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डॉक्टर की लापरवाही से युवक को गवानी पड़ी टांग
अमर उजाला ब्यूरो/कैथ्ाल
Updated Sat, 25 Jul 2015 11:53 PM IST
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पूंडरी पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर एक डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही से ईलाज करने के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस को दी अपनी शिकायत में रामचंद्र पुत्र शिवराम निवासी हाबड़ी ने कहा है कि दो जून को उसके लड़के रमेश जो कि बरसाना ने हाबड़ी आ रहा था, उसे एक थ्री व्हीलर चालक ने टक्कर मार दी थी। जिससे उसके पैर पर गहरी चोट आई। वे 3 जून को लड़के रमेश को लेकर देवी मंदिर रोड़ फतेहपुर स्थित खान अस्पताल में गया। जहां डाक्टर नसीम अख्तर ने पैर के एक्सरे लिए और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस जख्म को जल्दी ठीक कर देंगे। डॉक्टर ने रमेश के पैर पर टांके लगाकर प्लास्टर लगा दिया और एक हफ्ते के बाद आने को कहा।
एक हफ्ते बाद वो फिर से अपने लड़के को लेकर चिकित्सक के पास गए। डॉक्टर ने फिर उसे पट्टी लगाकर घर भेज दिया। इसी तरह लगभग 22 से 23 दिन बीत जाने के बाद भी पैर में कोई आराम नहीं हुआ और पैर काला पड़ने लगा। वे फिर से डाक्टर के पास गए। डॉक्टर ने फिर भी उन्हें धोखे में रखा और कहा कि जल्दी ही वो पैर को ठीक कर देगा। लेकिन इसी बीच रमेश की तबीयत बिगड़ने लगी।
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रामचंद्र अपने लड़के को लेकर करनाल में डॉक्टर प्रमोद गर्ग के पास गए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि पैर में इंफेक्शन हो गया है। वहां कई चिकित्सकों की टीम ने रमेश का 2 जुलाई को आपरेशन किया, लेकिन वे रमेश के पैर को नहीं बचा सके और उन्हें रमेश की टांग काटनी पड़ी। रामचंद्र ने डॉक्टर की लापरवाही के खिलाफ कोर्ट की शरण ली और कोर्ट के आदेश पर पूंडरी पुलिस ने फतेहपुर खान अस्पताल के डॉक्टर नसीम अख्तर के खिलाफ धारा 336, 338, 406, 415 व 420 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया है।
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रमेश रामचंद्र का इकलौता लड़का है। वह खेती बाड़ी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लेकिन एक डॉक्टर की लापरवाही ने उसे अपाहिज की जिंदगी जीने के लिए मजबूर कर दिया। रमेश के पास केवल ढेड़ एकड़ जमीन है। रमेश के दो लड़के और एक लड़की है। अब सारे परिवार की जिम्मेवारी घर के बुजुर्ग रामचंद्र पर आ गई है। जिस दिन से बेटा अपाहिज हुआ है, रामचंद्र की हालात भी ठीक नहीं रहती। बेटे की चिंता उसे खाई जा रही है। रामचंद्र का कहना है कि डाक्टर भगवान होता है, लेकिन इस डाक्टर ने केवल अपनी फीस के लिए उसके लड़के की जिंदगी से खिलवाड़ किया है और आज इस डाक्टर की लापरवाही के चलते उसका बेटा अपाहिज की जिंदगी जीने को मजबूर है।