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Kaithal News: मंडियों में 16270 एमटी पीआर धान, नमी के कारण पहले दिन नहीं मिले खरीदार
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नई अनाजमंडी कैथल में धान की फसल सुखाता नफे सिंह। संवाद
कैथल। मंडियों में धान की सरकारी खरीद मंगलवार से शुरू हो गई लेकिन पहले दिन मंडियों में पीआर धान खरीदने के लिए कोई खरीदार सामने नहीं आया। वर्तमान में मंडियों में 16,270 मीट्रिक टन पीआर धान की आवक हो चुकी है लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इसका कारण धान में पाई जाने वाली नमी को बताया जा रहा है। खरीद एजेंसी की शुरुआती जांच में धान में नमी का स्तर 22 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज किए जाने का दावा है। सरकारी नियमों के मुताबिक, तय मानक 17 प्रतिशत नमी से ज्यादा नमी होने के कारण एजेंसियां फसल की खरीद करने से हाथ पीछे खींच रही हैं।
बारिश से स्थिति बिगड़ने की आशंका
मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़े धान के लिए किसानों की चिंताएं और गहरा गई हैं। मौसम में आए बदलाव और हाल ही में हुई बारिश के कारण खुले में रखी फसल में नमी का स्तर और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर आगामी दिनों में मौसम साफ नहीं हुआ, तो सूखने के बजाय धान की नमी और बढ़ जाएगी। वहीं दूसरी ओर मंडियों में पहले ही 1509 किस्म का करीब साढ़े 13 हजार मीट्रिक टन धान भी आ चुका है।
राइस मिलर नहीं करा रहे पंजीकरण
इस बार कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के लिए राइस मिलर पंजीकरण कराने में आगे नहीं आ रहे हैं। पिछले वर्ष जहां 181 राइस मिलरों ने मिलिंग के लिए अपना पंजीकरण कराया था, वहीं इस साल यह संख्या घटकर केवल 80 पर सिमट कर रह गई है।
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चार दिन से मंडियों में डटे हैं किसान
किसान पिछले तीन से चार दिनों से अपनी पीआर धान की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर मंडियों में डटे हैं। बाबा लदाना के किसान नफे सिंह का कहना है कि वह तीन-चार दिन से मंडी में पीआर धान लेकर आए हैं लेकिन अब न तो सरकारी एजेंसियां सुध ले रही हैं और न ही कोई निजी खरीदार मिल रहा है। किसानों ने मांग की है कि मौसम की मार को देखते हुए सरकार को नमी के मानकों में तुरंत ढील देनी चाहिए।
मार्केट कमेटी कैथल के सचिव नरेंद्र ढुल ने बताया कि एजेंसी अधिकारियों के अनुसार धान में नमी अधिक होने के कारण सरकारी खरीद नहीं हो पाई। जल्द ही खरीद रफ्तार पकड़ेगी।
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बारिश से स्थिति बिगड़ने की आशंका
मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़े धान के लिए किसानों की चिंताएं और गहरा गई हैं। मौसम में आए बदलाव और हाल ही में हुई बारिश के कारण खुले में रखी फसल में नमी का स्तर और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर आगामी दिनों में मौसम साफ नहीं हुआ, तो सूखने के बजाय धान की नमी और बढ़ जाएगी। वहीं दूसरी ओर मंडियों में पहले ही 1509 किस्म का करीब साढ़े 13 हजार मीट्रिक टन धान भी आ चुका है।
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राइस मिलर नहीं करा रहे पंजीकरण
इस बार कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के लिए राइस मिलर पंजीकरण कराने में आगे नहीं आ रहे हैं। पिछले वर्ष जहां 181 राइस मिलरों ने मिलिंग के लिए अपना पंजीकरण कराया था, वहीं इस साल यह संख्या घटकर केवल 80 पर सिमट कर रह गई है।
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चार दिन से मंडियों में डटे हैं किसान
किसान पिछले तीन से चार दिनों से अपनी पीआर धान की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर मंडियों में डटे हैं। बाबा लदाना के किसान नफे सिंह का कहना है कि वह तीन-चार दिन से मंडी में पीआर धान लेकर आए हैं लेकिन अब न तो सरकारी एजेंसियां सुध ले रही हैं और न ही कोई निजी खरीदार मिल रहा है। किसानों ने मांग की है कि मौसम की मार को देखते हुए सरकार को नमी के मानकों में तुरंत ढील देनी चाहिए।
मार्केट कमेटी कैथल के सचिव नरेंद्र ढुल ने बताया कि एजेंसी अधिकारियों के अनुसार धान में नमी अधिक होने के कारण सरकारी खरीद नहीं हो पाई। जल्द ही खरीद रफ्तार पकड़ेगी।

नई अनाजमंडी कैथल में धान की फसल सुखाता नफे सिंह। संवाद

नई अनाजमंडी कैथल में धान की फसल सुखाता नफे सिंह। संवाद

नई अनाजमंडी कैथल में धान की फसल सुखाता नफे सिंह। संवाद