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हड़ताल : रोडवेज यूनियन और प्रशासन ने झोंकी ताकत, आज से अन्य विभागों के क्लर्क व लेखाकार कांटेंगे टिकट
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:39 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। एक सप्ताह से चल रही रोडवेज की हड़ताल खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। रोडवेज कर्मी 720 बसों की पालिसी को रद्द करने पर अड़े हैं, जबकि सरकार किसी भी स्थिति में पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में दोनों ने ही हड़ताल को लेकर कमर कस ली है। कर्मचारी चाह रहे हैं कि हड़ताल हर हाल में सफल रहे, इसके लिए वे अन्य विभागों की यूनियनों से भी सहयोग मांग रहे हैं, जब कि प्रशासन लगातार बसों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जोड़तोड़ कर रहा है। डिपो के सभी परिचालकों द्वारा हड़ताल पर चले जाने के कारण बुधवार को बसों में टिकट काटने की जिम्मेदारी अन्य विभागों के क्लर्कों और लेखाकारों को सौंपी जाएगी। करीब 168 लेखाकार, सहायक लेखाकार व सेवादारों को इसके लिए बाकायदा पंचायत भवन में प्रशिक्षण दिया गया।
पिछले सात दिन तक चल रही हड़ताल के कारण यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। डिपो में करीब 186 बसें हैं। इनके सभी चालक और परिचालक हड़ताल पर चल रहे हैं। ऐसे में रोडवेज की करीब 50 बसें ही रूटों पर दौड़ रहीं हैं। 13 बसें हायर की हुई हैं, जबकि 67 बसें प्राइवेट चल रही हैं। शेष बसें डिपो में खड़ी हैं। रोडवेज यूनियन द्वारा हड़ताल को और लंबा करने के कारण प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार विभाग ने आपात स्थिति को देखते हुए करीब 100 चालक हायर किए हैं, इसके साथ स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य विभाग, डीडीए, एक्साइज विभाग व लघु सचिवालय के लेखाकार, सहायक लेखाकार व क्लर्कों को परिचालक की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की है। मंगलवार को पंचायत भवन में इन विभागों के करीब 200 कर्मचारियों को एडीसी निशांत यादव, रोडवेज जीएम प्रद्युमन सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने जानकारी दी। साथ ही टिकट काटने को लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया।
नौकरी के लिए सुबह से ही लाइन
एक तरफ रोडवेज के कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं, दूसरी ओर चालक और परिचालक की नौकरी के लिए युवकों की भीड़ उमड़ रही है। हड़ताल लंबी चलने के कारण आरटीए की ओर से मंगलवार को हैवी लाइसेंस धारकों का टेस्ट लिया गया और करीब 100 ऐसे चालकों की लिस्ट बनाई गई। वहीं, परिचालकों के लिए भी लगातार आवेदन करने वालों की भीड़ बढ़ रही है। अब करीब पांच हजार आवेदन आ चुके हैं।
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हड़ताल को देखते हुए रोडवेज के अलावा अन्य विभागों के क्लर्कों और अन्य स्टाफ की बैठक लेकर उन्हें बुधवार से बसों में टिकट काटने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश सरकार के आदेशानुसार यह फैसला लिया है। अगर कोई कर्मचारी इस मामले में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-निशांत यादव, एडीसी, आरटीए।
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करनाल। एक सप्ताह से चल रही रोडवेज की हड़ताल खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। रोडवेज कर्मी 720 बसों की पालिसी को रद्द करने पर अड़े हैं, जबकि सरकार किसी भी स्थिति में पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में दोनों ने ही हड़ताल को लेकर कमर कस ली है। कर्मचारी चाह रहे हैं कि हड़ताल हर हाल में सफल रहे, इसके लिए वे अन्य विभागों की यूनियनों से भी सहयोग मांग रहे हैं, जब कि प्रशासन लगातार बसों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जोड़तोड़ कर रहा है। डिपो के सभी परिचालकों द्वारा हड़ताल पर चले जाने के कारण बुधवार को बसों में टिकट काटने की जिम्मेदारी अन्य विभागों के क्लर्कों और लेखाकारों को सौंपी जाएगी। करीब 168 लेखाकार, सहायक लेखाकार व सेवादारों को इसके लिए बाकायदा पंचायत भवन में प्रशिक्षण दिया गया।
पिछले सात दिन तक चल रही हड़ताल के कारण यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। डिपो में करीब 186 बसें हैं। इनके सभी चालक और परिचालक हड़ताल पर चल रहे हैं। ऐसे में रोडवेज की करीब 50 बसें ही रूटों पर दौड़ रहीं हैं। 13 बसें हायर की हुई हैं, जबकि 67 बसें प्राइवेट चल रही हैं। शेष बसें डिपो में खड़ी हैं। रोडवेज यूनियन द्वारा हड़ताल को और लंबा करने के कारण प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार विभाग ने आपात स्थिति को देखते हुए करीब 100 चालक हायर किए हैं, इसके साथ स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य विभाग, डीडीए, एक्साइज विभाग व लघु सचिवालय के लेखाकार, सहायक लेखाकार व क्लर्कों को परिचालक की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की है। मंगलवार को पंचायत भवन में इन विभागों के करीब 200 कर्मचारियों को एडीसी निशांत यादव, रोडवेज जीएम प्रद्युमन सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने जानकारी दी। साथ ही टिकट काटने को लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया।
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नौकरी के लिए सुबह से ही लाइन
एक तरफ रोडवेज के कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं, दूसरी ओर चालक और परिचालक की नौकरी के लिए युवकों की भीड़ उमड़ रही है। हड़ताल लंबी चलने के कारण आरटीए की ओर से मंगलवार को हैवी लाइसेंस धारकों का टेस्ट लिया गया और करीब 100 ऐसे चालकों की लिस्ट बनाई गई। वहीं, परिचालकों के लिए भी लगातार आवेदन करने वालों की भीड़ बढ़ रही है। अब करीब पांच हजार आवेदन आ चुके हैं।
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हड़ताल को देखते हुए रोडवेज के अलावा अन्य विभागों के क्लर्कों और अन्य स्टाफ की बैठक लेकर उन्हें बुधवार से बसों में टिकट काटने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश सरकार के आदेशानुसार यह फैसला लिया है। अगर कोई कर्मचारी इस मामले में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-निशांत यादव, एडीसी, आरटीए।