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Kaithal News: स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

Thu, 05 Jun 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 05 Jun 2025 01:06 AM IST
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Women are becoming self-reliant by joining self-help groups
संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला-चीका। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई लखपति दीदी योजना के तहत खंड गुहला में 1701 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। वहीं, गुहला में 686 स्वयं सहायता समूह जिनमें 7546 महिलाएं शामिल है। इन स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें काफी लाभ हुआ है।

उदाहरण एक: कल्लर माजरा निवासी महिला उपासना ने बताया कि वर्ष 2014 में जब केंद्र सरकार की ओर से आंध्र प्रदेश से सीआरपी की टीम और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम उनके गांव पहुंची, तब उन्होंने गांव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की जानकारी दी। उपासना के अनुसार, शुरुआत में महिलाएं असमंजस में थीं कि समूह से जुड़ना चाहिए या नहीं। कुछ का मानना था कि इससे कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि नुकसान हो सकता है।
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उपासना ने जब इस विषय पर परिवार से बात की, तो उनके पति, सास और अन्य परिजनों ने उन्हें समर्थन दिया। परिवार के सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने न केवल खुद बाहर निकलकर काम शुरू किया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया।
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उपासना हरियाणा सरकार की योजनाओं के तहत सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) और सिलाई के कार्य से जुड़ी हुई हैं। उनकी एक दुकान चीका की मेन मार्केट में है। सीएससी के माध्यम से उन्हें प्रति माह लगभग 8 से 10 हजार रुपये की आमदनी होती है और अब वह आत्मनिर्भर हैं।

उसी समूह की अन्य महिलाएं भी आज सफल हैं—जैसे कि हरिगढ़ किंगन की प्रकाशो देवी ड्रेस सिलाई करती हैं, पीड़ल की बिमला फाइल कवर और सिलाई का कार्य करती हैं, और अंजू बैग निर्माण का कार्य कर रही हैं। सभी महिलाएं आज आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उनके परिवार खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

उदाहरण दो: चाणचक निवासी परमजीत कौर बताती हैं कि “जो संतोष अपने पैरों पर खड़े होकर पैसे कमाने में है, वह किसी और चीज़ में नहीं है।” पहले उन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए परिवार के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे, लेकिन अब वे आत्मनिर्भर हैं।

परमजीत कौर अटल श्रमिक किसान कैंटीन, अनाज मंडी से जुड़ी हुई हैं। यहां 10 रुपये के टोकन पर लोगों को दो सब्जियां, चार रोटियां और चावल का भरपेट भोजन दिया जाता है। कैंटीन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलती है और दोपहर के समय लंबी कतारें लगती हैं। इस काम से उन्हें प्रति माह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी होती है।

परमजीत कौर के साथ किरणपाल, मंजीत कौर, कुलवंत, चरणजीत कौर, रानी, संध्या, सिंद्र कौर और मनप्रीत कौर कार्यरत हैं। ये सभी महिलाएं अपने कार्य से संतुष्ट हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

सरकार का उद्देश्य है जरूरतमंद को काम मिले ः एसडीएम

एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने बताया कि गुहला में महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को समूहों में जोड़ा जा रहा है। हरियाणा सरकार का उद्देश्य यही है कि जरूरतमंद को काम मिले और उन्हें लाभ प्राप्त हो। ग्रुपों को लोन उपलब्ध करवाया जाता है, जिसमें शुरुआत में एक लाख 50 हजार रुपये, इसके बाद दो लाख रुपये तथा छह व 10 लाख रुपये तक प्रदान किए जाते हैं। विभाग से रिवोलिंग फंड के तौर पर प्रत्येक समूह को 30 हजार रुपये और सामुदायिक निवेश फंड के तौर पर 50 हजार रुपये आर्थिक मदद दी जाती है।


गुहला में 686 स्वयं सहायता समूह बने हुए हैं, जिनमें 7546 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही 55 महिला ग्राम संगठन व तीन कलस्टर लेवल संगठन बने हैं और आगे भी समूह बनाने का कार्य चल रहा है। -राजेश चौहान, खंड समन्वयक हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग
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