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देखरेख के अभाव में बदहाल प्री-फेब्रिकेटिड शौचालय
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toilet
- फोटो : Kaithal
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शहर के लोगों की सुविधा के लिए रखवाए गए प्री-फेब्रिकेटिड शौचालय बदहाल अवस्था में हैं। इनका उपयोग करना तो दूर की बात बल्कि इनके पास से निकलने पर बदबू आती है। करीब पांच महीने से इन शौचालयों की देखरेख के लिए किसी ठेकेदार के पास ठेका नहीं दिया गया है। 16 जगहों पर करीब 45 लाख रुपये से रखवाए गए इन शौचालयों का शहरवासियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। देख-रेख के अभाव में शौचालयों में गंदगी फैली हुई है। उनमें लगी टोंटियां और अन्य सामान टूटा पड़ा है। कई जगहों पर तो इन शौचालयों पर ताला जड़ा हुआ है, जिस कारण लोग इनके उपयोग से वंचित रह रहे हैं। दूसरी ओर नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि शौचालयों की देखरेख का ठेका समाप्त होने के कारण यह समस्या बनी हुई है।
16 जगहों पर रखे गए हैं करीब 64 शौचालय
शहर में 16 स्थानों पर 64 से ज्यादा प्री-फेब्रिकेटिड शौचालयों की यूनिट रखी गई हैं। एक स्थान पर चार से छह शौचालय रखे गए हैं, जिनमें से कुछ महिलाओं के लिए हैं तो कुछ पुरुषों के लिए अलग से हैं। नगर परिषद द्वारा एक यूनिट पर करीब 68 हजार रुपये का खर्च किया गया है।
शहर में पुराना अस्पताल के पास, जाट स्कूल के सामने करनाल रोड पर, रेलवे स्टेशन के पास, हुडा सेक्टर 19 के पार्क, बालाजी कॉलोनी के पास व अन्य स्थानों पर शौचालय रखवाए गए हैं। इनमें से ज्यादातर स्थानों पर तो इन शौचालयों पर ताला जड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों को इनके विकल्प के लिए जगह तलाश करनी पड़ रही है।
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एक दिन के लिए दिखे थे शौचालयों में बाल्टी व मग:
पिछले वर्ष स्वच्छता अभियान के तहत आई टीम ने शहर में रखे इन शौचालयों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। टीम के आने की सूचना मिलते ही इन शौचालयों में सफाई व उपकरण ठीक करवाकर साबुन और अन्य जरूरी सामान रखवा दिया गया था। टीम के जाने के बाद फिर से हालात बदतर हो गए, जो आज तक ऐसे ही बने हुए हैं।
शहरवासी रमेश ने बताया कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर ये शौचालय बदहाल हैं तो फिर इनको रखवाने का ही क्या औचित्य है। शौचालयों पर ताला जड़ा रहता है। लोग खाली पड़े स्थानों को पेशाब करने के लिए तलाश करते हैं। शौचालय रखने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
शहरवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि शौचालय रखवाने के कुछ दिनों बाद ही इनमें बदहाली फैल गई थी। कभी पानी नहीं था तो कभी सामान चोरी हे जाता था। करनाल रोड पर तो अब इनके गेटों पर ताला जड़ा हुआ है। इससे अच्छा तो जगह तलाशकर स्थाई शौचालय ही बनवा देते।
पुनीत ने बताया कि शौचालय देखरेख के अभाव में गंदगी से भरे पड़े हैं। पेड़ो के पत्ते और पॉलीथिन तक उड़कर इनमें जमा हो चुके हैं, लेकिन कोई भी सफाई की जहमत नहीं उठा रहा है। जब ये रखवाए गए थे तो कुछ समय तक लोगों को इनका लाभ हुआ। अब सफाई के लिए भी कभी कभार ही कर्मचारी आते हैं। वे भी इन्हें सुचारू रूप से चलाने योग्य नहीं बना पा रहे हैं।
सुनील ने कहा कि शौचालयों में लगी टोंटियों और अन्य सामान को भी कुछ शरारती तत्व उखाड़कर ले जाते हैं। हालांकि कई बार दोबारा भी इन्हें ठीक किया गया है, लेकिन इनकी देखरेख के लिए कोई कर्मचारी न होने के कारण फिर से सामान तोड़ दिया जाता है। इनकी देखरेख के लिए किसी कर्मचारी की ड्यूटी लगाने की जरूरत है।
