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Karnal News: फसल अवशेष जलाने पर दोगुना लगेगा जुर्माना
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करनाल। फसल अवशेष जलाने पर कड़ाई से रोक लगाने की दिशा में केंद्र सरकार ने संबंधित किसानों पर लगाया जाने वाला जुर्माना (आर्थिक दंड) दोगुना कर दिया है। किसानों को किसी भी स्थिति में फसल अवशेष में आग न लगाने को कहा गया है।
उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है, गेहूं अनाज मंडियों में पहुंचने लगा है, जिसकी खरीद भी की जा रही है, लेकिन इस मौके पर खेतों को खाली करने की जल्दबाजी में किसानों द्वारा फसल अवशेष को जलाने के मामले भी सामने आते हैं लेकिन इस बार हरियाणा सरकार में फसल अवशेष को शतप्रतिशत रोकने (जीरो बर्निंग) का लक्ष्य दिया है। इसके लिए लगातार किसानों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जा रहा है।
उपनिदेशक ने बताया कि 27 मई 2016 को फसल अवशेष जलाने पर किसानो पर आर्थिक दंड लगाने का भी प्रावधान किया गया था, उसमें दो एकड़ तक 2500 रुपये, पांच एकड़ तक 5000 रुपये, पांच एकड़ से ज्यादा 15000 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने द गजट ऑफ इंडिया नंबर 632 के तहत बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। अब दो एकड़ फसल अवशेष जलाने पर 5000 रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा पर 30 हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान कर दिया गया है।
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इधर, उपायुक्त की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत गेहूं फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है जो 15 मई 2025 तक लागू रहेगा। यदि कोई व्यक्ति इसका उलंघन करने का दोषी पाया जाता है तो वह भारतीय न्याय संहिता 2023 एवं सपठित वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम -1981 के तहत दंड का भागी होगा।
उप कृषि निदेशक ने किसानों से अनुरोध किया है कि वे गेहूं फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग न लगाएं बल्कि इसको पशुचारे के तौर पर या खेत में ही मिलाकर उपयोग करें। क्योंकि फसल अवशेषों में आग लगाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, भूमि की उर्वरता में कमी आती है व जान माल की हानि का डर भी बना रहता है।
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उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है, गेहूं अनाज मंडियों में पहुंचने लगा है, जिसकी खरीद भी की जा रही है, लेकिन इस मौके पर खेतों को खाली करने की जल्दबाजी में किसानों द्वारा फसल अवशेष को जलाने के मामले भी सामने आते हैं लेकिन इस बार हरियाणा सरकार में फसल अवशेष को शतप्रतिशत रोकने (जीरो बर्निंग) का लक्ष्य दिया है। इसके लिए लगातार किसानों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जा रहा है।
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उपनिदेशक ने बताया कि 27 मई 2016 को फसल अवशेष जलाने पर किसानो पर आर्थिक दंड लगाने का भी प्रावधान किया गया था, उसमें दो एकड़ तक 2500 रुपये, पांच एकड़ तक 5000 रुपये, पांच एकड़ से ज्यादा 15000 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने द गजट ऑफ इंडिया नंबर 632 के तहत बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। अब दो एकड़ फसल अवशेष जलाने पर 5000 रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा पर 30 हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान कर दिया गया है।
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इधर, उपायुक्त की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत गेहूं फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है जो 15 मई 2025 तक लागू रहेगा। यदि कोई व्यक्ति इसका उलंघन करने का दोषी पाया जाता है तो वह भारतीय न्याय संहिता 2023 एवं सपठित वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम -1981 के तहत दंड का भागी होगा।
उप कृषि निदेशक ने किसानों से अनुरोध किया है कि वे गेहूं फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग न लगाएं बल्कि इसको पशुचारे के तौर पर या खेत में ही मिलाकर उपयोग करें। क्योंकि फसल अवशेषों में आग लगाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, भूमि की उर्वरता में कमी आती है व जान माल की हानि का डर भी बना रहता है।