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नमी के नाम पर कटौती : व्यवस्था के फेर में फंसा किसान

Mon, 05 Oct 2026 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 05 Oct 2026 03:08 AM IST
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Deductions on account of moisture: Farmers caught in the system's web
विक्रम पूनिया
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कैथल। पीआर धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये से लेकर ग्रेड-ए का 2461 रुपये तय है। वहीं कागजों में खरीद व बिक्री पहले की तरह ही एमएसपी पर ही हो रही है। कैथल में किसानों से रविवार को प्राइवेट राइस मिलर्स ने 2250 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर धान की खरीद की। किसानों का कहना है कि उनके खाते में तो राशि समर्थन मूल्य की पूरी ही आएगी, लेकिन वास्तव में जेब में जो राशि आएगी वो 150 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति क्विंटल तक कम आएगी। यानि सीधे सीधे प्रति एकड़ 4 से लेकर 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक कम, क्योंकि ये राशि की कटौती नमी के नाम पर पहले ही हो चुकी है।

किसानों के अनुसार मंडी में इस समय जो धान पड़ा है अधिकारियों के अनुसार उसमें नमी की मात्रा ज्यादा है जो 18 प्रतिशत से लेकर 23 प्रतिशत तक है। सरकारी एजेंसियां 17 प्रतिशत नमी या उससे कम होने पर ही धान की खरीद समर्थन मूल्य पर करती हैं। धान में नमी ज्यादा बताते ही किसान परेशान होने लगता है, क्योंकि काम धंधे छोड़कर कईं कईं दिनों तक मंडी में बैठना किसानों के लिए मुश्किल है। इस बीच वजन कम होने से लेकर चोरी होने और चावल निकलने जैसी समस्याएं भी आने लगती हैं। किसान इन्हीं सब समस्याओं से बचने के लिए 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक धान सस्ते में देने पर भी राजी हो जाता है।
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2250 रुपये बिका धान, अधिकारियों को सब पता : अनिल
गांव क्योड़क निवासी किसान अनिल कुमार की 3.50 एकड़ की धान की 2250 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी जो समर्थन मूल्य 2441 रुपये से 191 रुपये प्रति क्विंटल कम है। किसान से जब एमएसपी पर क्यों नहीं बेची इस बारे में पूछा गया तो किसान ने कहा कि सभी मिलकर किसान को लूट रहे हैं। अधिकारी एसी के कमरों में बैठकर अनजान बने हुए हैं। किसान को कभी नमी के नाम पर और कभी खराब होते मौसम के नाम पर इस तरह डराया जाता है कि वे मजबूर हो जाता है अपनी धान सस्ते में बेचने पर, जबकि उनके खाते में राशि पूरी ही आएगी। एमएसपी कम नहीं है, लेकिन ये किसानों को कभी मिला ही नहीं। ये बात किसी से छिपी नहीं है और कोई भी अधिकारी या नेता मंडी में आकर इसकी पड़ताल कर सकता है।
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2250 रुपये प्रति क्विंटल बेचा धान : राकेश
गांव पाडला निवासी किसान राकेश मंडी में अपनी धान की ढेरी पर खड़ा था। उन्होंने बताया कि 2250 रुपये प्रति क्विंटल उनका धान बिका है, लेकिन जब पूछा गया कि एमएसपी तो ज्यादा है तो इस पर उन्होंने कहा कि दो दिन से मंडी में बैठे हैं, लेकिन मशीन में नमी नियमानुसार बताकर ढेरी की खरीद नहीं की जाती है। उनकी मजबूरी है धान इस रेट में बेचना। राशि खाते में पूरी ही आएगी, लेकिन असली जो राशि है वो तो कुछ और ही है। वे ना बेचते तो यही पड़ी पड़ी ढेरी का चावल निकल जाता और कितने दिन वे मंडी में इसको लेकर बैठे रह सकते हैं। संवाद


वर्जन...
नियमानुसार समर्थन मूल्य पर ही एजेंसियां धान की खरीद कर रही हैं। किसी किसान से धान अगर कम में खरीदा गया है तो वे संबंधित एजेंसी या उनके कार्यालय में आकर इसकी लिखित शिकायत करें, क्योंकि जब तक किसान शिकायत नहीं देंगे वे कुछ नहीं कर सकते हैं। खरीद का पूरा काम एजेंसियां कर रही हैं और मार्केट कमेटी किसान की मदद के लिए काम कर रहा है।
- नरेंद्र ढुल, सचिव, मार्केट कमेटी, कैथल।
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