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वार्डों में कांटे की टक्कर तो कई गांवों में खाली नजर आए बूथ
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कैथल। उन्हीं गांवों में रविवार को चुनावी माहौल नजर आया। जहां से उम्मीदवार जिला परिषद एवं पंचायत समिति का चुनाव लड़ रहे थे। वहीं जिला परिषद और पंचायत समिति का चुनाव सरपंच व पंच के चुनाव से अलग होने के कारण गांवों में चुनाव के लिए वह उत्साह नजर नहीं आया। जो सरपंच के चुनाव में नजर आता है। इसके अलावा जिला परिषद व पंचायत समिति के वार्ड में आने वाले दूसरे गांवों में कई उम्मीदवारों ने तो बूथ पर एजेंट तक नहीं बैठाए। इस दौरान कई वार्डों में कांटे की टक्कर रही तो कई गांवों में बूथ खाली नजर आए।
जानकारी के अनुसार जिला परिषद के एक वार्ड में 10 से 12 गांव और पंचायत समिति के चुनाव में दो से तीन गांव आते हैं। सरपंच के लिए हर गांव में चुनाव होता है। पहले सरपंच व जिला परिषद के चुनाव एक साथ होते थे। साथ में सरपंच व पंच का चुनाव होने के कारण हर गांव में चुनाव को लेकर विशेष उत्साह रहता था। इस बार सरपंच व पंच के लिए चुनाव दो नवंबर को होने के कारण लोगों में इस बार ज्यादा उत्साह नजर नहीं आया। पिछली बार कैथल में 84 प्रतिशत और गुहला ब्लॉक में 78 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं इस बार पूरे जिले में 67.8 प्रतिशत मतदान हुआ है। जो पिछली बार से करीब 17 प्रतिशत कम रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरपंच व पंच का चुनाव अलग होने के कारण जिला परिषद में लोगों का उत्साह कम नजर आया। ऐसे में मतदान केंद्रों पर लोगों की उतनी संख्या नहीं दिखी, जितनी आमतौर पर रहती है। कुछ केंद्रों के बाहर सभी उम्मीदवारों के एजेंटों सहित केवल चार-पांच व्यक्ति ही खड़े दिखाई दिए। शाम को मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के समय एक बार फिर गांववासी केंद्रों के बाहर दिखे। दो दिन बाद होने वाले सरपंच व पंच के चुनाव में जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव के मुकाबले मतदान प्रतिशत ज्यादा रहेगा। क्योंकि उस दिन हर गांव से उम्मीदवार होंगे। जो अपने-अपने गांव से मतदाताओं को बूथ तक लाएंगे और ले जाएंगे।
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जानकारी के अनुसार जिला परिषद के एक वार्ड में 10 से 12 गांव और पंचायत समिति के चुनाव में दो से तीन गांव आते हैं। सरपंच के लिए हर गांव में चुनाव होता है। पहले सरपंच व जिला परिषद के चुनाव एक साथ होते थे। साथ में सरपंच व पंच का चुनाव होने के कारण हर गांव में चुनाव को लेकर विशेष उत्साह रहता था। इस बार सरपंच व पंच के लिए चुनाव दो नवंबर को होने के कारण लोगों में इस बार ज्यादा उत्साह नजर नहीं आया। पिछली बार कैथल में 84 प्रतिशत और गुहला ब्लॉक में 78 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं इस बार पूरे जिले में 67.8 प्रतिशत मतदान हुआ है। जो पिछली बार से करीब 17 प्रतिशत कम रहा।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरपंच व पंच का चुनाव अलग होने के कारण जिला परिषद में लोगों का उत्साह कम नजर आया। ऐसे में मतदान केंद्रों पर लोगों की उतनी संख्या नहीं दिखी, जितनी आमतौर पर रहती है। कुछ केंद्रों के बाहर सभी उम्मीदवारों के एजेंटों सहित केवल चार-पांच व्यक्ति ही खड़े दिखाई दिए। शाम को मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के समय एक बार फिर गांववासी केंद्रों के बाहर दिखे। दो दिन बाद होने वाले सरपंच व पंच के चुनाव में जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव के मुकाबले मतदान प्रतिशत ज्यादा रहेगा। क्योंकि उस दिन हर गांव से उम्मीदवार होंगे। जो अपने-अपने गांव से मतदाताओं को बूथ तक लाएंगे और ले जाएंगे।
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