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जोखिम में नौनिहालों की जान, किसी का नहीं इस पर ध्यान
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फोटो- 17 ऑटो में सफर करते स्कूली बच्चे।
- फोटो : Kaithal
कैथल। नियमों को ताक पर रख ऑटो, कैब आदि स्कूली बच्चों को गाड़ियों में भरकर दौड़ रही हैं। ज्यादातर ऑटो व गाड़ी चालक स्कूल के लिए लगाए गए वाहनों में जरूरी हिदायतों तक को पूरा नहीं करते। ज्यादा कमाई के चक्कर में वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाकर नौनिहालों की जान जोखिम में डाली जा रही है। न तो स्कूलों और न ही प्रशासन से इस पर कार्रवाई की जा रही है।
नियमों की यदि बात करें तो एक ऑटो में 12 साल से कम उम्र के पांच बच्चे और 12 से ज्यादा उम्र के चार बच्चों को ही बैठाया जा सकता है, लेकिन शहर में ऑटो चालक 12 से ज्यादा बच्चों को एक साथ ऑटो में बैठाते हैं। वहीं कैब और गाड़ियों में यह संख्या और भी ज्यादा रहती है। इन वाहनों का न तो रंग नियम के अनुसार है और न ही स्कूल का नाम लिखा दिखता है। यहां तक कि जदातर ऑटो चालकों के पास तो वाहनों के जरूरी दस्तावेज और चालक लाइसेंस तक नहीं हैं। ऐसे में नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।
दूसरी ओर यातायात थाना प्रभारी मुखत्यार सिंह ने कहा कि पुलिस की ओर से समय समय पर वाहनों की जांच की जा रही है। इसमें यह देखा जाता है कि वाहन नियमों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जल्द ही विशेष अभियान चलाकर स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने वाले ऑटो और गाड़ियों की जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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इन नियमों की हो रही अनदेखी
‘अमर उजाला’ की ओर से की गई पड़ताल में नियमों को अनदेखा करने वाले कई तथ्य सामने आए। ऑटो या गाड़ियों में पीला रंग नहीं पाया गया और न ही स्कूल का नाम, मोबाइल नंबर या स्कूल वाहन लिखा मिला। प्राथमिक उपचार किट या अग्निशमन यंत्र केवल कुछेक गाड़ियों में ही मिला, लेकिन ऑटो में कहीं पर ऐसा नहीं पाया गया। निर्धारित 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की बजाय ज्यादा तेज गति से ऑटो और गाड़ियों को सडक़ों पर दौड़ने की बात भी सामने आई।
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नियमों की यदि बात करें तो एक ऑटो में 12 साल से कम उम्र के पांच बच्चे और 12 से ज्यादा उम्र के चार बच्चों को ही बैठाया जा सकता है, लेकिन शहर में ऑटो चालक 12 से ज्यादा बच्चों को एक साथ ऑटो में बैठाते हैं। वहीं कैब और गाड़ियों में यह संख्या और भी ज्यादा रहती है। इन वाहनों का न तो रंग नियम के अनुसार है और न ही स्कूल का नाम लिखा दिखता है। यहां तक कि जदातर ऑटो चालकों के पास तो वाहनों के जरूरी दस्तावेज और चालक लाइसेंस तक नहीं हैं। ऐसे में नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।
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दूसरी ओर यातायात थाना प्रभारी मुखत्यार सिंह ने कहा कि पुलिस की ओर से समय समय पर वाहनों की जांच की जा रही है। इसमें यह देखा जाता है कि वाहन नियमों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जल्द ही विशेष अभियान चलाकर स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने वाले ऑटो और गाड़ियों की जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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इन नियमों की हो रही अनदेखी
‘अमर उजाला’ की ओर से की गई पड़ताल में नियमों को अनदेखा करने वाले कई तथ्य सामने आए। ऑटो या गाड़ियों में पीला रंग नहीं पाया गया और न ही स्कूल का नाम, मोबाइल नंबर या स्कूल वाहन लिखा मिला। प्राथमिक उपचार किट या अग्निशमन यंत्र केवल कुछेक गाड़ियों में ही मिला, लेकिन ऑटो में कहीं पर ऐसा नहीं पाया गया। निर्धारित 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की बजाय ज्यादा तेज गति से ऑटो और गाड़ियों को सडक़ों पर दौड़ने की बात भी सामने आई।

फोटो - 18 गाड़ी में दर्जनों की संख्या में बैठाए गए स्कूली बच्चे।- फोटो : Kaithal