ठेके की प्रक्रिया जारी- नगर परिषद के ईओ अशोक कुमार ने बताया कि नगर परिषद द्वारा समय-समय पर टैंकर भेजकर इनकी सफाई की जा रही है। टंकियों में पानी भरवाया जाता है। इसके स्थाई समाधान के लिए नप ने डीसी को ठेके से संबंधित प्रक्रिया के बारे में भी अवगत करवाया है। नप का प्रयास है कि इसका जल्द से जल्द ठेका जारी किया जाए और स्थिति को दुरुस्त किया जाए ताकि लोगों को इनका पूरा लाभ मिल सके।
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16 जगहों पर रखे गए हैं करीब 64 शौचालय
शहर में 16 स्थानों पर 64 से ज्यादा प्री-फेब्रिकेटिड शौचालयों की यूनिट रखी गई हैं। एक स्थान पर चार से छह शौचालय रखे गए हैं, जिनमें से कुछ महिलाओं के लिए हैं तो कुछ पुरुषों के लिए अलग से हैं। नगर परिषद द्वारा एक यूनिट पर करीब 68 हजार रुपये का खर्च किया गया है।
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शहर में पुराना अस्पताल के पास, जाट स्कूल के सामने करनाल रोड पर, रेलवे स्टेशन के पास, हुडा सेक्टर 19 के पार्क, बालाजी कॉलोनी के पास व अन्य स्थानों पर शौचालय रखवाए गए हैं। इनमें से ज्यादातर स्थानों पर तो इन शौचालयों पर ताला जड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों को इनके विकल्प के लिए जगह तलाश करनी पड़ रही है।
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एक दिन के लिए दिखे थे शौचालयों में बाल्टी व मग:
पिछले वर्ष स्वच्छता अभियान के तहत आई टीम ने शहर में रखे इन शौचालयों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। टीम के आने की सूचना मिलते ही इन शौचालयों में सफाई व उपकरण ठीक करवाकर साबुन और अन्य जरूरी सामान रखवा दिया गया था। टीम के जाने के बाद फिर से हालात बदतर हो गए, जो आज तक ऐसे ही बने हुए हैं।
शहरवासी रमेश ने बताया कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर ये शौचालय बदहाल हैं तो फिर इनको रखवाने का ही क्या औचित्य है। शौचालयों पर ताला जड़ा रहता है। लोग खाली पड़े स्थानों को पेशाब करने के लिए तलाश करते हैं। शौचालय रखने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
शहरवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि शौचालय रखवाने के कुछ दिनों बाद ही इनमें बदहाली फैल गई थी। कभी पानी नहीं था तो कभी सामान चोरी हे जाता था। करनाल रोड पर तो अब इनके गेटों पर ताला जड़ा हुआ है। इससे अच्छा तो जगह तलाशकर स्थाई शौचालय ही बनवा देते।
पुनीत ने बताया कि शौचालय देखरेख के अभाव में गंदगी से भरे पड़े हैं। पेड़ो के पत्ते और पॉलीथिन तक उड़कर इनमें जमा हो चुके हैं, लेकिन कोई भी सफाई की जहमत नहीं उठा रहा है। जब ये रखवाए गए थे तो कुछ समय तक लोगों को इनका लाभ हुआ। अब सफाई के लिए भी कभी कभार ही कर्मचारी आते हैं। वे भी इन्हें सुचारू रूप से चलाने योग्य नहीं बना पा रहे हैं।
सुनील ने कहा कि शौचालयों में लगी टोंटियों और अन्य सामान को भी कुछ शरारती तत्व उखाड़कर ले जाते हैं। हालांकि कई बार दोबारा भी इन्हें ठीक किया गया है, लेकिन इनकी देखरेख के लिए कोई कर्मचारी न होने के कारण फिर से सामान तोड़ दिया जाता है। इनकी देखरेख के लिए किसी कर्मचारी की ड्यूटी लगाने की जरूरत है।
ठेके की प्रक्रिया जारी- नगर परिषद के ईओ अशोक कुमार ने बताया कि नगर परिषद द्वारा समय-समय पर टैंकर भेजकर इनकी सफाई की जा रही है। टंकियों में पानी भरवाया जाता है। इसके स्थाई समाधान के लिए नप ने डीसी को ठेके से संबंधित प्रक्रिया के बारे में भी अवगत करवाया है। नप का प्रयास है कि इसका जल्द से जल्द ठेका जारी किया जाए और स्थिति को दुरुस्त किया जाए ताकि लोगों को इनका पूरा लाभ मिल सके।