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खतरे के निशान से 15 फुट नीचे घग्गर
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Mon, 13 Jul 2015 12:28 AM IST
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गुहला-चीका। पहाड़ों सहित मैदानी इलाकों में लगातार बरसात के कारण घग्गर का जलस्तर बढ़ने लगा है। हालांकि अभी खतरे जैसी कोई बात नहीं है। लेकिन यदि बारिश ऐसे ही जारी रहती है तो जलस्तर बढ़ेगा। अब 11 फुट तक जलस्तर है। जबकि खतरे का निशान करीब 26 फुट पर है।
उधर, हर चार साल बाद बाढ़ का कारण बनने वाली घग्गर को लेकर सिंचाई विभाग सहित प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। इसके आस-पास के इलाकों में किसानों की बेचैनी बढ़ गई है।
घग्गर के आसपास 33 गांव
जिले के 33 गांव ऐसे हैं, जो घग्गर के आस-पास हैं। इन गांवों में वैसे तो बरसात के चलते हर साल खतरा बना रहता है। हर चार साल बाद यहां बाढ़ से हालात खराब हो जाते हैं। जब भी घग्गर का जलस्तर 16 फुट से ऊपर चढ़ता है तो इन क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। नदी का पानी कई जगहों से किनारों को छूता हुआ खेतों व घरों तक जा पहुंचता है। आधिकारिक तौर पर 26 फुट जलस्तर को खतरनाक माना गया है।
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जलस्तर पर प्रशासन की नजर
बढ़ते जलस्तर को देखने के लिए नदी पर लोगों व किसानों का तांता लगा है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए है। नदी के आसपास रहने वाले किसानों ने अपने सामान व पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना भी शुरू कर दिया है।
गुहला के एसडीएम गुहला बीर सिंह कालीरमन ने कहा कि फिलहाल गुहला में बाढ़ का खतरा नहीं है। परंतु फिर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कालीरमन ने बताया कि बाढ़ कंट्रोल कार्यालय 24 घंटे पानी के बढ़ने की निगरानी रख रहा है।
पल-पल की खबर उच्च अधिकारियों को पहुंचाई जा रही है। यदि यहां बाढ़ जैसे हालात बनते दिखाई दिए तो प्रशासन किसानों व आम लोगों को समय रहते न केवल सूचित कर देगा। साथ ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया जाएगा।
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उधर, हर चार साल बाद बाढ़ का कारण बनने वाली घग्गर को लेकर सिंचाई विभाग सहित प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। इसके आस-पास के इलाकों में किसानों की बेचैनी बढ़ गई है।
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घग्गर के आसपास 33 गांव
जिले के 33 गांव ऐसे हैं, जो घग्गर के आस-पास हैं। इन गांवों में वैसे तो बरसात के चलते हर साल खतरा बना रहता है। हर चार साल बाद यहां बाढ़ से हालात खराब हो जाते हैं। जब भी घग्गर का जलस्तर 16 फुट से ऊपर चढ़ता है तो इन क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। नदी का पानी कई जगहों से किनारों को छूता हुआ खेतों व घरों तक जा पहुंचता है। आधिकारिक तौर पर 26 फुट जलस्तर को खतरनाक माना गया है।
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जलस्तर पर प्रशासन की नजर
बढ़ते जलस्तर को देखने के लिए नदी पर लोगों व किसानों का तांता लगा है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए है। नदी के आसपास रहने वाले किसानों ने अपने सामान व पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना भी शुरू कर दिया है।
गुहला के एसडीएम गुहला बीर सिंह कालीरमन ने कहा कि फिलहाल गुहला में बाढ़ का खतरा नहीं है। परंतु फिर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कालीरमन ने बताया कि बाढ़ कंट्रोल कार्यालय 24 घंटे पानी के बढ़ने की निगरानी रख रहा है।
पल-पल की खबर उच्च अधिकारियों को पहुंचाई जा रही है। यदि यहां बाढ़ जैसे हालात बनते दिखाई दिए तो प्रशासन किसानों व आम लोगों को समय रहते न केवल सूचित कर देगा। साथ ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया जाएगा।