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Kaithal News: ग्रामीण बोले, न्याय तक जारी रहेगा संघर्ष

Wed, 21 May 2025 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 21 May 2025 12:27 AM IST
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The villagers said, the struggle will continue till justice is done
संवाद न्यूज एजेंसी
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सीवन। जिले का पोलड़ गांव इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है। पुरातत्व विभाग की ओर से ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए गांव को खाली करने का जो नोटिस जारी किया गया है, उसने पूरे गांव को चिंता और आक्रोश में डाल दिया है। ग्रामीण अपने पुश्तैनी घरों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का संदेश स्पष्ट है— जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा।

पूर्व सरपंच श्रवण ने इस मुद्दे के संदर्भ में सांसद नवीन जिंदल के कैथल स्थित कार्यालय में जाकर कार्यालय प्रभारी शंकर गोयल से मुलाकात की और उन्हें गांव की स्थिति से अवगत कराया। शंकर गोयल ने आश्वासन दिया कि यह मामला स्वयं सांसद तक पहुंचाया जाएगा और शीघ्र ही सांसद से मुलाकात भी करवाई जाएगी। श्रवण ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलने के लिए भी समय मांगा है ताकि गांव खाली कराने के आदेश को निरस्त करने की अपील की जा सके।
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ग्रामीणों ने कहा कि वे कानूनी रास्ता अपनाते हुए इस फैसले को चुनौती देने के लिए कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। पूर्व सरपंच ने कहा, यह गांव केवल एक बस्ती नहीं, यह हमारी आत्मा है। यहां का हर पत्थर, हर गली हमारी जिंदगी की यादें समेटे हुए है।
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गांव की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत पर संकट ः श्रवण ने बताया कि पोलड़ गांव में सरकारी स्कूल, नलकूप, मां सरस्वती का मंदिर, और शहंशाह नौगजा पीर की दरगाह जैसी कई सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंचायत गठन कर यहां विकास कार्यों के लिए धन भी खर्च किया है, अब उसी सरकार की ओर से गांव खाली कराने का आदेश समझ से परे है।

विरोध के स्वर तेज, ग्रामीण एकजुट

उन्होंने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया। कहा कि एक तरफ सरकार सरस्वती नदी को लेकर पोलड़ गांव में रिवर फ्रंट और पर्यटन केंद्र की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गांव को उजाड़ने की कोशिश कर रही है। यह सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपना गांव नहीं छोड़ेंगे। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा — सभी एकजुट होकर विरोध की राह पर हैं।


संवेदनशीलता की कसौटी पर प्रशासन

पोलड़ गांव की यह स्थिति न केवल एक प्रशासनिक चुनौती है, बल्कि यह इस बात पर भी सवाल खड़ा करती है कि विकास और संरक्षण के नाम पर आम लोगों की जिंदगियों के साथ किस हद तक समझौता किया जा सकता है। यह मामला कानूनी ही नहीं, बल्कि गंभीर मानवीय संवेदना का भी विषय है।
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