फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   14 lack froud on the name of tb patient

फर्जी टीबी रोगियों की सूची बनाकर 14 लाख हड़पे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jan 2022 01:48 AM IST
विज्ञापन
14 lack froud on the name of tb patient
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। जिले में क्षय रोगियों के लिए संचालित की जा रही निक्षय पोषण योजना में फर्जीबाड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग में फर्जी क्षय रोगियों (टीबी मरीजों) की आईडी बनाकर करीब 14 लाख रुपये हड़प लिए। मामले में सीएमओ करनाल ने पुलिस को शिकायत देकर कुछ कर्मचारियों पर ही संदेह जताया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने पुलिस को शिकायत में कहा है कि जिला क्षय रोग (टीबी) अधिकारी करनाल द्वारा शिकायत दी गई थी कि टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के लिए किए जा रहे भुगतान में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होने पर जांच कमेटी गठित की गई थी। जिला टीबी अधिकारी ने शिकायत के साथ 34 पृष्ठों की कथित फर्जी टीबी मरीजों की निक्षय आईडी की सूची भी संलग्न की थी। जिसके आधार पर जांच कमेटी ने तीन स्वास्थ्य केंद्रों की सूची में से उनके मरीजों के नाम देकर उनके टीबी रिकार्ड की जांच की।
विज्ञापन

इन संस्थानों पर इन मरीजों का कोई रिकार्ड प्राप्त नहीं हुआ। डीटीओ डॉ. सिम्मी कपूर ने कहा कि निक्षय पोषण योजना के तहत प्रत्येक टीबी मरीज को 500 रुपये प्रति माह के हिसाब से छह माह तक यानी कुल 3 हजार रुपये दिए जाते हैं। ये रुपये सीधे मरीज के खाते में भेजे जाते हैं। शिकायत में कथित सभी फर्जी मरीज एक्सट्रा पलमनरी टीबी के मरीज हैं जोकि डीटीओ के निक्षय पोर्टल के यूजर आईडी व पासवर्ड का दुरुपयोग कर बनाए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डीटीओ की जिला निक्षय पोर्टल का यूजर आईडी एवं पासवर्ड जिला टीबी अधिकारी डॉ. सिम्मी कपूर, डीपीएस हरिश मलिक, सीटीएस कर्मबीर, डीईओ प्रीति के पास है। डॉ. सिम्मी कपूर ने बयानों में कहा कि भीष्म टीबी एचबी को डीबीटी मेकर बनाया गया था। निक्षय पोषण योजना का लाभ देने के लिए भीष्म टीबीएचवी जो कि टीयू करनाल का डीबीटी मेकर है। इसके द्वारा डीबीटी अप्रूवल के लिए आगे क्रास चेकिंग एवं एसटीएस द्वारा डीटीओ के पास भेजनी होती थी। डीटीओ द्वारा पिछले तीन माह में लगभग 14 लाख के फर्जीवाड़े की बात कही गई है। टीम ने पांच लोगों के बयान दर्ज किए हैं। सभी ने बयानों में कहा कि उन्होंने किसी को पासवर्ड व यूजर आईडी नहीं बताई। वहीं, भीष्म टीबी एचवी जो टीयू करनाल की डीबीटी को सत्यापन के लिए डीटीओ को भेजता था। उसने बयान में कहा कि उसके द्वारा किए गए सभी कार्य एसटीएस के दिशा निर्देश पर होते थे। उसने यह भी बताया कि एक से 34 पृष्ठों में दर्ज मरीजों की डीबीटी उसके द्वारा ही भेजी गई है। जोकि एसडीएस कर्मबीर के कहने पर भेजी थी। इसके बाद एसटीएस कर्मबीर ने सभी 34 पृष्ठों में दर्ज सभी मरीजों की सूची दिखाई गई तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया। उन्होंने डीटीओ का निक्षय पोर्टल का यूजर आईडी और पासवर्ड होने से भी मना कर दिया। कहा कि वही पीपीएम का कार्य करते थे। लेकिन पीपीएम का कार्य बिना निक्षय पोर्टल की यूजर आईडी और पासवर्ड के नहीं होता। कर्मबीर को एक टैब विभाग द्वारा दिया गया है। कर्मबीर ने कहा कि वह टैब खराब है लेकिन बिल से यह स्पष्ट है कि टैब दिन व रात को भी चला है। इससे अलग ट्रीटमेंट सपोर्टर को भी एक हजार रुपये दिए जाते हैं। उसमें भी फर्जीवाड़ा हुआ है। सिविल लाइन थाना प्रभारी रोशन ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। इसकी जांच की जा रही है।

निक्षय पोर्टल पर ऐसे आता है मरीज का नाम
सबसे पहले चिकित्सक द्वारा मरीज की जांच की जाती है। यदि उसे टीबी से ग्रसित पाया जाता है तो उसका नाम निक्षय पोर्टल पर इनरोल कर निक्षय आईडी जनरेट की जाती है। टीबी से ग्रसित मरीजों को जिला टीबी सेंटर करनाल से निक्षय पोर्टल पर इनरोल किया जाता है। टीबी मरीज को डीटीसी के अतिरिक्त संबंधित एसडीएच, सीएचसी, पीएचसी से निक्षय पॉर्टल पर इनरोल किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed