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Kaithal News: पैदावार 37 क्विंटल प्रति एकड़, पंजीकरण सिर्फ 27 का, किसान परेशान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:22 AM IST
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Yield is 37 quintals per acre, but registration is for only 27; farmers are distressed.
समस्याओं के बारे में जानकारी देते किसान नेता हरदीप बदसूई व अन्य। विज्ञ​प्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला-चीका। इस बार धान की बंपर पैदावार किसानों के लिए राहत के बजाय परेशानी बन गई है। गुहला क्षेत्र में प्रति एकड़ धान पंजीकरण की सीमा 27 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित होने के कारण किसान पूरी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पा रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार औसतन 35 से 38 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार हो रही है, जबकि सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण सीमा कम होने से उन्हें अतिरिक्त धान निजी व्यापारियों को कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने पंजीकरण सीमा बढ़ाकर 37 क्विंटल प्रति एकड़ करने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन के युवा जिला अध्यक्ष हरदीप बदसूई ने बताया कि किसानों ने इस समस्या को लेकर मार्केट कमेटी प्रशासन को लिखित मांग दी थी। इसके अलावा अधिकारी और विधायक के समक्ष भी मामला उठाया गया, लेकिन धान खरीद सीजन अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। अभी तक पंजीकरण सीमा 27 से बढ़ाकर 37 क्विंटल प्रति एकड़ नहीं की गई है।
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अतिरिक्त धान कम दाम पर बेचने की मजबूरी
हरदीप बदसूई ने कहा कि जब खेतों में प्रति एकड़ 35 से 38 क्विंटल धान पैदा हो रही है तो पंजीकरण केवल 27 क्विंटल का क्यों किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी पूरी उपज सरकारी खरीद में बेचने का लाभ नहीं मिल पा रहा। अतिरिक्त धान निजी व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने से प्रति एकड़ हजारों रुपये का नुकसान होने की आशंका है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने प्रदेश की अनाज मंडियों के दौरे के दौरान धान पंजीकरण सीमा 27 से बढ़ाकर 37 क्विंटल प्रति एकड़ करने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक पोर्टल पर सीमा में बदलाव नहीं हुआ है।
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मांग उच्च अधिकारियों को भेजी : सुरेश कुमार
मार्केट कमेटी चीका के सचिव सुरेश कुमार ने बताया कि धान पंजीकरण की सीमा तय करना मार्केट कमेटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। किसानों की ओर से पंजीकरण 27 से बढ़ाकर 37 क्विंटल प्रति एकड़ करने की मांग उनके कार्यालय में आई थी, जिसे नियमानुसार मार्केटिंग बोर्ड के उच्च अधिकारियों और कृषि विभाग को भेज दिया गया है।
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