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134ए : हड़ताल बढ़ी, तकरार जारी
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Sun, 08 May 2016 12:17 AM IST
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134ए : हड़ताल बढ़ी, तकरार जारी
- फोटो : अमर उजाला
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134ए के खिलाफ चल रही प्राइवेट स्कूलों की हड़ताल और बढ़ गई है। स्कूल संचालकों ने अभिभावकों के मोबाइल पर सोमवार को भी स्कूल की छुट्टी होने का संदेश भेज दिया है। वहीं, बच्चों की बाधित होने से अभिभावकों में भी उबाल है। प्राइवेट स्कूलों के इस रवैये से अभिभावक भी अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
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शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को पत्र जारी कर कम आय वर्ग वाले छात्रों को 134ए के कोटे के तहत दाखिला देने के निर्देश दिए हैं। पहले ड्रा में सूचित विद्यार्थियों के लिए 13 मई तक संबंधित स्कूलों में दाखिला लेना अनिवार्य है। दूसरी ओर सरकार के इस आदेश के बाद निजी स्कूलों ने हड़ताल की अवधि बढ़ा दी है। अब स्कूलों ने अभिभावकों को सोमवार को भी स्कूल बंद रहने का संदेश भिजवा दिया है। गौरतलब है कि जिले के 250 निजी स्कूल मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। अभिभावकों ने सवाल किया है कि क्या यह निजी स्कूलों की दादागिरी नहीं है? अभिभावक रामचंद्र, नरेश, गोल्डी, जयभवान ने कहा कि हम हर माह बच्चों की फीस देते हैं, लेकिन चार दिन से स्कूल बंद होंगे तो बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होगी, उनका कसूर क्या है?
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स्कूल तो आवंटित, दाखिला कैसे कराएं
शिक्षा विभाग ने 134ए के तहत निजी स्कूलों में होने वाले दाखिलों की प्रवेश परीक्षा का परिणाम बृहस्पतिवार को जारी कर दिया है। मेरिट सूची जारी कर उनको सेंटर भी आवंटित कर दिए हैं। लेकिन, परिणाम आने के अगले ही दिन से निजी स्कूलों ने हड़ताल शुरू कर दी। अब अभिभावक असमंजस में हैं कि आखिर दाखिला कराएं तो कैसे?
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रद्द हो सकती है मान्यता
शिक्षा विभाग ने जिले के सभी निजी स्कूलों को शिक्षा नियम 134ए के तहत दूसरी से 12वीं कक्षा तक कुल सीटों में से 10 प्रतिशत सीटों पर कम आय वर्ग के बच्चों को दाखिला देने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को मेधावी छात्रों की सूची भी भेज दी गई है। विभाग का आदेश है कि 134ए के तहत दाखिल होने वाले किसी भी विद्यार्थी से स्कूल फीस की नहीं लेंगे। जो स्कूल आदेश का पालना नहीं करेंगे, उनकी मान्यता भी रद्द हो सकती है।
कर्मचारियों के शोषण का आरोप
अभिभावकों का कहना है कि बेहतर शिक्षा व सुविधाओं के नाम पर लूट मचाने वाले स्कूलों के आंकड़ों और वास्तविकता में जमीन आसमान का अंतर है। निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाकर या अन्य सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के हालात बदतर हैं। अभिभावकों का आरोप है कि जिले के अधिकतर स्कूलों में अध्यापकों का वेतन पांचवें वेतन आयोग के बराबर नहीं है, जबकि प्रदेश में वर्ष 2016 से सातवां वेतन आयोग शुरू हो गया है। निजी स्कूलों में ऊंचे पदों पर नौकरी कर रहे कुछ अध्यापकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें सिर्फ आठ से 10 हजार रुपये वेतन मिलता है। जबकि बैलेंसशीट में उनकी सैलरी सरकारी नियमों के अनुसार दिखाई जा रही है। उधर, नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने कहा कि कई स्कूलों में बस ड्राइवर, कंडक्टर, चपरासी और सफाई कर्मियों की तनख्वाह सात हजार से ऊपर नहीं है। अध्यापक व कर्मियों को अपनी बात कहने का भी अधिकार नहीं है।
विभाग की ओर से 134ए की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हुए मेधावी छात्रों की मेरिट सूची जारी कर दी है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों को सेंटर आवंटित हुए हैं, उन स्कूलों को प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई स्कूल विभाग के आदेशों की अवहेलना करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-सपना जैन, खंड शिक्षा अधिकारी