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छत की आस मन में दबाए 10 की हो चुकी मौत, 42 के आवेदन रद्द
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हर व्यक्ति के लिए मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान है। इन्हीं जरूरतों को पूरा करने की हर किसी को आस होती है। इसी आस में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत पाने का आवेदन करने वाले शहर के 10 लोग तो दुनिया से चले भी गए। वहीं 42 के आवेदनों को कमियां पाए जाने पर रद्द कर दिया गया। यह नगर निगम के सर्वे में सामने आया। निगम द्वारा 183 आवेदकों की जियो टैगिंग सहित अन्य प्रक्रिया को पूरा करवाने के बाद निर्माण शुरू कर दिया है।
नगर निगम करनाल में अभी शहर के 8482 लोगों ने पीएमएवाई योजना के तहत आवेदन किया था। आवेदकों का सर्वे करके आगे की प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है। इस दौरान 100 आवेदकों के साथ संपर्क नहीं हो पाया। उनके द्वारा दिया गया मोबाइल नंबर लग नहीं रहा। 77 आवेदन ऐसे मिले जो डबल थे। 15 ऐसे हैं जिनका आधार लिंक नहीं हो पा रहा। 10 आवेदकों की मौत हो चुकी है और छह आवेदक ऐसे हैं जो दूसरे शहरों के रहने वाले हैं।
तीन श्रेणियों में बांटे हैं आवेदन
एक जून 2017 से अगस्त 2017 तक आवेदन मांगे थे। इस दौरान 8482 आवेदन आए। डीपीआर डिटेल बनाते समय तीन श्रेणियां तय हुईं। ऑनलाइन प्रक्रिया करते समय आवेदकों को अलग-अलग श्रेणियाें में बांटा गया। आवेदकों की लोकेशन को ट्रेस कर स्थिति का फोटो कर जियो टैगिंग की जा रही है। इसके बाद आवेदक से अन्य कागजात व परिवार का आधार कार्ड लिया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल से समय-समय अपडेट किया जा रहा है।
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1. बिल्डिंग लैंड : 1896 आवेदक
ऐसे आवेदक जिनके पास कच्चा यानी लकड़ियों का मकान है। ऐसे लोगों को मकान बनाने के लिए पैसा मिलता है। जो वापस नहीं करना होगा।
2. एएचपी : 6509 आवेदक
ऐसे आवेदक जिनके पास न तो जगह है और न ही अपना मकान। ऐसे आवेदकों के लिए सरकार ने फ्लैट बनवाए हैं। जिन्हें बिल्डरों से नो प्रोफिट नो लास पर दिया जाता है।
3. सीएलएसएस : 77 आवेदक
ऐसे आवेदन जिनके पास जगह है और पीएमएवाई के दायरे से ऊपर हैं। उन्हें छह लाख से 20 लाख रुपये तक बैंक से लोन दिलवाया जाता है। कम ब्याज देना होता है।
183 को स्वीकृत पत्र किए जारी
183 आवेदकों को स्वीकृत पत्र देने के साथ योजना का लाभ दिया जा रहा है। इन्हें अब तक 37.60 लाख रुपये किस्तों में दिया जा चुके हैं। सात आवेदक ऐसे हैं जिनके मकानों की स्थिति लेंटर तक पहुंच चुकी है। इनकी सबसे पहले सर्वे, फिर नींव, इसके बाद दीवारें और लेंटर तक की फोटो को अपलोड किया। हर स्टेज को अपडेट करके ही लाभ दिया जा रहा है।
-पीएमएवाई योजना के लिए स्पेशल टीम का गठन किया है। जो आवेदक अप्रूव्ड क्षेत्र से है, उनको लाभ दिया जा रहा है। शहर वासियों से अपील है कि जिन आवेदकों की जियो टैगिंग नहीं हुई वे टीम को सूचित कर प्रक्रिया को पूरा करवाएं। -प्रवीन चुघ, सीपीओ नगर निगम करनाल।
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नगर निगम करनाल में अभी शहर के 8482 लोगों ने पीएमएवाई योजना के तहत आवेदन किया था। आवेदकों का सर्वे करके आगे की प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है। इस दौरान 100 आवेदकों के साथ संपर्क नहीं हो पाया। उनके द्वारा दिया गया मोबाइल नंबर लग नहीं रहा। 77 आवेदन ऐसे मिले जो डबल थे। 15 ऐसे हैं जिनका आधार लिंक नहीं हो पा रहा। 10 आवेदकों की मौत हो चुकी है और छह आवेदक ऐसे हैं जो दूसरे शहरों के रहने वाले हैं।
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तीन श्रेणियों में बांटे हैं आवेदन
एक जून 2017 से अगस्त 2017 तक आवेदन मांगे थे। इस दौरान 8482 आवेदन आए। डीपीआर डिटेल बनाते समय तीन श्रेणियां तय हुईं। ऑनलाइन प्रक्रिया करते समय आवेदकों को अलग-अलग श्रेणियाें में बांटा गया। आवेदकों की लोकेशन को ट्रेस कर स्थिति का फोटो कर जियो टैगिंग की जा रही है। इसके बाद आवेदक से अन्य कागजात व परिवार का आधार कार्ड लिया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल से समय-समय अपडेट किया जा रहा है।
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1. बिल्डिंग लैंड : 1896 आवेदक
ऐसे आवेदक जिनके पास कच्चा यानी लकड़ियों का मकान है। ऐसे लोगों को मकान बनाने के लिए पैसा मिलता है। जो वापस नहीं करना होगा।
2. एएचपी : 6509 आवेदक
ऐसे आवेदक जिनके पास न तो जगह है और न ही अपना मकान। ऐसे आवेदकों के लिए सरकार ने फ्लैट बनवाए हैं। जिन्हें बिल्डरों से नो प्रोफिट नो लास पर दिया जाता है।
3. सीएलएसएस : 77 आवेदक
ऐसे आवेदन जिनके पास जगह है और पीएमएवाई के दायरे से ऊपर हैं। उन्हें छह लाख से 20 लाख रुपये तक बैंक से लोन दिलवाया जाता है। कम ब्याज देना होता है।
183 को स्वीकृत पत्र किए जारी
183 आवेदकों को स्वीकृत पत्र देने के साथ योजना का लाभ दिया जा रहा है। इन्हें अब तक 37.60 लाख रुपये किस्तों में दिया जा चुके हैं। सात आवेदक ऐसे हैं जिनके मकानों की स्थिति लेंटर तक पहुंच चुकी है। इनकी सबसे पहले सर्वे, फिर नींव, इसके बाद दीवारें और लेंटर तक की फोटो को अपलोड किया। हर स्टेज को अपडेट करके ही लाभ दिया जा रहा है।
-पीएमएवाई योजना के लिए स्पेशल टीम का गठन किया है। जो आवेदक अप्रूव्ड क्षेत्र से है, उनको लाभ दिया जा रहा है। शहर वासियों से अपील है कि जिन आवेदकों की जियो टैगिंग नहीं हुई वे टीम को सूचित कर प्रक्रिया को पूरा करवाएं। -प्रवीन चुघ, सीपीओ नगर निगम करनाल।