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23 कालोनियों के लोगों की चेतावनी : विकास शुल्क किया जाए कम, नहीं तो होगा आंदोलन
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:26 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। अप्रैल माह में प्रदेश सरकार द्वारा अवैध से वैध की गई 23 कॉलोनियों के लोगों को भेजे जा रहे नोटिसों के विरोध में कॉलोनी के लोग एकजुट होने लगे हैं। कॉलोनियों के लोगों का कहना है कि वे टैक्स देने को तैयार हैं, लेकिन प्रति गज एक हजार रुपये नहीं। ये रेट काफी ज्यादा हैं जो किसी भी सूरत में देने संभव नहीं है। कॉलोनी के लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि रेट 200 रुपये प्रति गज से कम किए जाएं, इसके बाद ही वे विकास शुल्क जमा करा सकेंगे। कॉलोनी के लोगों ने ये भी तर्क दिया है कि ये रेट पांच साल पहले भी थे, लेकिन अचानक से इस सरकार ने कई गुणा बढ़ा दिए हैं, जो अवैध कॉलोनी के लोगों के बजट से बाहर है। इसके अलावा, लोगों ने चेताया है कि अगर नगर निगम ने जबरदस्ती करने की कोशिश को वे आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।
गौरतलब है कि सरकार ने अप्रैल माह में करनाल की 66 में से से 23 कॉलोनियां वैध किया था। साथ ही शर्त थी कि पहले जनता विकास शुल्क जमा कराना होगा, इसके बाद ही कॉलोनियों में सड़कें और सीवरेज आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कलेक्टर रेट के हिसाब से 600 से लेकर एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक इसकी दर तय की गई। निगम की ओर से लोगों को विकास शुल्क जमा कराने के लिए समय भी दिया गया, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी किसी भी कालोनी के सदस्य ने एक रुपये भी विकास शुल्क के रूप में जमा नहीं कराया। हारकर नगर निगम ने अब 23 कॉलोनियों के लोगों को नो टिस भेजने शुरू कर दिए हैं। नोटिस में चेताया गया है कि 15 सितंबर तक विकास शुल्क जमा कराएं, अन्यथा उनको मकानों को सील करने से लेकर जब्त करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसको लेकर लोगों में रोष है।
एसोसिएशन की चेतावनी, फिर से होगा आंदोलन
एक हजार रुपये विकास शुल्क के विरोध में एक बार फिर से लोग एकजुट होने लगे हैं। बसंत विहार वेलफेयर एसोसिएशन पहले भी दो बार आंदोलन कर चुकी है और विकास शुल्क का विरोध जता चुकी है। चेतावनी भरे नोटिस भेजे जाने पर शनिवार को एकजुट हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है, साथ ही कहा है कि ये जबरदस्ती की जा रही है, जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। संस्था के वरिष्ठ उप प्रधान गुलाब सिंह पोसवाल और राजेंद्र आर्य ने ने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो फिर से सड़कों पर उतरेंगे। एसोसिएशन का तर्क है कि हुडा के कार्यकाल में 2012-13 में करनाल की 27 कॉलोनियां वैध की गई थी। तब विकास शुल्क की दर 120 रुपये थी, तो अब 1000 रुपये प्रति गज क्यों?
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कलेक्टर रेट के हिसाब से विकास शुल्क
कलेक्टर रेट - विकास शुल्क
7500 वर्ग मीटर से अधिक - 1000
पांच हजार से 7500 तक - 800
5000 से कम - 600
नोट : विकास शुल्क की फीस को कलेक्टर रेट के हिसाब से तीन वर्गों में बांटा गया है। यह दर वर्ग मीटर के हिसाब से है।
जो 23 कॉलोनियां वैध की गईं थीं, उनमें से विकास शुल्क नहीं आ रहा है। इसलिए अब इन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए सक्षम योजना के तहत 25 युवाओं की ड्यूटी लगाई है, जो घर घर जाकर नोटिस दे रहे हैं। कॉलोनी के लोगों को चाहिए कि वे समय पर विकास शुल्क जमा कराएं और नक्शा पास कराने समेत अन्य प्रक्रिया पूरी करें। प्रदेश सरकार के फैसले के बाद लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। विकास शुल्क कम या जा ज्यादा करना सरकार के हाथ में है। -धर्मपाल सिंह, डीटीपी, नगर निगम, करनाल।
ये तानाशाही फैसला है : आर्य
अवैध कॉलोनियों में सुविधाओं उपलब्ध कराने को लेकर आंदोलन करनेवाले राजेंद्र आर्य का कहना है कि ये सरकार का तानाशाही फैसला है, वे इसका विरोध करते हैं। एक हजार रुपये प्रति गज विकास शुल्क ज्यादा है, अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोग गरीब हैं वे इतना टैक्स नहीं दे सकते। इस फैसले के विरोध में फिर से आंदोलन किया जाएगा। आर्य ने कहा कि इससे अच्छा तो ये अवैध ही कॉलोनी रहती तो अच्छा था, कम से कम ये चेतावनी तो नहीं मिलती।
फैसले पर दोबारा विचार करे सरकार : बलविंद्र सिंह
इस बारे में वार्ड नंबर-2 के निवर्तमान पार्षद बलविंद्र सिंह का कहना है कि फैसला जनता के खिलाफ है, इसलिए इस मामले में सरकार को दोबारा से विचार करना चाहिए। सबसे पहले तो अवैध कालोनी कटने ही नहीं देना चाहिए, लेकिन जो कॉलोनी आबाद हो चुकी हैं, वहां पर सुविधाएं मिलनी चाहिए, साथ ही विकास शुल्क कम करना चाहिए। एक हजार रुपये प्रति गज शुल्क आज तक किसी भी कालोनी के लोगों ने जमा नहीं कराया है।
