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डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू का डर, स्वास्थ्य विभाग की नहीं कोई तैयारी
Updated Tue, 11 Dec 2018 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। ठंड शुरू हो चुकी है। डेंगू के बाद अब लोगों को स्वाइन फ्लू का डर सताने लगा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है और न ही स्वाइन फ्लू को लेकर कोई तैयारी की है। हालांकि, अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का एक भी केस सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू को लेकर बड़ी लापरवाही बरत रहा है।
स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता के लिए भी कोई तैयारी नहीं की है। इससे अलग स्वाइन फ्लू को लेकर अलग से वार्ड बनाए जाते हैं, लेकिन अभी तक ना तो कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोई वार्ड बना है और ना ही नागरिक अस्पताल में।
पिछले वर्ष अगस्त में ही स्वाइन फ्लू के छह केस सामाने आए थे। लोगों के अंदर से अभी तक डेंगू का डर नहीं गया है, ऐसे में यदि स्वाइन फ्लू भी डेंगू की तरह फैल गया तो स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर पाएगा। इस बार 102 डेंगू के केस स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज हुए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ऐसा कोई घर नहीं रहा, जिस घर में डेंगू ने दस्तक ना दी हो। सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में बुखार के मरीजों को बेड तक नहीं मिले। डेंगू के इस कहर के बाद भी स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू को लेकर सुस्त है।
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ये है स्वाइन फ्लू
डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू एक संक्रामक सांस का रोग है। स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है, खांसने, छींकने, थूकने से यह वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है। इसके लिए लोगों को सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। अगर घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया तो, घर के बाकी लोगों को इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए और स्वाइन फ्लू के मरीज को आराम करना चाहिए।
पिछले वर्ष अगस्त में बरपाया था स्वाइन फ्लू ने कहर
वैसे तो स्वाइन फ्लू सर्दियों में आता है लेकिन 2017 में गर्मी में ही स्वाइन फ्लू ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। पिछले वर्ष अगस्त में ही स्वाइन फ्लू के छह केस सामने आ गए थे। जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था क्योंकि उस दौरान भी विभाग की स्वाइन फ्लू को लेकर कोई तैयारी नहीं थी।
ये बरतें सावधानी
- किसी से हाथ न मिलाएं, बल्कि नमस्ते बोलकर ही उसका हाल-चाल पूछे।
- बार-बार साबुन और पानी से अपने हाथ धोएं।
- जब खांसी या छींक आए, तो अपने मुंह और नाक को रूमाल आदि से ढक लें, या फिर टिश्यू का इस्तेमाल करें ओर उसे तुरंत डस्टबिन में डाल दें।
- दरवाजे के हैंडल आदि को नियमित साफ़ रखें।
- सुनिश्चित करें कि बच्चे इस सलाह का पालन करें।
ये हैं स्वाइनफ्लू के लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना
- कफ, कोल्ड और लगातार खांसी
- मांसपेशियां में दर्द या अकड़न
- सिर में भयानक दर्द
- नींद न आना, ज्यादा थकान
- दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना
- गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
स्वाइन फ्लू को लेकर कर रहे हैं तैयारियां : डॉ. सरोज
अभी डेंगू का असर खत्म हुआ है स्वाइन फ्लू को लेकर तैयारियां की जा रही हैं, स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और मेडिकल कॉलेज या नागरिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड भी बनाया जाएगा। स्वाइन फ्लू के लिए दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।
-डॉ. सरोज, जिला मलेरिया अधिकारी, करनाल।
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करनाल। ठंड शुरू हो चुकी है। डेंगू के बाद अब लोगों को स्वाइन फ्लू का डर सताने लगा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है और न ही स्वाइन फ्लू को लेकर कोई तैयारी की है। हालांकि, अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का एक भी केस सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू को लेकर बड़ी लापरवाही बरत रहा है।
स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता के लिए भी कोई तैयारी नहीं की है। इससे अलग स्वाइन फ्लू को लेकर अलग से वार्ड बनाए जाते हैं, लेकिन अभी तक ना तो कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोई वार्ड बना है और ना ही नागरिक अस्पताल में।
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पिछले वर्ष अगस्त में ही स्वाइन फ्लू के छह केस सामाने आए थे। लोगों के अंदर से अभी तक डेंगू का डर नहीं गया है, ऐसे में यदि स्वाइन फ्लू भी डेंगू की तरह फैल गया तो स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर पाएगा। इस बार 102 डेंगू के केस स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज हुए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ऐसा कोई घर नहीं रहा, जिस घर में डेंगू ने दस्तक ना दी हो। सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में बुखार के मरीजों को बेड तक नहीं मिले। डेंगू के इस कहर के बाद भी स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू को लेकर सुस्त है।
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ये है स्वाइन फ्लू
डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू एक संक्रामक सांस का रोग है। स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है, खांसने, छींकने, थूकने से यह वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है। इसके लिए लोगों को सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। अगर घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया तो, घर के बाकी लोगों को इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए और स्वाइन फ्लू के मरीज को आराम करना चाहिए।
पिछले वर्ष अगस्त में बरपाया था स्वाइन फ्लू ने कहर
वैसे तो स्वाइन फ्लू सर्दियों में आता है लेकिन 2017 में गर्मी में ही स्वाइन फ्लू ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। पिछले वर्ष अगस्त में ही स्वाइन फ्लू के छह केस सामने आ गए थे। जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था क्योंकि उस दौरान भी विभाग की स्वाइन फ्लू को लेकर कोई तैयारी नहीं थी।
ये बरतें सावधानी
- किसी से हाथ न मिलाएं, बल्कि नमस्ते बोलकर ही उसका हाल-चाल पूछे।
- बार-बार साबुन और पानी से अपने हाथ धोएं।
- जब खांसी या छींक आए, तो अपने मुंह और नाक को रूमाल आदि से ढक लें, या फिर टिश्यू का इस्तेमाल करें ओर उसे तुरंत डस्टबिन में डाल दें।
- दरवाजे के हैंडल आदि को नियमित साफ़ रखें।
- सुनिश्चित करें कि बच्चे इस सलाह का पालन करें।
ये हैं स्वाइनफ्लू के लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना
- कफ, कोल्ड और लगातार खांसी
- मांसपेशियां में दर्द या अकड़न
- सिर में भयानक दर्द
- नींद न आना, ज्यादा थकान
- दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना
- गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
स्वाइन फ्लू को लेकर कर रहे हैं तैयारियां : डॉ. सरोज
अभी डेंगू का असर खत्म हुआ है स्वाइन फ्लू को लेकर तैयारियां की जा रही हैं, स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और मेडिकल कॉलेज या नागरिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड भी बनाया जाएगा। स्वाइन फ्लू के लिए दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।
-डॉ. सरोज, जिला मलेरिया अधिकारी, करनाल।