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यूपी का गेहूं है असली विवाद की जड़, एक पक्ष बंद करने पर अड़ा तो दूसरा लेने पर
Updated Sun, 08 Apr 2018 12:00 AM IST
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यूपी का गेहूं है असली विवाद की जड़, एक पक्ष बंद करने पर अड़ा तो दूसरा लेने पर
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। नई अनाज मंडी करनाल में चल रहे विवाद की असली जड़ यूपी का गेहूं है। आढ़तियों का एक ग्रुप चाहता है कि यूपी से गेहूं ट्रेडर्स लेकर न आएं, जबकि दूसरा राइस मिलर्स समर्थित ग्रुप यूपी के गेहूं को खरीदने के दावे कर रहा है। इसी कारण दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। इसके बाद नौबत नया प्रधान तक चुनने की आ गई है। फिलहाल यूपी के गेहूं को लेकर तनातनी जारी है, प्रधान रजनीश चौधरी और कार्यकारिणी ने फैसला लिया है कि 25 अप्रैल तक यूपी का धान मंडी में नहीं आने दिया जाएगा। दूसरे प्रधान बेअंत सिंह और उनके समर्थक कह रहे हैं कि यूपी का गेहूं खरीदा जाएगा। प्रशासन भी इस मामले में अलर्ट हो गया है। मंडी प्रशासन ने भी साफतौर पर कहा है कि वे केवल यूपी के किसानों का ही गेहूं अंदर आने देंगे, ट्रेडर्स का नहीं। इसके लिए चेकिंग आदि की व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
बता दें कि यूपी के धान और गेहूं को लेकर साल करनाल की मंडी में विवाद होता है। नियमों के अनुसार, किसान कहीं पर भी अपनी फसल को बेच सकता हैं, लेकिन पिछले कई साल से करनाल के व्यापारी यूपी के व्यापारियों से संपर्क साधते हैं। वहां से ट्रकों में भरवाकर गेहूं और धान करनाल की मंडी में मंगवाते हैं। बाद में उस फसल को किसान के नाम चढ़ा दिया जाता है। यूपी की फसल करनाल में आने से यहां जाम की स्थिति हो जाती है। साथ ही लिफ्टिंग भी समय पर नहीं हो पाती। इससे हरियाणा के किसानों को परेशानी होती है। गौरतलब है कि करनाल की मंडी के कई आढ़तियों के पास किसानों की संख्या कम है। ऐसे में वे यूपी के किसानों और ट्रेडर्स से संबंध बनाए हुए हैं। ये लोग हर साल उनका ही धान और गेहूं खरीदते हैं। यूपी में व्यापारी किसानों के खेतों से ही सस्ते दामों पर अनाज खरीदते हैं और महंगे दामों पर करनाल की मंडी में भेज देते हैं। हालांकि, हर साल यूपी के अनाज को मंडी में लाने पर बैन भी लगाया जाता है, लेकिन इसका कोई असर नहीं रहता। इसी तरह कुछ ग्रुप यूपी के गेहूं को लाने का समर्थन कर रहे हैं, तो एक निर्धारित समय तक विरोध कर रहे हैं।
मंडी में गेहूं खरीद शुरू, दोनों गुटों ने बांटी मिठाई
करनाल। नई अनाज मंडी में शनिवार को गेहूं खरीद शुरू हो गई। इस पर मार्केट कमेटी अधिकारियों ने ढेरियां चेक की। मंडी के दोनों गुटों ने मिठाई बांटकर खरीद शुरू होने पर खुशी जताई। इस दौरान दोनों स्थानों पर ही मार्केट कमेटी के अधिकारी मौजूद रहे। एक तरफ पंचायत नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रजनीश चौधरी की अध्यक्षता में की गई। साथ में मार्केट कमेटी सचिव जिले सिंह, डीएफएससी से