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इलाज के लिए दुश्वारियां, फर्श कभी दीवार का सहारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 12:23 AM IST
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Troubles for treatment, the floor is never the support of the wall
2-कैथल। पंजीकरण करवाने के लिए लाइन में खड़ी हुई महिलाएं अपनी बारी के इंतजार में थक कर नीचे नीचे जम? - फोटो : Kaithal
कैथल।
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समय : सुबह 10 बजकर 42 मिनट, स्थान : जिला नागरिक अस्पताल।
उमस भरी गर्मी में पसीने से तरबतर और गर्भावस्था। यदि सातवां या आठवां महीना हो तो और ज्यादा दिक्कत। लाइनों में भीड़ का आलम। ऐसे में चक्कर आने का डर। कुछ इस तरह की लाचारी मंगलवार को सुबह से लेकर दोपहर तक जिला नागरिक अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर गर्भवती महिलाओं के साथ दिखी। उनसे बातचीत की तो बोलीं- भीड़ में कभी दीवार तो कभी फर्श उनका सहारा बनता है।
मंगलवार को अस्पताल में पंजीकरण काउंटर पर 5 या 10 नहीं बल्कि सैकड़ों मरीज एक साथ चार लाइनों में खड़े दिखे। कइयों की तो सुबह से लेकर दोपहर तक पंजीकरण के लिए बारी ही नहीं आई। जिनका पंजीकरण हुआ, उनको जांच कक्षों के बाहर लाइनों में लगना पड़ा। इस दौरान कभी महिलाएं कतारों में खड़ी होकर तो कभी फर्श पर बैठकर या दीवार के सहारे लगकर चंद पलों के लिए आराम करती दिखाई दी।
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इंतजार के बाद भी जब महिलाओं के पंजीकरण की बारी नहीं आई तो वे यह कहती हुई दिखाई दीं कि आज तो नंबर आना मुश्किल लगता है। ऐसे में कोई दूसरा विकल्प भी नहीं चुन सकते। मांग की कि कम से कम गर्भवती महिलाओं आदि को तो अलग से काउंटर पर सुविधा देनी चाहिए। यह भी कहा कि कतारों में खड़े हों तो भी दिक्कत और अगर थोड़ी देर के लिए पंखे के नीचे जाएं तो फिर से लाइनों में लगना पड़ता है। गर्भावस्था का सातवां या फिर आठवां महीना जिन महिलाओं का चल रहा था, उन्हें ज्यादा दिक्कतें हो रही थीं।
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जब पर्ची कटी तो टेस्ट हो गए बंद
जैसे-तैसे करके कुछ महिलाओं ने पर्ची कटवा भी ली, लेकिन जब तक पर्ची कटी, तब तक टेस्ट बंद हो गए। फिर तो महिलाएं ये कहती हुई वापस चली गई कि कल फिर से तंग होना पड़ेगा। जांच होगी या नहीं इस बारे कुछ नहीं कह सकते।
चारों काउंटरों पर कर्मचारी, पर काम धीमा
पंजीकरण कक्ष में चार कंप्यूटरों पर चार कर्मचारी अलग-अलग ठंडे माहौल में बैठकर लगातार काम करते रहे, लेकिन काम की गति इतनी धीमी थी कि दोपहर तक बड़ी मुश्किल से पंजीकरण का कार्य पूरा हो पाया। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि पहले इस कक्ष में पांच काउंटर थे, लेकिन बाहर की तरफ वाला काउंटर अब बंद है।
लाइसेंस के लिए मेडिकल भी चलते हैं
भीड़ ज्यादा होने और मरीजों की दिक्कतों का एक ये भी बड़ा कारण रहा कि लाइसेंस के लिए मेडिकल करवाने वाले लोग भी कतारों में लगे रहे। एक कर्मचारी की तो पूर्ण ड्यूटी उन्हीं के पंजीकरण में लगी रही। चारों काउंटरों पर सामान्य मरीजों का पंजीकरण, लाइसेंस बनवाने वाले, गर्भवती महिलाओं और कोविड जांच वाले मरीजों का चार तरह का पंजीकरण किया गया।
कोरोना काल के बाद अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। दूसरी लहर समाप्त होने के साथ जहां रोजाना 500 से लेकर 600 तक ओपीडी हो रही थी, वे अब बढक़र 1500 के करीब हो गई हैं। इस कारण मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पंजीकरण की सुविधा को और ज्यादा दुरुस्त किया जाएगा ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
डॉ. रेनू चावला, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल
अस्पताल में पहुंची गर्भवती महिला सोनिया ने बताया कि वह दो घंटे से पंजीकरण के लिए लाइन में खड़ी है। अब तक उसका पंजीकरण नहीं हो पाया है। गर्मी और पसीने ने बेहाल कर रखा है। बड़ी मुश्किल से कभी बैठकर तो अभी उठकर पंजीकरण काउंटर के नजदीक तक पहुंची है। यहां पर्ची कटे तो ही जांच हो पाएगी।
भीड़ के बीच दीवार का सहारा लेकर बैठी रामनगर निवासी सोनम ने बताया कि पौने दो घंटे हो चुके हैं। अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है। अब वह यहां बैठ गई है और साथ में आई महिला को उसके स्थान पर लाइन में लगाया है। बारी आएगी तो वह खड़ी होकर पंजीकरण करवा लेंगी।

गर्भवती महिला गीता को जांच करवाने के लिए अस्पताल में लेकर आई महिला बेबी ने बताया कि साढ़े नौ बजे से वे पंजीकरण का इंतजार कर रही हैं। पहले गीता लाइन में खड़ी थी, लेकिन गर्मी के कारण उसे घबराहट हो गई और चक्कर से आने लगे। इस कारण उसे पंखे के नीचे बैठाकर वह खुद लाइन में खड़ी हैं।
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