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Kaithal News: पठन कौशल, शब्दावली सुधारने के बताए तरीके
Sun, 18 Feb 2024 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 18 Feb 2024 01:47 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की तरफ से नॉवेल पठन तकनीकों के अध्ययन पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसका केंद्र आरके नारायण के द गाइड रहा। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य न केवल साहित्यिक विश्लेषण में सुधार करने का था, बल्कि इसमें प्रतिभागियों के पठन कौशल और शब्दावली को भी सुधारने का लक्ष्य रखा और सत्रों के दौरान उन्होंने नए शब्दों का संचय भी किया।
द गाइड के अंशों के माध्यम से विद्यार्थियों ने आरके नारायण की कथा-रचना शैली पर चर्चा की। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संवेदनशील पठन तकनीकों को पहचानने और टिप्पणी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनकी कठिन प्रोज को सुलझाने की क्षमता में सुधार हुआ। भागीदार छात्र सक्रिय पठन अभ्यासों में शामिल हुए, पात्र वार्ता और अभिव्यक्तियों से शब्दावली निकालते रहे। विश्लेषण सत्र में सिनेमा से लाए गए दृश्यों को शामिल किया, जो पात्र के यात्रा को समझने में मदद करने में सहायक थे। छात्रों को सक्रिय पठन अभ्यासों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जो उनकी शब्दावली को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए था।
कार्यशाला की संयोजक डॉ. सीमा गुप्ता ने बताया कि सिनेमा से लाए गए दृश्यों और थीमात्मक तत्वों पर गहरी चर्चाओं के साथ, प्रतिभागियों को विशिष्ट थीमों के भीतर नए शब्दों को संदर्भित करने के लिए अवसर मिला। थीमात्मक शब्दावली के अन्वेषण से पर्याप्त पठन अनुभव और कथा की जटिलताओं की एक और गहरी समझ हुई। प्राचार्य डॉ. संजय गोयल, विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजवीर पाराशर और संकाय सदस्यों ने कार्यशाला संपूर्ण होने पर बधाई दी।
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की तरफ से नॉवेल पठन तकनीकों के अध्ययन पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसका केंद्र आरके नारायण के द गाइड रहा। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य न केवल साहित्यिक विश्लेषण में सुधार करने का था, बल्कि इसमें प्रतिभागियों के पठन कौशल और शब्दावली को भी सुधारने का लक्ष्य रखा और सत्रों के दौरान उन्होंने नए शब्दों का संचय भी किया।
द गाइड के अंशों के माध्यम से विद्यार्थियों ने आरके नारायण की कथा-रचना शैली पर चर्चा की। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संवेदनशील पठन तकनीकों को पहचानने और टिप्पणी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनकी कठिन प्रोज को सुलझाने की क्षमता में सुधार हुआ। भागीदार छात्र सक्रिय पठन अभ्यासों में शामिल हुए, पात्र वार्ता और अभिव्यक्तियों से शब्दावली निकालते रहे। विश्लेषण सत्र में सिनेमा से लाए गए दृश्यों को शामिल किया, जो पात्र के यात्रा को समझने में मदद करने में सहायक थे। छात्रों को सक्रिय पठन अभ्यासों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जो उनकी शब्दावली को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए था।
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कार्यशाला की संयोजक डॉ. सीमा गुप्ता ने बताया कि सिनेमा से लाए गए दृश्यों और थीमात्मक तत्वों पर गहरी चर्चाओं के साथ, प्रतिभागियों को विशिष्ट थीमों के भीतर नए शब्दों को संदर्भित करने के लिए अवसर मिला। थीमात्मक शब्दावली के अन्वेषण से पर्याप्त पठन अनुभव और कथा की जटिलताओं की एक और गहरी समझ हुई। प्राचार्य डॉ. संजय गोयल, विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजवीर पाराशर और संकाय सदस्यों ने कार्यशाला संपूर्ण होने पर बधाई दी।
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