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मनुष्य अगर सहज होकर सही गति से चले तो जीत अवश्य मिलती है- सुधांशु
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। जीवन में सफल होने के लिए एकाग्रता जरूरी है। बिना एकाग्रता के सफलता हासिल नहीं की जा सकती है। उक्त विचार मेरठ पावन धाम आश्रम में चल रहे तीन दिवसीय सत्संग समारोह के अंतिम दिन सुधांशु महाराज ने लोगों के बीच व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ज्यादा उलझने पालने से सफलता दूर चली जाती है।
संत सुधांशु महाराज ने कहा कि मनुष्य अगर सहज होकर सही गति से चले तो जीत अवश्य मिलती है। जीवन में अपनी उलझने कम करें, इससे कम ऊर्जा लगेगी और ज्यादा काम होगा। सार्थक योजना बनाना और उसमें से खामियां निकलना और फिर काम करना श्रेष्ठ कार्य होता है। उन्होंने कहा मनुष्य के दिमाग में अगर हड़बड़ाहट हो और खलल रहे तो ठीक नहीं रहता। आजकल युवा आधी बात सुनते हैं और जवाब देना शुरू कर देते हैं क्योंकि मन अशांत होता है। ऐसी स्थिति में कुछ नहीं सूझता, स्वस्थ, समर्थ रहना सीखो, दुखी: इन्सान सब के लिए बोझ होता है। प्रसन्नता कमाओ, चीजें चाहे थोड़ी हों, खुशी ज्यादा हो, हम लोग ज्यादा चीजें लेने के चक्कर में ज्यादा मुसीबत ले लेते हैं। आनंद में रहना सबसे सुखी जीवन है, छोटे से घर में रहकर जो आनंद है, वे कई बार बहुत बड़े घर में नहीं मिलता। अपने अवसरों का लाभ लें, अपनी प्राथमिकता तय करें, अपने घर को प्रेम का मंदिर बनाए, कोई भी अच्छी चीज कहीं से भी मिले, उसे तुरंत ग्रहण करें। फिर देखिए जीवन में खुशियां किस तरह आती हैं। इस मौके पर मुख्य रूप से राजिंद्र भारती, सुभाष वत्स, सोमदत्त सैनी, सुरेश बाहेती, ओपी सलुजा, रमेश अत्रेजा, धर्मपाल खैंची, कमलेश भारती, रजनी बाहेती, मीना पाल तथा सुषमा आदि मौजूद रहे।
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करनाल। जीवन में सफल होने के लिए एकाग्रता जरूरी है। बिना एकाग्रता के सफलता हासिल नहीं की जा सकती है। उक्त विचार मेरठ पावन धाम आश्रम में चल रहे तीन दिवसीय सत्संग समारोह के अंतिम दिन सुधांशु महाराज ने लोगों के बीच व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ज्यादा उलझने पालने से सफलता दूर चली जाती है।
संत सुधांशु महाराज ने कहा कि मनुष्य अगर सहज होकर सही गति से चले तो जीत अवश्य मिलती है। जीवन में अपनी उलझने कम करें, इससे कम ऊर्जा लगेगी और ज्यादा काम होगा। सार्थक योजना बनाना और उसमें से खामियां निकलना और फिर काम करना श्रेष्ठ कार्य होता है। उन्होंने कहा मनुष्य के दिमाग में अगर हड़बड़ाहट हो और खलल रहे तो ठीक नहीं रहता। आजकल युवा आधी बात सुनते हैं और जवाब देना शुरू कर देते हैं क्योंकि मन अशांत होता है। ऐसी स्थिति में कुछ नहीं सूझता, स्वस्थ, समर्थ रहना सीखो, दुखी: इन्सान सब के लिए बोझ होता है। प्रसन्नता कमाओ, चीजें चाहे थोड़ी हों, खुशी ज्यादा हो, हम लोग ज्यादा चीजें लेने के चक्कर में ज्यादा मुसीबत ले लेते हैं। आनंद में रहना सबसे सुखी जीवन है, छोटे से घर में रहकर जो आनंद है, वे कई बार बहुत बड़े घर में नहीं मिलता। अपने अवसरों का लाभ लें, अपनी प्राथमिकता तय करें, अपने घर को प्रेम का मंदिर बनाए, कोई भी अच्छी चीज कहीं से भी मिले, उसे तुरंत ग्रहण करें। फिर देखिए जीवन में खुशियां किस तरह आती हैं। इस मौके पर मुख्य रूप से राजिंद्र भारती, सुभाष वत्स, सोमदत्त सैनी, सुरेश बाहेती, ओपी सलुजा, रमेश अत्रेजा, धर्मपाल खैंची, कमलेश भारती, रजनी बाहेती, मीना पाल तथा सुषमा आदि मौजूद रहे।
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