{"_id":"5ba29cd6867a557ecc32799e","slug":"121537383638-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाटर सप्लाई व सिवरेज व्यवस्था नगर निगम के हवाले करने पर कर्मचारियों को प्रदर्शन जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाटर सप्लाई व सिवरेज व्यवस्था नगर निगम के हवाले करने पर कर्मचारियों को प्रदर्शन जारी
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। शहर की वाटर सप्लाई और सीवरेज व्यवस्था नगर निगम के हवाले करने पर बुधवार को तीसरे दिन हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्कर यूनियन ने अधीक्षक अभियंता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी परिमंडल करनाल के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। अध्यक्षता बांच प्रधान सरूप सिंह विर्क ने की व संचालन ब्रांच सचिव सुमेर चंद ने किया।
मीटिंग में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि कोई भी कर्मचारी नगर निगम में अपनी आगमन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करेगा। राज्य उपमहासचिव कृष्ण चंद शर्मा व जिला सचिव धर्म बीर जांगड़ा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने सोनीपत और करनाल शहर की वाटर सप्लाई व सीवरेज व्यवस्था को नगर निगम के हवाले करने जा रही है। 1993 से पहले शहर की जल मल की व्यवस्था नगर निगम ही देखता था लेकिन नगर निगम से यह व्यवस्था न चलने के कारण 1993 में जल मल की यह व्यवस्था निगम से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को दी गई थी विभाग के कर्मचारियों द्वारा इस व्यवस्था को कड़ी मेहनत से जन-जन गांवों-गांवों शहर-शहर व गली-गली तक पहुंचाने का काम किया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा पानी का रिव्यू जो 1993 से पहले 50,000 प्रति वर्ष भी नहीं था उसे 2.5 से 3 करोड़ प्रति वर्ष तक पहुंचाने का काम किया। शहर की जल-मल व्यवस्था को नगर निगम के हवाले करके हरियाणा सरकार अपनी जिम्मेवारी से पीछा छुड़ाकर स्थानीय संस्थाओं को दे रही है कर्मचारियों की मांग है कि नगर निगम में भेजने से पहले नियम व शर्तें बताई जाए, क्योंकि आज तीन दिन बाद भी शर्त व नियम नहीं दिए गए।
डेपूटेशन अलाउंस 10 प्रतिशत दिया जाएं। स्थानीय निकायों को देने का मतलब है कि पीने के पानी का जमकर दोहन करना है और बोतल बंद पानी को बड़वा देना है। पानी की बचत को लेकर यदि सरकार गंभीर है तो हरियाणा सरकार इसे अपने सरकारी विभाग के आधीन ही रखे तो सरकार जनता को बेहतर व स्वच्छ पानी की आपूर्ति करवा सकती है तथा जनता के लिए सरकारी रोजगारों की संभावनाएं भी बढ़ेगी। स्थानीय संस्थाओं के पास जाने से पक्का रोजगार भी घटेगा, क्योंकि नगर निगम के पास पहले ही स्टाफ की कमी है। जिला उप प्रधान रंग लाल संधु व जिला कोषाध्यक्ष नरेश सैन ने कहा कि हरियाणा सरकार ने करनाल शहर की वाटर सप्लाई व्यवस्था नगर निगम को हस्तांतरित करदी तथा 173 कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के डेपुटेशन पर भेजने का निर्णय ले लिया है जो कि तर्क व न्याय संगत नहीं है ओर न ही कर्मचारियों से कोई राय ली गई और न ही क़ोई नियम व शर्तें तय की गईं। इस अवसर पर सुमेर चंद, जयपाल, रणबीरा फौर, साधूराम, पवन शर्मा, सुभाष चंद, राजीव शर्मा, ओम प्रकाश, ओमप्रकाश माटा, लक्ष्मण, सुनील तुली व रोहताश मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल। शहर की वाटर सप्लाई और सीवरेज व्यवस्था नगर निगम के हवाले करने पर बुधवार को तीसरे दिन हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्कर यूनियन ने अधीक्षक अभियंता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी परिमंडल करनाल के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। अध्यक्षता बांच प्रधान सरूप सिंह विर्क ने की व संचालन ब्रांच सचिव सुमेर चंद ने किया।
मीटिंग में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि कोई भी कर्मचारी नगर निगम में अपनी आगमन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करेगा। राज्य उपमहासचिव कृष्ण चंद शर्मा व जिला सचिव धर्म बीर जांगड़ा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने सोनीपत और करनाल शहर की वाटर सप्लाई व सीवरेज व्यवस्था को नगर निगम के हवाले करने जा रही है। 1993 से पहले शहर की जल मल की व्यवस्था नगर निगम ही देखता था लेकिन नगर निगम से यह व्यवस्था न चलने के कारण 1993 में जल मल की यह व्यवस्था निगम से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को दी गई थी विभाग के कर्मचारियों द्वारा इस व्यवस्था को कड़ी मेहनत से जन-जन गांवों-गांवों शहर-शहर व गली-गली तक पहुंचाने का काम किया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा पानी का रिव्यू जो 1993 से पहले 50,000 प्रति वर्ष भी नहीं था उसे 2.5 से 3 करोड़ प्रति वर्ष तक पहुंचाने का काम किया। शहर की जल-मल व्यवस्था को नगर निगम के हवाले करके हरियाणा सरकार अपनी जिम्मेवारी से पीछा छुड़ाकर स्थानीय संस्थाओं को दे रही है कर्मचारियों की मांग है कि नगर निगम में भेजने से पहले नियम व शर्तें बताई जाए, क्योंकि आज तीन दिन बाद भी शर्त व नियम नहीं दिए गए।
विज्ञापन
डेपूटेशन अलाउंस 10 प्रतिशत दिया जाएं। स्थानीय निकायों को देने का मतलब है कि पीने के पानी का जमकर दोहन करना है और बोतल बंद पानी को बड़वा देना है। पानी की बचत को लेकर यदि सरकार गंभीर है तो हरियाणा सरकार इसे अपने सरकारी विभाग के आधीन ही रखे तो सरकार जनता को बेहतर व स्वच्छ पानी की आपूर्ति करवा सकती है तथा जनता के लिए सरकारी रोजगारों की संभावनाएं भी बढ़ेगी। स्थानीय संस्थाओं के पास जाने से पक्का रोजगार भी घटेगा, क्योंकि नगर निगम के पास पहले ही स्टाफ की कमी है। जिला उप प्रधान रंग लाल संधु व जिला कोषाध्यक्ष नरेश सैन ने कहा कि हरियाणा सरकार ने करनाल शहर की वाटर सप्लाई व्यवस्था नगर निगम को हस्तांतरित करदी तथा 173 कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के डेपुटेशन पर भेजने का निर्णय ले लिया है जो कि तर्क व न्याय संगत नहीं है ओर न ही कर्मचारियों से कोई राय ली गई और न ही क़ोई नियम व शर्तें तय की गईं। इस अवसर पर सुमेर चंद, जयपाल, रणबीरा फौर, साधूराम, पवन शर्मा, सुभाष चंद, राजीव शर्मा, ओम प्रकाश, ओमप्रकाश माटा, लक्ष्मण, सुनील तुली व रोहताश मौजूद रहे।
विज्ञापन