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Kaithal News: अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान आज, जारी नहीं होगा परिणाम

Fri, 19 Jul 2024 05:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 19 Jul 2024 05:53 AM IST
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Voting on no-confidence motion today, result will not be released
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। प्रदेश में भाजपा व जजपा का गठबंधन टूटने के बाद जिला परिषद अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक घमासान मचा है। इस बीच डीसी प्रशांत पंवार ने भाजपा समर्थित जिला पार्षदों की मांग पर अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 19 जुलाई को मतदान के लिए सदन की बैठक बुलाई थी परंतु इससे पहले ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया। पंजाब एवं हाईकोर्ट ने मतदान के लिए अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसका परिणाम जारी करने के लिए आगामी फैसले तक रोक लगा दी है।

अब हाईकोर्ट की अनुमति के बाद ही परिणाम घोषित किया जा सकेगा। यह जानकारी जिप के अध्यक्ष दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली ने प्रेसवार्ता करके दी है। अध्यक्ष ने बताया कि इससे पहले प्रदेश में दोनों पार्टियों के गठबंधन टूटने के बाद जजपा के खिलाफ भाजपा समर्थित 15 पार्षदों ने अविश्वास का शपथ पत्र दिया था।
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उन्होंने कहा कि जब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के लिए होने वाले मतदान के लिए मना तो नहीं किया, लेकिन चुनाव का परिणाम घोषित करने के लिए उसके फैसले का इंतजार करने की दलील दी।
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जिप के अध्यक्ष दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली ने जानकारी देते हुए बताया कि अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने और नोटिस जारी किए जाने में नियमों का ठीक से पालन नहीं किया है। इस पर हाइकोर्ट ने उन्हें राहत दी है और सरकार को नोटिस जारी किया है कि सफाई दें कि नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा है कि मतदान करवा लें, लेकिन तब तक परिणाम जारी न करें, जब तक हाइकोर्ट से केस का फैसला नहीं होता।

उनकी मांग है कि प्रशासन शुक्रवार को होने वाले मतदान के कार्यक्रम को स्थगित करे, ताकि जब हाइकोर्ट से केस फाइनल हो जाए तब पूरी प्रक्रिया एक साथ करवा ली जाए। सिर्फ 20 पार्षदों ने वोट डालने हैं इसलिए मतदान को गोपनीय रखना नामुमकिन है। कोई भी सदस्य बाहर आकर बता सकता है कि किसे वोट डाला है। या फिर ग्रुप बनाकर वोटिंग करने गए तो भी पता चल जाएगा। चुनाव में ड्यूटी पर लगे कर्मचारी भी खुलासा कर सकते हैं। इसलिए प्रशासन से और डीसी से आग्रह है कि मतदान को स्थगित करें और जो लोग असंतुष्ट हैं, वे सही प्रक्रिया अपना कर बाद में प्रस्ताव ले आएं।

उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह नोटिस राजनीतिक साजिश के तहत लाया गया है और जल्दबाज़ी में लाया गया है। सरकार और भाजपा कैथल जिला परिषद पर कब्जा करना चाहती है। कई नियमों का पालन नहीं किया गया है। सिर्फ सात दिन का सही नोटिस देने की बात नहीं है, और भी कई बातें हैं, वो हम हाइकोर्ट में बता रहे हैं, अगली तारीख पर भी बताएंगे। असंतुष्ट सदस्यों से बातचीत के सभी दरवाजे खुले हैं। जिस भी साथी की कोई शिकायत है या विकास कार्यों से जुड़ी कोई डिमांड है, वो मिल सकता है। सबके काम करवाएंगे। कैथल जिला परिषद पहले की तरह कल के बाद भी चलती रहेगी। जिला परिषद को ठप करने की साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे।