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करनाल। अप्रैल माह में प्रदेश सरकार द्वारा अवैध से वैध की गई 23 कॉलोनियों के लोगों को भेजे जा रहे नोटिसों के विरोध में कॉलोनी के लोग एकजुट होने लगे हैं। कॉलोनियों के लोगों का कहना है कि वे टैक्स देने को तैयार हैं, लेकिन प्रति गज एक हजार रुपये नहीं। ये रेट काफी ज्यादा हैं जो किसी भी सूरत में देने संभव नहीं है। कॉलोनी के लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि रेट 200 रुपये प्रति गज से कम किए जाएं, इसके बाद ही वे विकास शुल्क जमा करा सकेंगे। कॉलोनी के लोगों ने ये भी तर्क दिया है कि ये रेट पांच साल पहले भी थे, लेकिन अचानक से इस सरकार ने कई गुणा बढ़ा दिए हैं, जो अवैध कॉलोनी के लोगों के बजट से बाहर है। इसके अलावा, लोगों ने चेताया है कि अगर नगर निगम ने जबरदस्ती करने की कोशिश को वे आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।
गौरतलब है कि सरकार ने अप्रैल माह में करनाल की 66 में से से 23 कॉलोनियां वैध किया था। साथ ही शर्त थी कि पहले जनता विकास शुल्क जमा कराना होगा, इसके बाद ही कॉलोनियों में सड़कें और सीवरेज आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कलेक्टर रेट के हिसाब से 600 से लेकर एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक इसकी दर तय की गई। निगम की ओर से लोगों को विकास शुल्क जमा कराने के लिए समय भी दिया गया, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी किसी भी कालोनी के सदस्य ने एक रुपये भी विकास शुल्क के रूप में जमा नहीं कराया। हारकर नगर निगम ने अब 23 कॉलोनियों के लोगों को नो टिस भेजने शुरू कर दिए हैं। नोटिस में चेताया गया है कि 15 सितंबर तक विकास शुल्क जमा कराएं, अन्यथा उनको मकानों को सील करने से लेकर जब्त करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसको लेकर लोगों में रोष है।
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एसोसिएशन की चेतावनी, फिर से होगा आंदोलन
एक हजार रुपये विकास शुल्क के विरोध में एक बार फिर से लोग एकजुट होने लगे हैं। बसंत विहार वेलफेयर एसोसिएशन पहले भी दो बार आंदोलन कर चुकी है और विकास शुल्क का विरोध जता चुकी है। चेतावनी भरे नोटिस भेजे जाने पर शनिवार को एकजुट हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है, साथ ही कहा है कि ये जबरदस्ती की जा रही है, जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। संस्था के वरिष्ठ उप प्रधान गुलाब सिंह पोसवाल और राजेंद्र आर्य ने ने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो फिर से सड़कों पर उतरेंगे। एसोसिएशन का तर्क है कि हुडा के कार्यकाल में 2012-13 में करनाल की 27 कॉलोनियां वैध की गई थी। तब विकास शुल्क की दर 120 रुपये थी, तो अब 1000 रुपये प्रति गज क्यों?
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कलेक्टर रेट के हिसाब से विकास शुल्क
कलेक्टर रेट - विकास शुल्क
7500 वर्ग मीटर से अधिक - 1000
पांच हजार से 7500 तक - 800
5000 से कम - 600
नोट : विकास शुल्क की फीस को कलेक्टर रेट के हिसाब से तीन वर्गों में बांटा गया है। यह दर वर्ग मीटर के हिसाब से है।
जो 23 कॉलोनियां वैध की गईं थीं, उनमें से विकास शुल्क नहीं आ रहा है। इसलिए अब इन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए सक्षम योजना के तहत 25 युवाओं की ड्यूटी लगाई है, जो घर घर जाकर नोटिस दे रहे हैं। कॉलोनी के लोगों को चाहिए कि वे समय पर विकास शुल्क जमा कराएं और नक्शा पास कराने समेत अन्य प्रक्रिया पूरी करें। प्रदेश सरकार के फैसले के बाद लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। विकास शुल्क कम या जा ज्यादा करना सरकार के हाथ में है। -धर्मपाल सिंह, डीटीपी, नगर निगम, करनाल।
ये तानाशाही फैसला है : आर्य
अवैध कॉलोनियों में सुविधाओं उपलब्ध कराने को लेकर आंदोलन करनेवाले राजेंद्र आर्य का कहना है कि ये सरकार का तानाशाही फैसला है, वे इसका विरोध करते हैं। एक हजार रुपये प्रति गज विकास शुल्क ज्यादा है, अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोग गरीब हैं वे इतना टैक्स नहीं दे सकते। इस फैसले के विरोध में फिर से आंदोलन किया जाएगा। आर्य ने कहा कि इससे अच्छा तो ये अवैध ही कॉलोनी रहती तो अच्छा था, कम से कम ये चेतावनी तो नहीं मिलती।
फैसले पर दोबारा विचार करे सरकार : बलविंद्र सिंह
इस बारे में वार्ड नंबर-2 के निवर्तमान पार्षद बलविंद्र सिंह का कहना है कि फैसला जनता के खिलाफ है, इसलिए इस मामले में सरकार को दोबारा से विचार करना चाहिए। सबसे पहले तो अवैध कालोनी कटने ही नहीं देना चाहिए, लेकिन जो कॉलोनी आबाद हो चुकी हैं, वहां पर सुविधाएं मिलनी चाहिए, साथ ही विकास शुल्क कम करना चाहिए। एक हजार रुपये प्रति गज शुल्क आज तक किसी भी कालोनी के लोगों ने जमा नहीं कराया है।