राजीव लांगयान और हैफेड से उधम सिंह, राजन मौजूद रहे। रजनीश चौधरी ने कहा कि गेहूं खरीद के सीजन के दौरान सभी कार्य मिलजुल कर करें। गेहूं की श्रेष्ठ क्वालिटी को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करें। कहा कि अन्नदाता किसान पूरी मेहनत करके गेहूं का उत्पादन करता है। ऐसे में हमें ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें उनकी मेहनत का उचित फल मिले। इस अवसर पर जिले सिंह, गजे सिंह, महिंद्र गर्ग, विनय गोयल, बग्गा सिंह, नरेंद्र गोयल, निर्मल प्रकाश, राजेश अरोड़ा, राजिंद्र गुप्ता, शमशेर सिंह, राकेश चौधरी, दीपक, आनंद, शिव कुमार, सुरेश राणा, रोबिन, नवीन मित्तल, सोनू, राम सिंह दुआ, भूपिंद्र, सुशील शर्मा, राजीव टुटेजा, मनीष गोयल राजेश कुंडू और राजकुमार सिंगला मौजूद रहे।
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किसानों और आढ़तियों को नहीं होने देंगे परेशानी : बेअंत सिंह
करनाल। नई अनाजमंडी में न्यू पंचायत नई अनाजमंडी की ओर से गेहूं खरीद की विधिवत शुरुआत की गई। इस दौरान प्रधान बेअंत सिंह बब्बू ने कहा कि गेहूं खरीद सीजन के दौरान किसानों और आढ़तियों को कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। किसानों को उनकी फसल के निर्धारित दाम दिए जाएंगे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि फसल को समय पर मंडी में ले आएं। खरीद कार्य में कोई कमी नहीं रहेगी। इस अवसर पर संरक्षक रामपाल ढाकला, सुरजीत संधु, महिंद्र सिंह उपप्रधान, लेखराज महासचिव, रितेश संयुक्त सचिव मौजूद रहे।
महालक्ष्मी बिलिंग कम पेमेंट एजेंट के प्रधान ने दिया इस्तीफा, कार्यकारिणी की भंग
करनाल। नई अनाजमंडी में नई एसोसिएशन के गठन के बाद बने गतिरोध से आहत होकर आज महालक्ष्मी बिलिंग कम पेमेंट एजेंट के प्रधान सतबीर मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सभी सदस्यों की सहमति से अपनी पूरी कार्यकारिणी भी भंग कर दी। इस अवसर पर एक मीटिंग रखी गई। इसमें सतबीर मित्तल ने इस्तीफा देते हुए कहा कि अब मेरे नेतृत्व में नई अनाजमंडी में कार्य नहीं होगा, लेकिन वह आढ़तियों और किसानों के हितों के लिए लगातार कार्य करते रहेंगे। पूर्व प्रधान सतबीर मित्तल ने कहा कि वह अनाजमंडी के किसानों और आढ़तियों की समस्याओं के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। यदि किसानों और आढ़तियों के सामने कोई समस्या आती है तो वह उसका समाधान कराने का प्रयास करेंगे। मीटिंग में सतपाल सिंगला, हरदयाल सिंह, ईश्वर चंद, सुशील मित्तल, सतीश बंसल, विकास गर्ग, प्रवीण कुमार, जसवंत, सुनील कुमार, हंसराज, सतीश, नरेश कुमार, अरुण कुमार, पूर्ण सिंह, रोहित गोयल, विपुल दीवान, अभिषेक सचदेवा, कश्मीरी लाल उपस्थित रहे।
मंडी में यूपी के किसानों का गेहूं लिया जाएगा, किसी भी ट्रेडर्स का गेहूं नहीं आने दिया जाएगा। मंडी प्रशासन ने इसको लेकर स्टाफ समेत आढ़तियों को भी सख्त हिदायत दी है। दिन और रात में भी इसके लिए चेकिंग की जाएगी और मंडी में किसी भी प्रकार का गलत कार्य नहीं करने दिया जाएगा। नियमों के अनुसार, किसान कहीं पर भी अपनी फसल बेच सकता है, लेकिन ट्रेडर्स नहीं।
