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Kaithal News: कार्यशाला में सोशल मीडिया के उपयोग, मंच संचालन के बताए गुर

Sat, 01 Jun 2024 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 01 Jun 2024 02:25 AM IST
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Tips for use of social media and platform management explained in the workshop
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। लघु सचिवालय में सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक मंदीप सिंह बराड़ के निर्देशानुसार विभाग की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला का ऑनलाइन आयोजन किया। इसमें सोशल मीडिया व मंच संचालन से संबंधित जानकारियां प्रदेश के सभी जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारियों के साथ साझा की।

विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. साहिब राम गोदारा ने भी कार्यशाला से जुड़े सभी जिलों के डीआईपीआरओ व अन्य अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। कार्यशाला का आयोजन परियोजना अधिकारी डॉ. पवन कुमार के संयोजन में हुआ। वहीं विशेषज्ञ अरविंद, हनी जसवाल, आईपीआरओ आदित्य चौधरी व सोशल मीडिया एक्पर्ट ने आधुनिक युग में सोशल मीडिया के उपयोग एवं महत्ता के बारे में प्रकाश डाला। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के सीएमटी विभाग के पूर्व चेयरपर्सन डॉ. मिहिर रंजन पात्रा तथा ऑल इंडिया रेडियो के सेवानिवृत सहायक निदेशक एवं राष्ट्रीय स्तर के मंच संचालक जैनेंद्र सिंह ने मंच से संचालन से संबंधित टिप्स दिए।
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जैनेंद्र सिंह ने कहा कि मंच संचालक के पास एक अच्छा शब्दकोष का होना के साथ-साथ भाषा की अच्छी पकड़ और शब्दों का सही उच्चारण होना चाहिए। सबसे पहले हमें कार्यक्रम के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा मंच संचालक के लिए जरूरी है कि वे सामने बैठे दर्शकों को कार्यक्रम के साथ जोड़कर रखे। एंकर की भाषा सरल व स्पष्ट होने के साथ-साथ एक अच्छी अभिव्यक्ति भी होनी जरूरी है। उसके पास शब्दों का भंडार होना चाहिए। इसके अलावा मंच के संचालन में एक प्रवाह होना चाहिए।
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डॉ. मिहिर रंजन पात्रा ने बताया कि मंच संचालक के पास कार्यक्रम से संबंधित जरूरी व अच्छी सामग्री होनी चाहिए, ताकि संबंधित विषयों पर लंबे समय तक बोल सके। यह उस समय और अधिक कारगर होता है, जब मुख्य अतिथि आने के दौरान समय होता है।

उन्होंने बताया कि मंच संचालक के अंदर सबसे जरूरी है कि उनके अंदर आत्मविश्वास हो। बोलते समय निरंतरता होनी चाहिए और जहां जरूरी है वहां ठहराव होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मंच संचालक साहित्यिक भाषा का प्रयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि शुद्ध हिंदी के साथ-साथ हरियाणवी, उर्दू व अंग्रेजी के शब्दों का भी प्रयोग किया जा सकता है। दर्शकों एवं श्रोताओं को अधिक देर तक एवं मुख्य अतिथि द्वारा देरी होने पर बीच-बीच तालियां बजवाते रहें।


इसके अलावा उनके अनुरूप भाषण, धार्मिक और सामाजिक व भारतीय संस्कृति संबंधित तथा मनोरंजन भी बीच में करवाते रहें। कार्यशाला में उपस्थित सभी डीआईपीआरओ ने विषय विशेषज्ञों के साथ अपने अनुभवों को भी सांझा किया। कार्यशाला के अंत में सभी डीआईपीआरओ ने महानिदेशक एवं विषय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया।
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