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लॉकडाउन के बाद कपड़ा मार्केट में मंदी
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कैथल। अनलॉक होने के बाद कपड़ा बाजार में मंदी आई है। पीछे से माल न पहुंचने के कारण ग्राहकों को पुरानी वैरायटी से ही काम चलाना पड़ रहा है। शादियां कम होने के कारण कपड़ा बाजार में कपड़े की सेल न के बराबर है। इससे व्यापारियों की दुकान का किराया भी पूरा नहीं हो रहा। कपड़ा मार्केट के दुकानदारों ने बताया कि वे नियमों के अनुसार दुकानें खोल रहे हैं। ग्राहकों को मास्क लगाने व सामाजिक दूरी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि ग्राहक धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। दुकान पर कपड़ा लेने आते हैं तो सबसे पहले खुद हाथ धोने के लिए सैनिटाइजर मांगते हैं। ग्राहक को यदि पानी पीना है तो वह स्वयं ही कैंपर से पानी लेकर पीता है। दो गज दूरी बनाकर रखने में लोग विश्वास जताने लगे है।
कपड़ा व्यापारी अमृत सिंह का कहना है कि प्रशासन द्वारा दुकानों के लिए जो समय फिक्स किया है, वह सराहनीय है। ग्राहकों का दुकान के बाहर ही रोक लिया जाता है। जहां पर उनको सैनिटाइज करने के बाद ही एंट्री की जाती है। केवल दो ग्राहकों को ही कपड़ा दिखाने के लिए अंदर भेजा जाता है।
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दुकानदार गौरव सिंगला ने बताया कि लॉकडाउन से पहले जो शादियां होती थी उनमें कपड़े की अलग अलग वैरायटी बिकती थी, लेकिन अब इतनी न तो सेल होती है और न ही पीछे से माल आ रहा। कपड़े के मिलों में लेबर न होने से माल समय पर नहीं पहुंच रहा।
कपड़ा विक्रेता दर्शन सिंह ने कहा कि व्यापार में मंदा है। हर आदमी अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है। शादियों को सीजन है लेकिन बाजार में इतने ग्राहक नहीं। जब तक इस महामारी की वैक्सीन नहीं बनती तब तक इसका प्रभाव ऐसे ही रहेगा।
कपड़ा विक्रेता मदन खुराना ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जो समय दुकान खोलने का था, दोबारा वही समय तय होना चाहिए। उससे परिवार को मिलने का भी समय मिल जाता था। इससे दूर से आने वाले ग्राहकों को जाने में समस्या होती है।
संजय कुमार ने कहा कि पुरानी वैरायटी लेने से ग्राहक किनारा कर रहे हैं। दुकान पर आने वाले ग्राहकों के हाथों को पहले सैनिटाइज किया जाता है उसके बाद यदि मास्क न हो तो ग्राहक को निशुल्क मास्क दिया जाता है।
कपड़ा विक्रेता वनोद कुमार ने कहा कि पीछे से पेमेंट नहीं आ रही और आगे एडवांस देकर ही कपड़ा लेना पड़ रहा है। महामारी के कारण व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। मार्केट में ग्राहक भी कम संख्या में ही आ रहे है। माल भी नया नहीं आ रहा।
अक्सरा गुप्ता ने बताया कि वह बुटीक चलाती हैं, जो कपड़े से ही संबंधित है। महामारी से कपड़ा मार्केट पर अधिक प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन में उन्होंने कपड़े के मास्क बनाकर लोगों को वितरित किए है। कोरोना महामारी बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक प्रभावशाली है।
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दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि ग्राहक धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। दुकान पर कपड़ा लेने आते हैं तो सबसे पहले खुद हाथ धोने के लिए सैनिटाइजर मांगते हैं। ग्राहक को यदि पानी पीना है तो वह स्वयं ही कैंपर से पानी लेकर पीता है। दो गज दूरी बनाकर रखने में लोग विश्वास जताने लगे है।
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कपड़ा व्यापारी अमृत सिंह का कहना है कि प्रशासन द्वारा दुकानों के लिए जो समय फिक्स किया है, वह सराहनीय है। ग्राहकों का दुकान के बाहर ही रोक लिया जाता है। जहां पर उनको सैनिटाइज करने के बाद ही एंट्री की जाती है। केवल दो ग्राहकों को ही कपड़ा दिखाने के लिए अंदर भेजा जाता है।
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दुकानदार गौरव सिंगला ने बताया कि लॉकडाउन से पहले जो शादियां होती थी उनमें कपड़े की अलग अलग वैरायटी बिकती थी, लेकिन अब इतनी न तो सेल होती है और न ही पीछे से माल आ रहा। कपड़े के मिलों में लेबर न होने से माल समय पर नहीं पहुंच रहा।
कपड़ा विक्रेता दर्शन सिंह ने कहा कि व्यापार में मंदा है। हर आदमी अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है। शादियों को सीजन है लेकिन बाजार में इतने ग्राहक नहीं। जब तक इस महामारी की वैक्सीन नहीं बनती तब तक इसका प्रभाव ऐसे ही रहेगा।
कपड़ा विक्रेता मदन खुराना ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जो समय दुकान खोलने का था, दोबारा वही समय तय होना चाहिए। उससे परिवार को मिलने का भी समय मिल जाता था। इससे दूर से आने वाले ग्राहकों को जाने में समस्या होती है।
संजय कुमार ने कहा कि पुरानी वैरायटी लेने से ग्राहक किनारा कर रहे हैं। दुकान पर आने वाले ग्राहकों के हाथों को पहले सैनिटाइज किया जाता है उसके बाद यदि मास्क न हो तो ग्राहक को निशुल्क मास्क दिया जाता है।
कपड़ा विक्रेता वनोद कुमार ने कहा कि पीछे से पेमेंट नहीं आ रही और आगे एडवांस देकर ही कपड़ा लेना पड़ रहा है। महामारी के कारण व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। मार्केट में ग्राहक भी कम संख्या में ही आ रहे है। माल भी नया नहीं आ रहा।
अक्सरा गुप्ता ने बताया कि वह बुटीक चलाती हैं, जो कपड़े से ही संबंधित है। महामारी से कपड़ा मार्केट पर अधिक प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन में उन्होंने कपड़े के मास्क बनाकर लोगों को वितरित किए है। कोरोना महामारी बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक प्रभावशाली है।