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अफसरों में तालमेल नहीं, यात्री झेल रहे परेशानी
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16-कैथल। सामानय अड्डे पर खड़ी बसें
- फोटो : Kaithal
कैथल। आरटीए और रोडवेज के अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव कलायत विधान सभा के हजारों यात्रियों पर भारी पड़ रहा है। अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के चलते कैथल-नरवाना रूट पर रोडवेज की बसें न मिलने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जबकि कलायत विधान सभा राज्यमंत्री कमलेश ढांडा का निर्वाचन क्षेत्र है। आरटीए के की ओर से कुछ दिन पहले नए सिरे से जारी की गई समय सारणी में आरटीए ने कैथल डिपो की नरवाना रूट पर चलने वाली 30 बसों के स्थान पर 27 निजी बसों का समय जारी कर दिया है। इस समय सारणी पर रोडवेज लगातार आपत्ति भी जता रहा है।
संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। इससे जहां इस रूट पर चलने वाले रोडवेज व निजी बसों के परिचालकों व चालकों में कहासुनी हो रही है, वहीं यात्रियों को भी समय पर बसें नहीं मिल पा रही हैं। नरवाना रूट पर आने वाले 50 से ज्यादा गांवों के यात्री काफी समय से रोडवेज की बसें संचालित करने का इंतजार कर रहे हैं। रोडवेेज की बसें संचालित न होने के कारण उन्हें निजी बसों में सफर करना पड़ रहा है। लोकल गांवों में लंबे रूटों की रोडवेज बसें नहीं रुक रही हैं। संवाद
कैथल डिपो के सभी समय निजी बसों को दिए
पहले इस रूट पर रोडवेज के 30 समय कैथल और नरवाना सब डिपो के थे। कैथल के 18 और नरवाना सब डिपो के 12 समय के स्थान पर अब आरटीए ने नयी समय सारणी में कैथल डिपो के सभी समय निजी बसों को दे दिए हैं। नरवाना डिपो के भी 12 समय में से केवल नौ समय रह गए हैं। निजी बसों के समय को पांच मिनट से बढ़ाकर नौ मिनट कर दिया है। इससे रोडवेज की आमदनी पर काफी असर पड़ेगा। इस रूट से कई रात्रि ठहराव बसें भी जाती है। उन बसों को भी नई समय सारणी में समय नहीं दिया गया है। ये बसें सुबह गांव से वह शाम को बस अड्डा से रवाना होकर गांव में रात्रि ठहराव करती है। इस रूट पर चलने वाली रोडवेज रात्रि ठहराव बसें व निजी बसों के चालक परिचालकों के बीच आपस में विवाद भी हो रहा है।
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छात्र-छात्राएं और कर्मचारी सबसे ज्यादा परेशान
रोडवेज की बसों के समय कम हो जाने के बाद करीब 10 हजार पास वाले छात्र, छात्राएं, कर्मचारी व कोचिंग इंस्टीट्यूट में जाने वाले युवा परेशान हैं। रोजाना करीब पांच हजार छात्र-छात्राओं ने नरवाना जाने वाले रूट पर बस पास बनाए हुए हैं। बस बंद हो जाने के कारण अब निजी बसों में छात्राओं को किराया देना होगा। निजी बसों में बस पास नहीं चल रहा है। निजी बसों में बस पास न चलने के कारण शैक्षणिक संस्थान में जाने वाले छात्रों और रोज निजी बस परिचालकों विवाद होने के मामले आ रहे हैं।
नहीं बन रहे निजी बसों में पास
यात्री सुनील ने बताया कि निजी बसों में बस पास नहीं चल पा रहे हैं। इसके चलते निजी बसों में किराया देकर शैक्षणिक संस्थानों में आना पड़ रहा है। इस रुट पर एक रोडवेज व एक निजी बस जरूर संचालित की जानी चाहिए। ताकि विद्यार्थियों को शैक्षणिक संस्थान से आने-जाने में परेशानी न उठानी पड़े।
कोई निर्धारित समय नहीं है बसों का
छात्रा नीशू का कहना है कि पहले सुबह व शाम के समय कलायत वाया कलासर किठाना रोडवेज की बस का समय होता था। लेकिन इस बस का समय अब नहीं है। सैकड़ों विद्यार्थी रोजाना इस बस से आते- जाते हैं। विद्यार्थियों ने बस पास की फीस भर कर पास बनवाएं हुए हैं। अब बस बंद होने जा रही हैं। इनका उपयोग नहीं हो रहा है। जिससे छात्र-छात्राएं परेशान हैं।
आरटीए की ओर से नरवाना रूट पर बसों की समय सारणी पर बदलाव करते समय कोई सूचना नहीं दी गई। समय को लेकर आरटीए विभाग को पत्र जारी किया जाएगा। समय बदलने से पहले आरटीए विभाग की तरफ से सूचना दी जानी चाहिए थी।
अजय गर्ग रोडवेज महाप्रबंधक
इस संबंध में रोडवेज को पत्र भेजा जाता है। रोडवेज के कर्मचारी या अन्य कोई अधिकारी बैठक में नहीं आता है। किसी रूट पर आपत्ति है तो रोडवेज विभाग लिख कर समय ले सकता है। रोडवेज की समय पर बसें नहीं चल रही थी। इस कारण बसों के समय में बदलाव किया है। - गिरीश कुमार, आरटीए
