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युवक को सांप ने काटा, चार दिन बाद आया होश
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सोते हुए कॉमन करेट सांप ने एक युवक को दो जगह से काट लिया। जिस कारण वह तीन दिन बेहोश रहा और उसकी सांसें थम सी गई थीं, लेकिन यहां निजी अस्पताल में करीब ढाई घंटे तक सांसें रुकने के बाद दिया जाने वाला सीटीआर यानि हृदय को दबाने की प्रक्रिया की गई, तब जाकर उसकी सांसें फिर से किसी तरह से जुड़ीं।
भगवानदत्त ने बताया कि दो अक्तूबर को उसके बैड पर ही उसे दोनों हाथों पर कुछ काटे जाने का एहसास हुआ। इसके बाद उसे सांप दिखाई दिया। परिजन उसे पहले झाड़फूंक करने वाले के पास ले गए। जहां से उसे आराम नहीं आया। बल्कि शरीर नीला पड़ गया और दिखना भी बंद हो गया। इसके बाद उसे यहां लघु न्यायिक परिसर के निकट स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। तब तक जहर फैलने के कारण मेरी आंखों की रोशनी चली गई थी और आवाज भी भारी हो गई थी। यहां डॉक्टरों ने प्रयास किया तो आज वह जीवित बच सका है। उसे हार्ट अटैक के झटके भी आ चुके थे।
निजी चिकित्सक डॉ. डी.एस. पंवार ने बताया कि कॉमन करेट नामक सांप ने उसे डसा था। यह सांप काफी जहरीला होता है। कई बार काटने का पता भी नहीं चलता। अगर किसी को भी सांप काट जाए तो तुरंत उसका ईलाज अच्छे क्वालीफाइड (एमबीबीएस) चिकित्सक से ही करवाएं। अगर सांप जहरीला भी न हो तो भी चिकित्सक की निगरानी में करीब 24 घंटे तक रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से सांप से काटे मरीज को कई बार मृत मानकर जिंदा ही जला दिया जाता है। क्योंकि सांप के काटने के बाद कुछ लोग उसे तांत्रिक या झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाते हैं और वे मरीज की नब्ज देखकर ही उसे मृत घोषित कर देते हैं, जबकि वे जिंदा होते हैं। गांव सिणंद निवासी भगवानदत्त का केस भी ऐसा ही था। भगवानदत्त के अस्पताल में पहुंचने के कुछ देर बाद ही उसकी धड़कन व सांस रुक गई थी। लेकिन उन्होंने करीब ढाई घंटे मरीज को सीटीआर आर दिया। जिससे धड़कन वापस आई गई। यह भगवान का चमत्कार है।
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भगवानदत्त ने बताया कि दो अक्तूबर को उसके बैड पर ही उसे दोनों हाथों पर कुछ काटे जाने का एहसास हुआ। इसके बाद उसे सांप दिखाई दिया। परिजन उसे पहले झाड़फूंक करने वाले के पास ले गए। जहां से उसे आराम नहीं आया। बल्कि शरीर नीला पड़ गया और दिखना भी बंद हो गया। इसके बाद उसे यहां लघु न्यायिक परिसर के निकट स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। तब तक जहर फैलने के कारण मेरी आंखों की रोशनी चली गई थी और आवाज भी भारी हो गई थी। यहां डॉक्टरों ने प्रयास किया तो आज वह जीवित बच सका है। उसे हार्ट अटैक के झटके भी आ चुके थे।
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निजी चिकित्सक डॉ. डी.एस. पंवार ने बताया कि कॉमन करेट नामक सांप ने उसे डसा था। यह सांप काफी जहरीला होता है। कई बार काटने का पता भी नहीं चलता। अगर किसी को भी सांप काट जाए तो तुरंत उसका ईलाज अच्छे क्वालीफाइड (एमबीबीएस) चिकित्सक से ही करवाएं। अगर सांप जहरीला भी न हो तो भी चिकित्सक की निगरानी में करीब 24 घंटे तक रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से सांप से काटे मरीज को कई बार मृत मानकर जिंदा ही जला दिया जाता है। क्योंकि सांप के काटने के बाद कुछ लोग उसे तांत्रिक या झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाते हैं और वे मरीज की नब्ज देखकर ही उसे मृत घोषित कर देते हैं, जबकि वे जिंदा होते हैं। गांव सिणंद निवासी भगवानदत्त का केस भी ऐसा ही था। भगवानदत्त के अस्पताल में पहुंचने के कुछ देर बाद ही उसकी धड़कन व सांस रुक गई थी। लेकिन उन्होंने करीब ढाई घंटे मरीज को सीटीआर आर दिया। जिससे धड़कन वापस आई गई। यह भगवान का चमत्कार है।
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