अध्यक्ष अपने पद को बचाने के लिए हाईकोर्ट में इसलिए गए, क्योंकि वह जिप में किए गए भ्रष्टाचार के कार्याें पर पर्दा डालना चाहते हैं। यदि उनकी कुर्सी बची रही तो वे भ्रष्टाचार के आरोपों से बचें रहेंगे, लेकिन वह शुक्रवार को सदन की बैठक में अविश्वास के लिए मतदान जरूर करने पहुंचेंगे। -कर्मबीर कौल, भाजपा समर्थित उपाध्यक्ष

21 पार्षदों में से 15 खिलाफ



भाजपा नेतृत्व ने इसी साल लोकसभा चुनावों से पहले मार्च माह में मनोहर की जगह नायब सैनी को प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान सौंपने के साथ जजपा से गठबंधन भी तोड़ लिया था। हरियाणा में भाजपा व जजपा गठबंधन सरकार के दौरान जनवरी 2023 में जजपा नेता दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली को कैथल जिला परिषद का अध्यक्ष चुना गया था। गठबंधन टूटते ही दीप जाखौली की कुर्सी पर ,खतरा मंडराना शुरू हुआ। इसके बाद अब यह अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंच गया है। जिला परिषद के 21 पार्षदों में 15 भाजपा व छह जेजेपी समर्थक माने जाते हैं। फिलहाल भाजपा समर्थित 15 पार्षद दीप के खिलाफ एकजुट बताए जा रहे हैं। हालांकि असली तस्वीर 19 जुलाई के अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली मतदान का परिणाम घोषित होने के बाद ही सामने आ पाएगी।
फिर मुखर हुए विपक्षी पार्षद, शहर के विकास कार्यों में अनियमितता बरतने के लगाए आरोप
कैथल। शहर के होने वाले विकास कार्याें को लेकर विपक्षी पार्षद एक बार फिर से मुखर हुए हैं। शहर के कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने वीरवार शाम के समय प्रेसवार्ता कर परिषद के कामों में घोटाले और कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। इस दौरान नगर परिषद के 10 से अधिक पार्षद मौजूद रहे।

नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष व पार्षद रामनिवास मित्तल ने कहा कि अध्यक्ष अपने कार्यकाल के अधिक समय में कार्यालय में ही नहीं बैठी। वह केवल सदन की बैठक के दिन ही कार्यालय में आती हैं। नगर परिषद के विकास के कामों में फर्जी बिलों के माध्यम से घोटाला किया जा रहा है और कमीशन खोरी का धंधा जारी है।

पूर्व अध्यक्ष रामनिवास मित्तल ने आरोप लगा बताया कि नगर परिषद की गाड़ियों में प्रति माह दो से तीन लाख रुपये के डीजल और पेट्रोल डलता है। शहर से निकलने वाले कूड़े के वजन में हेराफेरी करना और एक कंपनी को 22 साल का निविदा सूचना न देना गलत है। शहर में लगी तिरंगा लाइटों की कीमत 1800 रुपये प्रति एक है जबकि बिल छह हजार रुपये का बनाया गया है। 4250 गायों को जींद रोड से गोशाला पहुंचने के फर्जी बिल बनाकर लाखों रुपये की हेराफेरी की है।


रामनिवास मित्तल ने किसी का नाम न लेते हुए कहा कि एक दलाल सुबह से शाम तक कमेटी के कार्यालय में बैठा रहता है और दलाली करता है। शहर में लगाए गए आरसीसी बैंचों का 60 लाख का फर्जी बिल बनाकर फर्जीवाड़ा किया गया है। पार्षद महेश गोगिया ने शहर की ग्रीन बेल्ट से काटे गए पेड़ों का नगर परिषद के पास कोई हिसाब ना होने और उनको बेचकर रुपये में गोलमाल का आरोप लगाया। इस मौके पर पार्षद महेश गोगिया, राजकली, दिनेश, बलजीत, शमशेर फौजी, अनिल, विजय, मोहनलाल शर्मा, पार्षद व कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष सुशील शर्मा मौजूद रहीं। संवाद

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