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Kaithal News: हवन के साथ शुरू हुआ तीन दिवसीय मेला
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कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में शनिवार को तीन दिवसीय वार्षिक मेला शुरू हो गया। मेला शुरू करने से पहले बाबा राजपुरी डेरे में सुबह हवन करवाया गया, जिसमें भारी संख्या में साधुओं, आसपास के गांवों के गणमान्य लोगों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। हवन करने के बाद मंदिर में लगे वर्षों पुराने जाल के पेड़ पर ध्वजा चढ़ाई गई।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने गांव की परिक्रमा कर दादा खेड़े पर पूजा-पाठ किया और मेले की शुरूआत की। ऐसी मान्यता है कि डेरे में लगे जाल के पेड़ पर माता हिंगलाज नवमी की रात को धागा बांधने के लिए आती हैं। उनके आगमन के उपलक्ष्य में सुबह हवन कर पेड़ पर ध्वजा चढ़ाई जाती है। डेरे के महंत दूजपुरी ने बताया कि तीन दिन में तीन लाख के करीब श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
पहले दिन पूजा-पाठ के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। ऐसे में मेला स्थल पर भी भीड़ कम रही। श्रद्धालुओं ने बाबा राजपुरी के मंदिर में दूध, घी, मक्खन, फल और प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन में वृद्धि की कामना की। पहले दिन मेले में दुकानें भी कम लगी, जिन पर बच्चों और महिलाओं ने खरीदारी की।
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महंत दूजपरी ने बताया कि एकादशी के दिन सबसे ज्यादा श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए पहुंचेंगे, क्योंकि प्रत्येक एकादशी को बाबा राजपुरी के डेरे में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उतराखंड, यूपी और हिमाचल सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु और साधु पूजा-पाठ के लिए पहुंचेंगे। एकादशी को श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की जाएगी। मेले के दौरान कुश्ती दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच भी सजेगा।
महंत ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस प्रशासन का सहयोग लिया गया है। गांव बाबा लदाना को शहर व अन्य गांवों से जोडऩे वाले सभी रास्तों पर सैंकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात करवाए गए हैं। मेले के संपन्न होने तक पुरुष एवं महिला कर्मचारी सुरक्षा में तैनात रहेंगे।
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इसके बाद श्रद्धालुओं ने गांव की परिक्रमा कर दादा खेड़े पर पूजा-पाठ किया और मेले की शुरूआत की। ऐसी मान्यता है कि डेरे में लगे जाल के पेड़ पर माता हिंगलाज नवमी की रात को धागा बांधने के लिए आती हैं। उनके आगमन के उपलक्ष्य में सुबह हवन कर पेड़ पर ध्वजा चढ़ाई जाती है। डेरे के महंत दूजपुरी ने बताया कि तीन दिन में तीन लाख के करीब श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
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पहले दिन पूजा-पाठ के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। ऐसे में मेला स्थल पर भी भीड़ कम रही। श्रद्धालुओं ने बाबा राजपुरी के मंदिर में दूध, घी, मक्खन, फल और प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन में वृद्धि की कामना की। पहले दिन मेले में दुकानें भी कम लगी, जिन पर बच्चों और महिलाओं ने खरीदारी की।
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महंत दूजपरी ने बताया कि एकादशी के दिन सबसे ज्यादा श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए पहुंचेंगे, क्योंकि प्रत्येक एकादशी को बाबा राजपुरी के डेरे में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उतराखंड, यूपी और हिमाचल सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु और साधु पूजा-पाठ के लिए पहुंचेंगे। एकादशी को श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की जाएगी। मेले के दौरान कुश्ती दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच भी सजेगा।
महंत ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस प्रशासन का सहयोग लिया गया है। गांव बाबा लदाना को शहर व अन्य गांवों से जोडऩे वाले सभी रास्तों पर सैंकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात करवाए गए हैं। मेले के संपन्न होने तक पुरुष एवं महिला कर्मचारी सुरक्षा में तैनात रहेंगे।