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बंद पड़े पांच वेंटिलेटर और मरीज हो रहे रेफर
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ventiletor stop
- फोटो : Kaithal
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कोरोना संकट के बीच जिला अस्पताल में लगाए गए 5 वेंटिलेटर अभी तक बंद पड़े हैं। जिस कारण जरूरत के समय काम न आने के चलते मरीजों को रेफर करना पड़ता है। कई बार मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा न मिल पाने का खमियाजा भुगतना पड़ता है। अस्पताल में एक्सपर्ट नहीं होने के कारण इन वेंटिलेटर का गंभीर और कोरोना से पीड़ित मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बता दें के कोरोना संक्रमित केस अगर ज्यादा गंभीर होता है तो उसे अस्पताल में रखने की बजाय अग्रोहा रेफर किया जाता है। ऐसे ही मरीजों की जरूरत के लिए कोरोना वार्ड में मई-जून माह में 5 वेंटिलेटर लगाए गए थे। ताकि इमरजेंसी में आक्सीजन आदि की जरूरत होने पर मरीजों को इसके माध्यम से आक्सीजन दी जा सके।
इमरजेंसी में भी नहीं है वेंटिलेटर की सुविधा- जिला नागरिक अस्पताल में अभी तक इमरजेंसी में भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। किसी दुर्घटना या अन्य बीमारी के कारण गंभीर व्यक्ति को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़, रोहतक या पटियाला रेफर किया जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कइयों की तो रास्ते में ही मौत हो जाती है। हर महीने अस्पताल से रेफर कई केस इस प्रकार के देखने को मिलते हैं।
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कई बार एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण भी होती है समस्या- रेफर मरीजों को कई बार एंबुलेंस न मिलने के कारण भी समस्या आती है। हालांकि कोरोना संक्रमित व्यक्ति को तो एंबुलेंस ज्यादातर उपलब्ध हो जाती है, लेकिन अन्य बीमारियों और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की भी दिक्कत आती है। ऐसे में रेफर मरीज की जेब पर भी अतिरिक्त खर्चे का भार पड़ता है।
71 बेड का है कोरोना वार्ड- पांच-छह माह से कोरोना वार्ड में काफी संख्या में मरीज दाखिल हो चुके हैं। यहां 71 बेड का अस्पताल बनाया गया है। जिसमें इस समय 18 मरीज दाखिल हैं। बाकि लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में पांच वेंटिलेटर हैं। उन्हें चलाने वाले एक्सपर्ट नहीं होने के कारण दिक्कत आ रही है। अगर इन्हें चलाने के लिए एक्सपर्ट मिल जाएं तो मरीजों को रेफर करने की संभावना काफी कम हो जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि एक्सपर्ट मिले और इन्हें शुरू किया जाए।
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बता दें के कोरोना संक्रमित केस अगर ज्यादा गंभीर होता है तो उसे अस्पताल में रखने की बजाय अग्रोहा रेफर किया जाता है। ऐसे ही मरीजों की जरूरत के लिए कोरोना वार्ड में मई-जून माह में 5 वेंटिलेटर लगाए गए थे। ताकि इमरजेंसी में आक्सीजन आदि की जरूरत होने पर मरीजों को इसके माध्यम से आक्सीजन दी जा सके।
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इमरजेंसी में भी नहीं है वेंटिलेटर की सुविधा- जिला नागरिक अस्पताल में अभी तक इमरजेंसी में भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। किसी दुर्घटना या अन्य बीमारी के कारण गंभीर व्यक्ति को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़, रोहतक या पटियाला रेफर किया जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कइयों की तो रास्ते में ही मौत हो जाती है। हर महीने अस्पताल से रेफर कई केस इस प्रकार के देखने को मिलते हैं।
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कई बार एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण भी होती है समस्या- रेफर मरीजों को कई बार एंबुलेंस न मिलने के कारण भी समस्या आती है। हालांकि कोरोना संक्रमित व्यक्ति को तो एंबुलेंस ज्यादातर उपलब्ध हो जाती है, लेकिन अन्य बीमारियों और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की भी दिक्कत आती है। ऐसे में रेफर मरीज की जेब पर भी अतिरिक्त खर्चे का भार पड़ता है।
71 बेड का है कोरोना वार्ड- पांच-छह माह से कोरोना वार्ड में काफी संख्या में मरीज दाखिल हो चुके हैं। यहां 71 बेड का अस्पताल बनाया गया है। जिसमें इस समय 18 मरीज दाखिल हैं। बाकि लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में पांच वेंटिलेटर हैं। उन्हें चलाने वाले एक्सपर्ट नहीं होने के कारण दिक्कत आ रही है। अगर इन्हें चलाने के लिए एक्सपर्ट मिल जाएं तो मरीजों को रेफर करने की संभावना काफी कम हो जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि एक्सपर्ट मिले और इन्हें शुरू किया जाए।