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Kaithal News: बीएस- छह तकनीक की बसें कम होने से दिल्ली जाने वाला रूट प्रभावित
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01 कैथल। सुबह के समय नए बस स्टैंड पर खाली पड़ा दिल्ली का काउंटर। संवाद
कैथल। रोडवेज के कैथल डिपो में बीएस-छह तकनीक की बसें कम होने से दिल्ली जाने वाला रूट प्रभावित हो रहा है। ऐसे में यात्रियों परेशान हो रहे हैं। रूट प्रभावित होने के चलते सुबह और दोपहर के समय दिल्ली जाने वाली बसें नहीं मिल पा रही हैं। इस स्थिति में यात्रियों को करनाल तक लोकल बस में सफर करना पड़ता है। गौरतलब है कि डिपो की ओर से बीएस छह तकनीक बसों की पर्याप्त संख्या के चलते पहले प्रतिदिन 35 से अधिक समय दिल्ली जाने वाली बसों के थे लेकिन अब यह घटकर करीब 29 ही रह गए हैं।
तीन महीने पहले ही एनसीआर जिलों में भेजी थीं 48 बसें
बता दें कि तीन महीने पहले ही कैथल डिपो में एनसीआर जिलों में 48 बसें भेजी थीं। यह बसें झज्जर, भिवानी और फरीदाबाद में भेजी गई थी। इसके बाद डिपो में न तो नई बसें आई हैं और न ही इन पुरानी बसों को वापस कैथल भेजा गया है।
प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्रियों का दिल्ली रूट पर है आवागमन
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्रियों का दिल्ली रूट पर आवागमन होता है। बसों की संख्या कम होने से कैथल से प्रतिदिन करनाल, पानीपत और दिल्ली जाने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। ऐसे में दैनिक यात्रियों को करनाल तक लोकल बसों में सफर करना पड़ता है। पहले करनाल और फिर करनाल से दिल्ली जाना पड़ रहा है।
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बस स्टैंड से खासकर दिल्ली जाने के लिए सुबह और शाम को बसों की सेवाएं नहीं है। कैथल से दिल्ली की दूरी करीब 180 किलोमीटर है और यह सफर चार से पांच घंटें का है। बीएस छह बसें आधुनिक सेवाओं से लैस हैं और लंबे सफर में इन बसों में यात्रा करना आरामदायक होता है। कैथल से दिल्ली की पहली बस सुबह सवा पांच बजे है और शाम को अंतिम बस साढ़े सात बजे की है। यात्री रोशन ने कहा कि वह सुबह करीब सवा 10 बजे से दिल्ली जाने के बस स्टैंड पर पहुंचा था लेकिन यहां पर काफी देर तक बस नहीं मिली। इससे काफी परेशानी हुई।
रोडवेज के कर्मचारी नेता बलवान कुंडू ने बताया कि तीन माह पहले ही कैथल डिपो की बसें झज्जर भेजी गई हैं, जो अब तक वापस नहीं आई हैं। सरकार से आग्रह है कि कैथल डिपो में जल्द ही नई बसें भेजी जाएं, जिससे कैथल से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
वर्जन-
सरकार के आदेशों पर पिछले साल नवंबर में ही बीएस छह तकनीक की बसें एनसीआर के जिलों में भेज दी गई थी। इसके बाद डिपो में नई बसें अभी तक नहीं आई है। ऐसे में अभी दिल्ली रूट पर बसों की संख्या कम हुई है। परंतु जैसे ही नई बसें आएंगी तो दिल्ली रूट पर बसों की संख्या बढ़ा दी जाएंगी।
शमशेर सिंह मान, ड्यूटी निरीक्षक, कैथल डिपो।
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तीन महीने पहले ही एनसीआर जिलों में भेजी थीं 48 बसें
बता दें कि तीन महीने पहले ही कैथल डिपो में एनसीआर जिलों में 48 बसें भेजी थीं। यह बसें झज्जर, भिवानी और फरीदाबाद में भेजी गई थी। इसके बाद डिपो में न तो नई बसें आई हैं और न ही इन पुरानी बसों को वापस कैथल भेजा गया है।
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प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्रियों का दिल्ली रूट पर है आवागमन
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्रियों का दिल्ली रूट पर आवागमन होता है। बसों की संख्या कम होने से कैथल से प्रतिदिन करनाल, पानीपत और दिल्ली जाने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। ऐसे में दैनिक यात्रियों को करनाल तक लोकल बसों में सफर करना पड़ता है। पहले करनाल और फिर करनाल से दिल्ली जाना पड़ रहा है।
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बस स्टैंड से खासकर दिल्ली जाने के लिए सुबह और शाम को बसों की सेवाएं नहीं है। कैथल से दिल्ली की दूरी करीब 180 किलोमीटर है और यह सफर चार से पांच घंटें का है। बीएस छह बसें आधुनिक सेवाओं से लैस हैं और लंबे सफर में इन बसों में यात्रा करना आरामदायक होता है। कैथल से दिल्ली की पहली बस सुबह सवा पांच बजे है और शाम को अंतिम बस साढ़े सात बजे की है। यात्री रोशन ने कहा कि वह सुबह करीब सवा 10 बजे से दिल्ली जाने के बस स्टैंड पर पहुंचा था लेकिन यहां पर काफी देर तक बस नहीं मिली। इससे काफी परेशानी हुई।
रोडवेज के कर्मचारी नेता बलवान कुंडू ने बताया कि तीन माह पहले ही कैथल डिपो की बसें झज्जर भेजी गई हैं, जो अब तक वापस नहीं आई हैं। सरकार से आग्रह है कि कैथल डिपो में जल्द ही नई बसें भेजी जाएं, जिससे कैथल से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
वर्जन-
सरकार के आदेशों पर पिछले साल नवंबर में ही बीएस छह तकनीक की बसें एनसीआर के जिलों में भेज दी गई थी। इसके बाद डिपो में नई बसें अभी तक नहीं आई है। ऐसे में अभी दिल्ली रूट पर बसों की संख्या कम हुई है। परंतु जैसे ही नई बसें आएंगी तो दिल्ली रूट पर बसों की संख्या बढ़ा दी जाएंगी।
शमशेर सिंह मान, ड्यूटी निरीक्षक, कैथल डिपो।

01 कैथल। सुबह के समय नए बस स्टैंड पर खाली पड़ा दिल्ली का काउंटर। संवाद