आरटीए गिरीश कुमार ने
रोडवेज को हो रहा है लाखों नुकसान
कर्मचारी कृष्ण, रणबीर, हरिचंद्र, ने कहा कि आरटीए विभाग की मनमर्जी के कारण रोडवेज को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। आरटीए रोडवेज डिपो के समय पर निजी बसों को जारी कर दिया है। इससे रूट पर निजी बसों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। इससे जहां इस रूट पर चलने वाले रोडवेज व निजी बसों के परिचालकों व चालकों में कहासुनी हो रही है, वहीं यात्रियों को भी समय पर बसें नहीं मिल पा रही हैं। नरवाना रूट पर आने वाले 50 से ज्यादा गांवों के यात्री काफी समय से रोडवेज की बसें संचालित करने का इंतजार कर रहे हैं। रोडवेेज की बसें संचालित न होने के कारण उन्हें निजी बसों में सफर करना पड़ रहा है। लोकल गांवों में लंबे रूटों की रोडवेज बसें नहीं रुक रही हैं। संवाद
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कैथल डिपो के सभी समय निजी बसों को दिए
पहले इस रूट पर रोडवेज के 30 समय कैथल और नरवाना सब डिपो के थे। कैथल के 18 और नरवाना सब डिपो के 12 समय के स्थान पर अब आरटीए ने नयी समय सारणी में कैथल डिपो के सभी समय निजी बसों को दे दिए हैं। नरवाना डिपो के भी 12 समय में से केवल नौ समय रह गए हैं। निजी बसों के समय को पांच मिनट से बढ़ाकर नौ मिनट कर दिया है। इससे रोडवेज की आमदनी पर काफी असर पड़ेगा। इस रूट से कई रात्रि ठहराव बसें भी जाती है। उन बसों को भी नई समय सारणी में समय नहीं दिया गया है। ये बसें सुबह गांव से वह शाम को बस अड्डा से रवाना होकर गांव में रात्रि ठहराव करती है। इस रूट पर चलने वाली रोडवेज रात्रि ठहराव बसें व निजी बसों के चालक परिचालकों के बीच आपस में विवाद भी हो रहा है।
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छात्र-छात्राएं और कर्मचारी सबसे ज्यादा परेशान
रोडवेज की बसों के समय कम हो जाने के बाद करीब 10 हजार पास वाले छात्र, छात्राएं, कर्मचारी व कोचिंग इंस्टीट्यूट में जाने वाले युवा परेशान हैं। रोजाना करीब पांच हजार छात्र-छात्राओं ने नरवाना जाने वाले रूट पर बस पास बनाए हुए हैं। बस बंद हो जाने के कारण अब निजी बसों में छात्राओं को किराया देना होगा। निजी बसों में बस पास नहीं चल रहा है। निजी बसों में बस पास न चलने के कारण शैक्षणिक संस्थान में जाने वाले छात्रों और रोज निजी बस परिचालकों विवाद होने के मामले आ रहे हैं।
नहीं बन रहे निजी बसों में पास
यात्री सुनील ने बताया कि निजी बसों में बस पास नहीं चल पा रहे हैं। इसके चलते निजी बसों में किराया देकर शैक्षणिक संस्थानों में आना पड़ रहा है। इस रुट पर एक रोडवेज व एक निजी बस जरूर संचालित की जानी चाहिए। ताकि विद्यार्थियों को शैक्षणिक संस्थान से आने-जाने में परेशानी न उठानी पड़े।
कोई निर्धारित समय नहीं है बसों का
छात्रा नीशू का कहना है कि पहले सुबह व शाम के समय कलायत वाया कलासर किठाना रोडवेज की बस का समय होता था। लेकिन इस बस का समय अब नहीं है। सैकड़ों विद्यार्थी रोजाना इस बस से आते- जाते हैं। विद्यार्थियों ने बस पास की फीस भर कर पास बनवाएं हुए हैं। अब बस बंद होने जा रही हैं। इनका उपयोग नहीं हो रहा है। जिससे छात्र-छात्राएं परेशान हैं।
आरटीए की ओर से नरवाना रूट पर बसों की समय सारणी पर बदलाव करते समय कोई सूचना नहीं दी गई। समय को लेकर आरटीए विभाग को पत्र जारी किया जाएगा। समय बदलने से पहले आरटीए विभाग की तरफ से सूचना दी जानी चाहिए थी।
अजय गर्ग रोडवेज महाप्रबंधक
इस संबंध में रोडवेज को पत्र भेजा जाता है। रोडवेज के कर्मचारी या अन्य कोई अधिकारी बैठक में नहीं आता है। किसी रूट पर आपत्ति है तो रोडवेज विभाग लिख कर समय ले सकता है। रोडवेज की समय पर बसें नहीं चल रही थी। इस कारण बसों के समय में बदलाव किया है। - गिरीश कुमार, आरटीए
आरटीए गिरीश कुमार ने
रोडवेज को हो रहा है लाखों नुकसान
कर्मचारी कृष्ण, रणबीर, हरिचंद्र, ने कहा कि आरटीए विभाग की मनमर्जी के कारण रोडवेज को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। आरटीए रोडवेज डिपो के समय पर निजी बसों को जारी कर दिया है। इससे रूट पर निजी बसों की संख्या बढ़ती जा रही है।