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मिसाल: कोरोना काल में गांव से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा तो युवाओं ने बनाई लाइब्रेरी, अब गांव के तीन बेटे बनें एसआई
Tue, 02 Nov 2021 01:18 AM IST
भूपेंद्र सिंह
नसीब सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, कैथल (हरियाणा)
नसीब सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, कैथल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 02 Nov 2021 01:18 AM IST
सार
- पंचायत ने भवन व फर्नीचर दिया तो युवाओं ने जुटाई इंटरनेट, वाईफाई व एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं
- युवाओं ने लाइब्रेरी बनाकर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, 50 से अधिक बच्चों के बैठने की सुविधा
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गांव काकौत में बनी लाइब्रेरी और हरियाणा पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती में चयनित युवा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
यह कड़ी मेहनत एवं सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि एक ही गांव के तीन युवा अपनी मेहनत से सब इंस्पेक्टर बन गए। तीनों ही सामान्य परिवारों से हैं। कोरोना काल में जब गांव से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा था, उस समय युवाओं ने सामूहिक प्रयास से एक लाइब्रेरी बनाई और उसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की जिसका परिणाम है कि हरियाणा के कैथल जिले के गांव काकौत के तीन युवा हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर बन गए हैं। इससे उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
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युवा मोहित ने बताया कि उसके पिता गोपी राम मेहनत मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। वे तीन भाई हैं। उसके दो भाई एक ट्यूबवेल ऑपरेटर हैं तो दूसरे आर्मी की तैयारी करते हैं। उसने गांव के ही निजी विद्यालय से बारहवीं की। इसके बाद आरकेएसडी से बीए की। इस समय इग्नू से एमए कर रहे हैं। कोरोना काल में उन्होंने युवा साथियों के साथ मिलकर गांव की पंचायत के सहयोग से लाइब्रेरी बनाई। जिसमें भवन व फर्नीचर पंचायत ने दिया। समाज सेवी और अन्य लोगों से करीब 2 लाख रुपये जुटाए। कुछ ऐसे युवाओं ने भी पैसा दिया, जो लाइब्रेरी में पढ़ते भी हैं और कहीं काम भी करते हैं। सुबह पांच बजे लाइब्रेरी खोल दी जाती है। रात को पढ़कर जाने वाले युवा रात में ही इसकी सफाई करके जाते हैं। युवाओं की एक कमेटी बनाकर लाइब्रेरी का संचालन किया जाता है। ग्राम पंचायत के सहयोग से बनी इस लाइब्रेरी की सहायता से ही यह सफलता मिली है।
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दूसरे युवा रिंकू ने बताया कि वे वर्ष 2018 से तैयारी कर रहे हैं। स्नातक इग्नू से किया। पूंडरी के राजकीय विद्यालय से ग्यारहवीं व बारहवीं पास की। दसवीं गांव के ही निजी विद्यालय से की। उनके दो भाइयों में एक भाई आउटसोर्स से शिफ्ट अटेडेंट हैं। दूसरे भाई प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। गांव की लाइब्रेरी में एक साल तैयारी की। सरपंच नरेश कुमार के सहयोग से लाइब्रेरी बनीं। इसमें सभी सुविधाएं मिलीं। जिससे उन्हें काफी सहायता मिली। गांव के लगभग 50 युवा यहां बैठकर पढ़ाई करते हैं।
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इसी गांव के युवा सोनू ने बताया कि लाइब्रेरी घर के सामने ही है। वह स्वयं सुबह पांच बजे इसे खोलता है। यहां पढ़ने के बाद दिन में कैथल की गुरुकुल अकादमी से तैयारी की। इस समय वह परीक्षाओं की ही तैयारी में लगा था। बारहवीं गांव के ही स्कूल से की। इसके बाद हिसार पालीटेक्निक से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन का डिप्लोमा किया। सात से आठ परीक्षाएं दीं। जिसमें यूएचबीवीएन में जीएसओ के लिए परीक्षा पास कर ली थी। किन्हीं कारणों से वहां बात नहीं बनीं। पढ़ता रहा तो अब सफलता मिली है। जिसमें ग्राम पंचायत के सहयोग से बनीं लाइब्रेरी के कारण बड़ी मदद मिली। उनके पिता सतपाल मंडी सुपरवाइजर हैं। वे तीन भाई हैं। एक कैथल में मोबाइल की दुकान करते हैं। दूसरे भाई खेती करते हैं।