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संस्कृति की नींव संस्कृत भाषा पर आधारित : मेहला
Fri, 18 Apr 2025 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 18 Apr 2025 01:23 AM IST
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कैथल। आरकेएसडी काॅलेज में संस्कृत विभाग में वीरवार को पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य महावीर प्रसाद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद प्राचार्य सत्यवीर सिंह मेहला ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषाओं का उद्भव नहीं है बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति की नींव भी इसी भाषा पर आधारित है।
इसके बाद डॉ. विनय सिंघल की ओर से संपादित और अनुदित पुस्तक ‘जलावदानम्’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक आचार्य महावीर प्रसाद रचित संस्कृत लघु नाटकों का संग्रह है, जिसे डॉ. विनय सिंघल ने अनुवाद
और संपादन के माध्यम से सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत किया है।
इन नाटकों का मंचन विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पहले भी हो चुका है।
गौरतलब है कि ‘जलावदानम्’ नाटक एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जो गुरु गोविंद सिंह के शिष्य कन्हैया के जीवन से जुड़ी है। इसके अलावा अन्य नाटक भी सामाजिक और ऐतिहासिक संदेशों से भरपूर हैं। इन नाटकों का उद्देश्य संस्कृत के नाटकों को विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पुनः लोकप्रिय बनाना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य सत्यवीर सिंह मेहला ने की और अतिथि के रूप में सरदार गुरमुख सिंह वड़ैच उपस्थित रहें।
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प्राचार्य ने कहा कि डॉ. सिंघल ने महाविद्यालय के युवा महोत्सवों में संस्कृत नाटकों की प्रस्तुति को लेकर उत्कृष्ट कार्य किया है और उनके नाटकों ने हर बार सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। आचार्य महावीर प्रसाद जी ने डॉ. विनय सिंघल के अनुवाद कार्य की सराहना की और कहा कि यह कार्य अत्यंत कठिन और महत्वपूर्ण था जिसे डॉ. सिंघल ने बड़ी तल्लीनता से निभाया।
इसके बाद डॉ. विनय सिंघल की ओर से संपादित और अनुदित पुस्तक ‘जलावदानम्’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक आचार्य महावीर प्रसाद रचित संस्कृत लघु नाटकों का संग्रह है, जिसे डॉ. विनय सिंघल ने अनुवाद
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और संपादन के माध्यम से सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत किया है।
इन नाटकों का मंचन विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पहले भी हो चुका है।
गौरतलब है कि ‘जलावदानम्’ नाटक एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जो गुरु गोविंद सिंह के शिष्य कन्हैया के जीवन से जुड़ी है। इसके अलावा अन्य नाटक भी सामाजिक और ऐतिहासिक संदेशों से भरपूर हैं। इन नाटकों का उद्देश्य संस्कृत के नाटकों को विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पुनः लोकप्रिय बनाना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य सत्यवीर सिंह मेहला ने की और अतिथि के रूप में सरदार गुरमुख सिंह वड़ैच उपस्थित रहें।
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प्राचार्य ने कहा कि डॉ. सिंघल ने महाविद्यालय के युवा महोत्सवों में संस्कृत नाटकों की प्रस्तुति को लेकर उत्कृष्ट कार्य किया है और उनके नाटकों ने हर बार सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। आचार्य महावीर प्रसाद जी ने डॉ. विनय सिंघल के अनुवाद कार्य की सराहना की और कहा कि यह कार्य अत्यंत कठिन और महत्वपूर्ण था जिसे डॉ. सिंघल ने बड़ी तल्लीनता से निभाया।