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कोचिंग सेंटरों की छात्राओं ने भी विद्यावाहिनी बसें चलाए जाने की मांग
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ककालेज व आईटीआई में पढ़ने वाली छात्राओं के बाद अब शहर के जींद रोड स्थित एक कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाली छात्राओं ने भी विद्यावाहिनी बसें चलाई जाने की मांग की है। छात्राओं ने कहा कि सुबह कालेज जाने के इंतजार में कई घंटों तक बस स्टैंड पर खड़ा होना पड़ता है। कोचिंग सेंटरों में दोपहर बाद कक्षाएं लगती है। लेकिन वापस आते समय भी आटो का इंतजार करना पड़ता है। विद्यावाहिनी बसों के संचालन से इस तरह की समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
विदित रहे कि सिंतबर 2019 में डीसी डा. प्रियंका सोनी द्वारा विद्यावाहिनी बसों का संचालन किया गया था। जो छात्राओं को बस स्टैंड से कालेज व कालेज से बस स्टैंड तक छोड़ती थी। लेकिन लगभग दो महीने से इन बसों का संचालन न होने से छात्राओं को आटो में सफर करना पड़ रहा है। वहीं जिन छात्राओं की आर्थिक स्थिति सही नहीं वह अपने शिक्षण स्थानों तक पैदल सफर तय करती है।
कालेज के बाद कोचिंग सेंटर में लगानी पड़ती है कक्षाएं- छात्रा बबीता शर्मा ने कहा कि दोपहर तक कालेज में रहती है। इसके बाद कोचिंग सेंटर में एचएसएससी की कोचिंग लेती है। इसके लिए उन्हें लंबे समय तक आटो के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद दोनों कक्षाओं में देरी से पहुंचती है।
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लंबी दूरी तक पैदल चलना संभव नहीं- छात्रा सोनिया ने कहा पहले कॉलेज में पैदल जाना और बाद में कोचिंग सेंटरों में भी पैदल जाना पड़ता है। उन्होंने कहा इतनी लंबी दूरी तक पैदल चलाना संभव नहीं है। विद्यावाहिनी बसों का जल्द संचालन किया जाए।
बस स्टैंड पर ऑटो का करना पड़ता है इंतजार
छात्रा अन्नु का कहना है गांव से शहर तक तो जल्दी आ जाते है लेकिन बस स्टैंड से कालेज तक पहुंचने में आधे से एक घंटा तक का समय व्यतीत हो जाता है। छात्रा के ये भी कहना है कई बार आटो भी नहीं मिलता। इससे काफी परेशानी हो रही है।
कालेज और कोचिंग में पहुंचते हैं लेट - छात्रा सुनिता ने कहा कि कालेज के साथ-साथ कोचिंग सेंटरों में भी फीस जमा करवाई हुई है। लेकिन साधन न मिलने से सेंटरों में भी कक्षाएं प्रभावित हो रही है। कालेज भी देरी से पहुंचती है। विद्यावाहिनी बसें शुरू करवाई जाए।
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विदित रहे कि सिंतबर 2019 में डीसी डा. प्रियंका सोनी द्वारा विद्यावाहिनी बसों का संचालन किया गया था। जो छात्राओं को बस स्टैंड से कालेज व कालेज से बस स्टैंड तक छोड़ती थी। लेकिन लगभग दो महीने से इन बसों का संचालन न होने से छात्राओं को आटो में सफर करना पड़ रहा है। वहीं जिन छात्राओं की आर्थिक स्थिति सही नहीं वह अपने शिक्षण स्थानों तक पैदल सफर तय करती है।
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कालेज के बाद कोचिंग सेंटर में लगानी पड़ती है कक्षाएं- छात्रा बबीता शर्मा ने कहा कि दोपहर तक कालेज में रहती है। इसके बाद कोचिंग सेंटर में एचएसएससी की कोचिंग लेती है। इसके लिए उन्हें लंबे समय तक आटो के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद दोनों कक्षाओं में देरी से पहुंचती है।
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लंबी दूरी तक पैदल चलना संभव नहीं- छात्रा सोनिया ने कहा पहले कॉलेज में पैदल जाना और बाद में कोचिंग सेंटरों में भी पैदल जाना पड़ता है। उन्होंने कहा इतनी लंबी दूरी तक पैदल चलाना संभव नहीं है। विद्यावाहिनी बसों का जल्द संचालन किया जाए।
बस स्टैंड पर ऑटो का करना पड़ता है इंतजार
छात्रा अन्नु का कहना है गांव से शहर तक तो जल्दी आ जाते है लेकिन बस स्टैंड से कालेज तक पहुंचने में आधे से एक घंटा तक का समय व्यतीत हो जाता है। छात्रा के ये भी कहना है कई बार आटो भी नहीं मिलता। इससे काफी परेशानी हो रही है।
कालेज और कोचिंग में पहुंचते हैं लेट - छात्रा सुनिता ने कहा कि कालेज के साथ-साथ कोचिंग सेंटरों में भी फीस जमा करवाई हुई है। लेकिन साधन न मिलने से सेंटरों में भी कक्षाएं प्रभावित हो रही है। कालेज भी देरी से पहुंचती है। विद्यावाहिनी बसें शुरू करवाई जाए।