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1537 किसानों ने छोड़ी धान की खेती
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धान का कटोरा कहलाने वाले जिले में चार दशक में धान की खेती ने भूजल स्तर को निगल लिया। भूजल की चिंताओं को देखते हुए इस बार खरीफ सीजन में धान के विकल्प में परिवर्तित फसलों के रकबे को करीब तीन गुना बढ़ाया गया है। पिछले साल 1131 हेक्टेयर में 1537 किसानों ने धान छोड़ कम पानी लागत वाली फसलें लगाई गई थी। इस बार 3280 हेक्टेयर में धान की जगह अन्य फसलें लगाने का लक्ष्य है। पिछले वर्षों में जिले में 1.70 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई होती रही है। इस बार कृषि मुख्यालय से 1.60 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 246251 हेक्टेयर
कृषि भूमि क्षेत्रफल 212118 हेक्टेयर
सिंचाई के लिए कृषि ट्यूबवेल संख्या 74375
नहरी सिंचित क्षेत्र 28 प्रतिशत
ट्यूबवेल से सिंचित कृषि क्षेत्र 71 प्रतिशत
इस वर्ष धान का रकबा 1.60 लाख हेक्टेयर
करनाल जिले में भूजल स्तर स्थिति (मीटर में)
खंड जून 1974 जून 2020
करनाल 5.90 17.22
इंद्री 6.53 14.03
नीलोखेड़ी 6.97 25.75
निसिंग 5.07 27.62
घरौंडा 5.41 23.12
असंध 4.41 26.92
धान की खेती के लिए 1200 मिलीमीटर वर्षा वाला क्षेत्र उपयुक्त होता है। करनाल जिले में वार्षिक औसतन वर्षा 400 मिलीमीटर है। 800 मिलीमीटर भूजल का इस्तेमाल करते हैं। विदेशों में अपने प्राकृतिक जल स्रोत को बचाने के लिए चावल पैदा करने की बजाय आयात कर लिया जाता है। धान पैदा कर स्थानीय किसान एक तरह से पानी रूपी विरासत को बेच रहे हैं। धान की खेती नहीं छोड़ने पर सीधी बिजाई का विकल्प दिया गया। इसके तहत जिले में तीन हजार एकड़ में सीधी बिजाई होगी। इस विधि से 30 से 35 प्रतिशत पानी की बचत होती है। किसानों को धान की खेती छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
- डा. आदित्य प्रताप डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग करनाल।
किसान की पीड़ा नहीं बिकती वैकल्पिक फसलें
हम अपनी जमीन में 25 प्रतिशत रकबे को धान की जगह मक्का में परिवर्तित करने को तैयार हैं बशर्ते मक्का की खरीद एमएसपी पर सुनिश्चित हो। पिछले साल मक्का का एमएसपी 1700 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक था, जबकि उनका मक्का 1150 रुपये प्रति क्विंटल बिका। ऐसे में धान की खेती छोड़ने में नुकसान होता है। जबकि धान की खेती पर खर्च ज्यादा है। लेबर की दिक्कत है। मक्का व अन्य फसलों का सरकार लाभकारी मूल्य दे।
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प्रगतिशील किसान धर्मबीर सतीजा, तकनीकी सलाहकार, किसान क्लब।
भूजल व पर्यावरण की चिंता किसान को भी है। सरकार केवल कहती है लेकिन मौके पर अन्य फसलों की बिक्री नहीं होती। किसान को खरीदार नहीं मिलता। हर किसान कर्जदार है। वह अपनी आमदनी का सर्कल चलाने के लिए धान की फसल लगाता है। धान लगाने का मकसद यही है कि कर्ज की अदायगी होती रहे। वैकल्पिक फसलों के अच्छे एमएसपी हों व खरीद की गारंटी हो तो किसान धान को छोड़ देंगे।
शाम सिंह मान, घोघड़ीपुर, प्रदेश संगठन मंत्री भाकियू।
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जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 246251 हेक्टेयर
कृषि भूमि क्षेत्रफल 212118 हेक्टेयर
सिंचाई के लिए कृषि ट्यूबवेल संख्या 74375
नहरी सिंचित क्षेत्र 28 प्रतिशत
ट्यूबवेल से सिंचित कृषि क्षेत्र 71 प्रतिशत
इस वर्ष धान का रकबा 1.60 लाख हेक्टेयर
करनाल जिले में भूजल स्तर स्थिति (मीटर में)
खंड जून 1974 जून 2020
करनाल 5.90 17.22
इंद्री 6.53 14.03
नीलोखेड़ी 6.97 25.75
निसिंग 5.07 27.62
घरौंडा 5.41 23.12
असंध 4.41 26.92
धान की खेती के लिए 1200 मिलीमीटर वर्षा वाला क्षेत्र उपयुक्त होता है। करनाल जिले में वार्षिक औसतन वर्षा 400 मिलीमीटर है। 800 मिलीमीटर भूजल का इस्तेमाल करते हैं। विदेशों में अपने प्राकृतिक जल स्रोत को बचाने के लिए चावल पैदा करने की बजाय आयात कर लिया जाता है। धान पैदा कर स्थानीय किसान एक तरह से पानी रूपी विरासत को बेच रहे हैं। धान की खेती नहीं छोड़ने पर सीधी बिजाई का विकल्प दिया गया। इसके तहत जिले में तीन हजार एकड़ में सीधी बिजाई होगी। इस विधि से 30 से 35 प्रतिशत पानी की बचत होती है। किसानों को धान की खेती छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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- डा. आदित्य प्रताप डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग करनाल।
किसान की पीड़ा नहीं बिकती वैकल्पिक फसलें
हम अपनी जमीन में 25 प्रतिशत रकबे को धान की जगह मक्का में परिवर्तित करने को तैयार हैं बशर्ते मक्का की खरीद एमएसपी पर सुनिश्चित हो। पिछले साल मक्का का एमएसपी 1700 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक था, जबकि उनका मक्का 1150 रुपये प्रति क्विंटल बिका। ऐसे में धान की खेती छोड़ने में नुकसान होता है। जबकि धान की खेती पर खर्च ज्यादा है। लेबर की दिक्कत है। मक्का व अन्य फसलों का सरकार लाभकारी मूल्य दे।
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प्रगतिशील किसान धर्मबीर सतीजा, तकनीकी सलाहकार, किसान क्लब।
भूजल व पर्यावरण की चिंता किसान को भी है। सरकार केवल कहती है लेकिन मौके पर अन्य फसलों की बिक्री नहीं होती। किसान को खरीदार नहीं मिलता। हर किसान कर्जदार है। वह अपनी आमदनी का सर्कल चलाने के लिए धान की फसल लगाता है। धान लगाने का मकसद यही है कि कर्ज की अदायगी होती रहे। वैकल्पिक फसलों के अच्छे एमएसपी हों व खरीद की गारंटी हो तो किसान धान को छोड़ देंगे।
शाम सिंह मान, घोघड़ीपुर, प्रदेश संगठन मंत्री भाकियू।