-जिले सिंह, मार्केट कमेटी सचिव, करनाल।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। नई अनाज मंडी करनाल में चल रहे विवाद की असली जड़ यूपी का गेहूं है। आढ़तियों का एक ग्रुप चाहता है कि यूपी से गेहूं ट्रेडर्स लेकर न आएं, जबकि दूसरा राइस मिलर्स समर्थित ग्रुप यूपी के गेहूं को खरीदने के दावे कर रहा है। इसी कारण दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। इसके बाद नौबत नया प्रधान तक चुनने की आ गई है। फिलहाल यूपी के गेहूं को लेकर तनातनी जारी है, प्रधान रजनीश चौधरी और कार्यकारिणी ने फैसला लिया है कि 25 अप्रैल तक यूपी का धान मंडी में नहीं आने दिया जाएगा। दूसरे प्रधान बेअंत सिंह और उनके समर्थक कह रहे हैं कि यूपी का गेहूं खरीदा जाएगा। प्रशासन भी इस मामले में अलर्ट हो गया है। मंडी प्रशासन ने भी साफतौर पर कहा है कि वे केवल यूपी के किसानों का ही गेहूं अंदर आने देंगे, ट्रेडर्स का नहीं। इसके लिए चेकिंग आदि की व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
बता दें कि यूपी के धान और गेहूं को लेकर साल करनाल की मंडी में विवाद होता है। नियमों के अनुसार, किसान कहीं पर भी अपनी फसल को बेच सकता हैं, लेकिन पिछले कई साल से करनाल के व्यापारी यूपी के व्यापारियों से संपर्क साधते हैं। वहां से ट्रकों में भरवाकर गेहूं और धान करनाल की मंडी में मंगवाते हैं। बाद में उस फसल को किसान के नाम चढ़ा दिया जाता है। यूपी की फसल करनाल में आने से यहां जाम की स्थिति हो जाती है। साथ ही लिफ्टिंग भी समय पर नहीं हो पाती। इससे हरियाणा के किसानों को परेशानी होती है। गौरतलब है कि करनाल की मंडी के कई आढ़तियों के पास किसानों की संख्या कम है। ऐसे में वे यूपी के किसानों और ट्रेडर्स से संबंध बनाए हुए हैं। ये लोग हर साल उनका ही धान और गेहूं खरीदते हैं। यूपी में व्यापारी किसानों के खेतों से ही सस्ते दामों पर अनाज खरीदते हैं और महंगे दामों पर करनाल की मंडी में भेज देते हैं। हालांकि, हर साल यूपी के अनाज को मंडी में लाने पर बैन भी लगाया जाता है, लेकिन इसका कोई असर नहीं रहता। इसी तरह कुछ ग्रुप यूपी के गेहूं को लाने का समर्थन कर रहे हैं, तो एक निर्धारित समय तक विरोध कर रहे हैं।
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मंडी में गेहूं खरीद शुरू, दोनों गुटों ने बांटी मिठाई
करनाल। नई अनाज मंडी में शनिवार को गेहूं खरीद शुरू हो गई। इस पर मार्केट कमेटी अधिकारियों ने ढेरियां चेक की। मंडी के दोनों गुटों ने मिठाई बांटकर खरीद शुरू होने पर खुशी जताई। इस दौरान दोनों स्थानों पर ही मार्केट कमेटी के अधिकारी मौजूद रहे। एक तरफ पंचायत नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रजनीश चौधरी की अध्यक्षता में की गई। साथ में मार्केट कमेटी सचिव जिले सिंह, डीएफएससी से राजीव लांगयान और हैफेड से उधम सिंह, राजन मौजूद रहे। रजनीश चौधरी ने कहा कि गेहूं खरीद के सीजन के दौरान सभी कार्य मिलजुल कर