोर निर्णय ले सकता है। नायब तहसीलदार पद की लिखित परीक्षा में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। वहीं, बेरोजगार युवाओं ने परीक्षा मुश्किल होने की संभावना से हिस्सा ही नहीं लिया। ऐसे में करनाल में परीक्षा में महज 17.91 फीसदी अभ्यर्थियों की ही उपस्थिति रही।
17784 अभ्यर्थियों में से महज 3135 ने ही दी परीक्षा
करनाल में परीक्षा के लिए 57 केंद्र बनाए गए थे। जहां 17784 अभ्यर्थियों ने परीक्षा देनी थी। लेकिन सुबह के सत्र में हुई परीक्षा में महज 3135 विद्यार्थी ही पहुंचे। आयोग के परीक्षा अधीक्षक सूबे सिंह ढुल ने बताया की परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई है। परीक्षा के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति स्कूलों व कॉलेजों को केंद्र बनाया गया था। जहां 14649 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।
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गहन जांच के बाद मिली एंट्री, महिलाओं को लॉक नोज पिन उतारने में हुई दिक्कत
परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों को पूरी जांच के बाद ही केंद्र में प्रवेश दिया गया। जांच कर्मियों ने महिला अभ्यर्थियों के नोज पिन, कांटे, मंगलसूत्र, हेयर क्लिप व हाथ और पैरों पर बंधे धागों को भी उतरवा दिया गया। कई युवतियों को लॉक नोज पिन उतारने में काफी दिक्कत भी हुई। ऐसे में कई युवतियां अपना सामान बैगों में समेटती नजर आई।
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करनाल। हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को हुई नायब तहसीलदार पद की परीक्षा में पटवारी, क्लर्क, शिक्षक और ग्रुप डी में लगे सरकारी कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। एक पटवारी ने बताया कि वह अपनी नौकरी से वैसे तो खुश है, लेकिन परीक्षा पास कर वह अधिकारी के बराबर पद पर पहुंचना चाहता है।
उधर, तहसीलदार के कार्यालय में कार्यरत ग्रुप डी कर्मचारी भी अपने साहब को देखकर नायब तहसीलदार बनने की लालसा से परीक्षा देना आया। वहीं, तहसील में क्लर्क पद पर कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहता है। क्योंकि एक तहसीलदार के पास मजिस्ट्रेट की पावर होती है। इसके बल पर ही वह कठोर निर्णय ले सकता है। नायब तहसीलदार पद की लिखित परीक्षा में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। वहीं, बेरोजगार युवाओं ने परीक्षा मुश्किल होने की संभावना से हिस्सा ही नहीं लिया। ऐसे में करनाल में परीक्षा में महज 17.91 फीसदी अभ्यर्थियों की ही उपस्थिति रही।
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17784 अभ्यर्थियों में से महज 3135 ने ही दी परीक्षा
करनाल में परीक्षा के लिए 57 केंद्र बनाए गए थे। जहां 17784 अभ्यर्थियों ने परीक्षा देनी थी। लेकिन सुबह के सत्र में हुई परीक्षा में महज 3135 विद्यार्थी ही पहुंचे। आयोग के परीक्षा अधीक्षक सूबे सिंह ढुल ने बताया की परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई है। परीक्षा के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति स्कूलों व कॉलेजों को केंद्र बनाया गया था। जहां 14649 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।
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गहन जांच के बाद मिली एंट्री, महिलाओं को लॉक नोज पिन उतारने में हुई दिक्कत
परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों को पूरी जांच के बाद ही केंद्र में प्रवेश दिया गया। जांच कर्मियों ने महिला अभ्यर्थियों के नोज पिन, कांटे, मंगलसूत्र, हेयर क्लिप व हाथ और पैरों पर बंधे धागों को भी उतरवा दिया गया। कई युवतियों को लॉक नोज पिन उतारने में काफी दिक्कत भी हुई। ऐसे में कई युवतियां अपना सामान बैगों में समेटती नजर आई।