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Kaithal News: इस बार जातीय समीकरण के आधार पर हो सकता है मतदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Oct 2024 03:33 AM IST
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This time voting may be based on caste equations
कमल बहल
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गुहला-चीका, कैथल। पंजाब से सटी आरक्षित गुहला-चीका विधानसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला दिलचस्प है। क्योंकि इस बार कांग्रेस ने नए चेहरे पर दाव खेला है तो वहीं भाजपा ने पुराने चेहरे पर विश्वास जताया है। वैसे तो गुहला-चीका क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक लोग खेती का कार्य करते हैं, लेकिन पिछले पांच साल में गठबंधन सरकार में शामिल जजपा विधायक की ओर से लोगों की उम्मीद अनुरुप कार्य नहीं हो पाए।
ऐसे में लोग इस बार लोग शांत रहकर अपने नए विधायक का चुनाव करना चाहते हैं। यही नहीं, इस क्षेत्र के पंजाब के क्षेत्र से सटा होने के चलते किसानों की नाराजगी दूर होगी या भारी पड़ेगी। यह तय तो विधानसभा चुनाव के आने वाले परिणाम के बाद ही हो पाएगा। इस क्षेत्र में कई ऐसे मुद्दे हावी हैं, जो लोगों की मुलभूत सुविधाओं से जुड़े हुए हैं। इसमें सबसे मुख्य मुद्दा युवाओं में पंजाब की तरह बढ़ रहा नशा और पंजाब क्षेत्र से सटे गांवों का हर साल मानसून में आने वाली बाढ़ का खतरा है।
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वहीं, सड़कों का निर्माण न होना और रोजगार न मिलना भी प्रमुख है। बता दें कि इस क्षेत्र में पंजाब बॉर्डर से करीब तीन दर्जन गांव बसे हुए हैं। इन गांवों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं है। इसलिए उन्हें पंजाब की तरफ रुख करना पड़ता है। पिछली बार भाजपा की सरकार तो बनी, लेकिन गुहला से सरकार की सहयोगी जजपा का विधायक बना था।
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परंतु इस बार जातीय समीकरण के आधार पर मतदान हो सकता है। क्षेत्र के पंजाब से सटा होने के कारण इसकी करीब 50 किलोमीटर क्षेत्र की सीमा पंजाब बॉर्डर से लगती है। गुहला विधानसभा क्षेत्र जिले की एकमात्र आरक्षित सीट है। जो शुरुआत से ही आरक्षित सीट रही है। 2005 में हुए परिसीमन के बावजूद यह सीट आरक्षित रही है।

भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर हो सकती

हालांकि इस बार स्थानीय लोगों के अनुसार इस विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर हो सकती है, लेकिन जैसे ही मतदान की तिथि समीप आ रही है तो अन्य दलों के प्रत्याशी भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। वर्ष 2009 से इस विधानसभा क्षेत्र लगातार अपना वर्चस्व कायम कर रहे आजाद उम्मीदवारों की कड़ी में इस बार भी पूर्व विधायक स्व. अमर सिंह ढांडे के सुपुत्र नरेश ढांडे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, भाजपा के पुराने चेहरे पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर तो कांग्रेस ने नए चेहरे पर देवेंद्र हंस चुनावी मैदान में हैं। उधर, जजपा पार्टी से कृष्ण बाजीगर भी मैदान में हैं। ऐसे में इस सीट पर बाजीगर समाज से दो उम्मीदवार मैदान में है।



विधानसभा क्षेत्र में यह है जातिगत आंकड़ा-
गुहला-चीका विधानसभा क्षेत्र में कुल एक लाख 93 हजार मतदाता हैं। इसमें सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति की बराबर-बराबर वोट हैं। जो करीब 70 हजार के करीब हैं। इसमें अधिक अंतर नहीं है। जबकि ओबीसी वर्ग से करीब 55 हजार मतदाता हैं। गुहला विधानसभा क्षेत्र में एक लाख 93 हजार 65 मतदाता हैं। जिनमें से एक लाख 14 हजार 113 पुरुष और एक लाख एक हजार 40 महिला मतदाता हैं। वहीं, सात थर्ड जेंडर के भी वोट हलके में बने हुए है। गुहला विधानसभा क्षेत्र में 199 बूथ हैं, जिसमें 42 बूथ शहरी क्षेत्र तथा 157 बूथ ग्रामीण क्षेत्र में है। इसके साथ ही सामान्य वर्ग में जाट, वैश्य, पंजाबी और ब्राह्मण समाज के मतदाताओं को मिलाकर करीब 70 हजार मतदाता हैं। इस सीट पर बाजीगर समाज की वोट भी निर्णायक साबित होती हैं।



ईश्वर सिंह बने थे पहले विधायक-

वर्ष 1977 से लेकर वर्ष 2019 तक गुहला विधानसभा का 10 बार चुनाव हो चुका है। इनमें सबसे ज्यादा इनेलो पार्टी से चार बार विधायक बने हैं। जबकि दो बार कांग्रेस, एक बार जनता पार्टी, एक बार बीजेपी तो पिछले चुनाव में जजपा यहां जीत हासिल करने में कामयाब रही। यहां से पहले विधायक ईश्वर सिंह बने जो जनता पार्टी से चुनाव लड़कर जीते थे। उनके हिस्से में गुहला को सब डिविजन बनवाने का श्रेय भी जाता है। ईश्वर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस के साथ जुड़े रहे लेकिन वह गुहला से कभी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव नहीं लड़े।



स्थानीय निवासी राजपाल सिंह ने बताया कि गुहला-चीका क्षेत्र धान के क्षेत्र में काफी मशहूर है। इसके पंजाब से सटा होने के कारण हर बार नशे के मुद्दा हावी है। पंजाब से बड़ी मात्रा में नशे का कारोबार गुहला में होता है। सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन नशे पर लगाम लगाने में सभी विफल है।


जीवन सिंह ने बताया कि पंजाब बॉर्डर से सटी घग्गर नदी में बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं करवाया गया है। यहां पर न नदी में सफाई का कार्य हो पाता है। ऐसा भी नहीं है इसके सिंचाई विभाग के पास अलग से कोई बजट नहीं आता है। बजट आने के बावजूद हालात काफी खराब हैं।



ये उम्मीदवार है चुनाव मैदान में



कुलवंत बाजीगर भाजपा

देवेंद्र हंस कांग्रेस
कृष्ण बाजीगर जेजेपी
पूनम रानी इनेलो
राकेश कुमार आप

नरेश कुमार आजाद



पिछले तीन चुनाव में यह रहा था परिणाम-
वर्ष जीता हुआ उम्मीदवार रनर अप रहा उम्मीदवार

2019 ईश्वर सिंह जजपा दिल्लू राम बाजीगर

2014 कुलवंत बाजीगर भाजपा दिल्लू राम बाजीगर
2009 फूल सिंह खेड़ी इनेलो दिल्लू राम बाजीगर
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