करें। गेहूं की श्रेष्ठ क्वालिटी को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करें। कहा कि अन्नदाता किसान पूरी मेहनत करके गेहूं का उत्पादन करता है। ऐसे में हमें ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें उनकी मेहनत का उचित फल मिले। इस अवसर पर जिले सिंह, गजे सिंह, महिंद्र गर्ग, विनय गोयल, बग्गा सिंह, नरेंद्र गोयल, निर्मल प्रकाश, राजेश अरोड़ा, राजिंद्र गुप्ता, शमशेर सिंह, राकेश चौधरी, दीपक, आनंद, शिव कुमार, सुरेश राणा, रोबिन, नवीन मित्तल, सोनू, राम सिंह दुआ, भूपिंद्र, सुशील शर्मा, राजीव टुटेजा, मनीष गोयल राजेश कुंडू और राजकुमार सिंगला मौजूद रहे।
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किसानों और आढ़तियों को नहीं होने देंगे परेशानी : बेअंत सिंह
करनाल। नई अनाजमंडी में न्यू पंचायत नई अनाजमंडी की ओर से गेहूं खरीद की विधिवत शुरुआत की गई। इस दौरान प्रधान बेअंत सिंह बब्बू ने कहा कि गेहूं खरीद सीजन के दौरान किसानों और आढ़तियों को कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। किसानों को उनकी फसल के निर्धारित दाम दिए जाएंगे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि फसल को समय पर मंडी में ले आएं। खरीद कार्य में कोई कमी नहीं रहेगी। इस अवसर पर संरक्षक रामपाल ढाकला, सुरजीत संधु, महिंद्र सिंह उपप्रधान, लेखराज महासचिव, रितेश संयुक्त सचिव मौजूद रहे।
महालक्ष्मी बिलिंग कम पेमेंट एजेंट के प्रधान ने दिया इस्तीफा, कार्यकारिणी की भंग
करनाल। नई अनाजमंडी में नई एसोसिएशन के गठन के बाद बने गतिरोध से आहत होकर आज महालक्ष्मी बिलिंग कम पेमेंट एजेंट के प्रधान सतबीर मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सभी सदस्यों की सहमति से अपनी पूरी कार्यकारिणी भी भंग कर दी। इस अवसर पर एक मीटिंग रखी गई। इसमें सतबीर मित्तल ने इस्तीफा देते हुए कहा कि अब मेरे नेतृत्व में नई अनाजमंडी में कार्य नहीं होगा, लेकिन वह आढ़तियों और किसानों के हितों के लिए लगातार कार्य करते रहेंगे। पूर्व प्रधान सतबीर मित्तल ने कहा कि वह अनाजमंडी के किसानों और आढ़तियों की समस्याओं के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। यदि किसानों और आढ़तियों के सामने कोई समस्या आती है तो वह उसका समाधान कराने का प्रयास करेंगे। मीटिंग में सतपाल सिंगला, हरदयाल सिंह, ईश्वर चंद, सुशील मित्तल, सतीश बंसल, विकास गर्ग, प्रवीण कुमार, जसवंत, सुनील कुमार, हंसराज, सतीश, नरेश कुमार, अरुण कुमार, पूर्ण सिंह, रोहित गोयल, विपुल दीवान, अभिषेक सचदेवा, कश्मीरी लाल उपस्थित रहे।
मंडी में यूपी के किसानों का गेहूं लिया जाएगा, किसी भी ट्रेडर्स का गेहूं नहीं आने दिया जाएगा। मंडी प्रशासन ने इसको लेकर स्टाफ समेत आढ़तियों को भी सख्त हिदायत दी है। दिन और रात में भी इसके लिए चेकिंग की जाएगी और मंडी में किसी भी प्रकार का गलत कार्य नहीं करने दिया जाएगा। नियमों के अनुसार, किसान कहीं पर भी अपनी फसल बेच सकता है, लेकिन ट्रेडर्स नहीं।
-जिले सिंह, मार्केट कमेटी सचिव, करनाल।