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Kaithal News: मिडिल से आगे नहीं बढ़ सका सांसद जेपी के पैतृक गांव दुब्बल का स्कूल

Tue, 05 Aug 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 05 Aug 2025 01:06 AM IST
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The school in MP JP's native village Dubbal could not progress beyond middle school
33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार
निशीकांत शर्मा
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कलायत। चार बार विधायक और तीन बार सांसद चुन चुका गांव दुब्बल—जहां से मौजूदा सांसद जयप्रकाश और पूर्व विधायक रणधीर सिंह धीरा जैसी हस्तियां निकलीं—वहीं का सरकारी स्कूल आज भी मिडिल स्तर से ऊपर नहीं उठ सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इसकी हालत सुधारने की कवायद करनी चाहिए।

वर्ष 1964 में प्राथमिक स्तर से शुरू हुआ यह विद्यालय 61 वर्षों में केवल आठवीं कक्षा तक ही सीमित रह गया है।

बंद होने की कगार पर पहुंच गया था स्कूल ः गांव के इस राजकीय मिडिल स्कूल में इस समय केवल 77 छात्र ही नामांकित हैं। इनमें से 40 बच्चे प्राथमिक (कक्षा 1-5) और 33 मिडिल स्तर (कक्षा 6-8) में अध्ययनरत हैं। कम छात्र संख्या के कारण कुछ समय पहले यह स्कूल बंद होने की कगार पर था।
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मिडिल विंग में केवल तीन कमरे हैं—एक में प्रधानाचार्य का कार्यालय है, जबकि दो में कक्षा 5 से 8 तक की पढ़ाई होती है। प्राथमिक विंग में कुल पाँच कमरे हैं, जिनमें से दो कमरे जर्जर हालत के चलते उपयोग में नहीं लिए जा रहे। उनके लेंटर गिरने की स्थिति में हैं, इसीलिए उन्हें बंद कर दिया गया है।
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शिक्षक नहीं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं ः विद्यालय में विज्ञान और गणित विषय के शिक्षक नहीं हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अनुपस्थिति के कारण सफाई व्यवस्था भी प्रभावित रहती है। स्कूल की चहारदीवार भी जर्जर अवस्था में है। हालांकि, स्कूल में मिड-डे मील, पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था उपलब्ध है।

राजनीतिक रूप से समृद्ध, शिक्षा में पिछड़ता गांव ः दुब्बल गांव ने राजनीतिक रूप से बड़ी पहचान बनाई है। यहां से जयप्रकाश दो बार विधायक और तीन बार सांसद रह चुके हैं। पूर्व विधायक रणधीर सिंह धीरा भी इसी स्कूल से पढ़े हैं।

वर्तमान विधायक जयप्रकाश के पुत्र विकास सहारण ने भले ही यहां से शिक्षा न ली हो, लेकिन गांव के इस स्कूल की ओर ध्यान देना उनका दायित्व बनता है—विशेषकर तब जब उन्होंने 2014 के चुनाव में कलायत को शिक्षा का हब बनाने का वादा किया था। संवाद
रिपोर्ट कार्ड
राजकीय मिडिल स्कूल, दुब्बल (कैथल)

कुल विद्यार्थी
77

रिक्त शिक्षक पद
4

कुल कमरे
8

प्रयोग लायक कमरे
6

जर्जर कमरे
2
बच्चों की संख्या कम होने के कारण शिक्षक पद रिक्त हैं। विभागीय नीति के अनुसार 25 बच्चों पर एक शिक्षक नियोजित किया जाता है। इस अनुपात में छठी से आठवीं तक की कक्षाएं दो कमरों में तथा पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं तीन कमरों में संचालित की जा रही हैं। स्कूल में मिड-डे मील कक्ष, पीने का पानी और शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था है। -संजीव कुमार, मुख्याध्यापक, राजकीय मिडिल स्कूल, दुब्बल (कैथल)


सरकार की नई शिक्षा नीति बेहद कमजोर और अव्यवहारिक है। न तो यह नीति ज़मीनी हकीकत से जुड़ती है और न ही इससे ग्रामीण बच्चों के भविष्य को कोई ठोस दिशा मिलती है।दुब्बल गांव के स्कूल की दुर्दशा को लेकर मैं पहले भी कई बार सरकार से आग्रह कर चुका हूं। मैंने बार-बार कहा है कि स्कूल में अध्यापकों की भारी कमी है, और जिन कमरों में बच्चे पढ़ते हैं, वे जर्जर अवस्था में हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मैं फिर इस मुद्दे को उठाऊंगा। संबंधित विभागों से बातचीत कर सरकार से कहूंगा कि स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति जल्द से जल्द हो और नए भवन का निर्माण कराया जाए। गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा और पर्याप्त सुविधाएं मिलनी ही चाहिए। इससे न केवल छात्र संख्या बढ़ेगी, बल्कि बच्चों का भविष्य भी मजबूत होगा। -जयप्रकाश उर्फ जेपी, सांसद हिसार लोकसभा क्षेत्र

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

33 कलायत: दुब्बल के माध्यमिक स्कूल का प्रवेश द्वार

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