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Kaithal News: युवाओं में घटा पतंगबाजी का उत्साह

Sun, 11 Jan 2026 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 11 Jan 2026 12:07 AM IST
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The enthusiasm for kite flying has decreased among the youth.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। सर्दियों में त्योहारों पर पहले युवाओं के बीच पतंगबाजी का अलग ही उत्साह देखने को मिलता था, लेकिन समय के साथ यह पारंपरिक खेल अब अपनी रौनक खोता जा रहा है। एक दौर था जब मोहल्लों और वार्डों में पतंगबाजी को लेकर बाकायदा मुकाबले होते थे। युवा अलग-अलग समूहों में बंटकर एक-दूसरे को चैलेंज देते और आसमान में पतंग काटने की होड़ मच जाती थी।

उस समय पतंगबाजी केवल पतंग काटने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें प्रतिद्वंद्वी से आगे निकलने, तेज दौड़ लगाने और टीम को जीत दिलाने का भी रोमांच शामिल होता था। बुजुर्गों और पुराने पतंगबाजों का मानना है कि पतंगबाजी जैसे पारंपरिक खेल न केवल युवाओं के लिए मनोरंजन का साधन थे, बल्कि उनमें टीम वर्क, अनुशासन, धैर्य और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित करते थे।
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हालांकि तकनीकी युग के आगमन के साथ मोबाइल फोन, वीडियो गेम और सोशल मीडिया ने इन परंपराओं को पीछे छोड़ दिया है। इसके बावजूद कुछ पुराने खिलाड़ी और उत्साही लोग आज भी त्योहारों के अवसर पर पतंगबाजी कर इस परंपरा को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि नई पीढ़ी को भी इस खेल का महत्व समझाया जा सके।
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स्थानीय निवासी मुकेश ने बताया कि पहले लोग अलग-अलग टीमें बनाकर पतंगबाजी किया करते थे। उन्होंने कहा कि उनके मोहल्ले में हर साल पतंगबाजी का उत्सव पूरे जोश के साथ मनाया जाता था। सुबह से ही युवक अपनी पतंग और डोर तैयार कर लेते थे।

एक टीम दूसरी टीम को चैलेंज देती और फिर पतंग काटने की होड़ शुरू हो जाती थी। जीतने वाली टीम गर्व महसूस करती और अगली चुनौती के लिए खुद को तैयार रखती थी। मुकेश के अनुसार, पतंगबाजी केवल एक खेल नहीं, बल्कि मोहल्ले में दोस्ती और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने का माध्यम भी थी।


रोबिन ने बताया कि पहले पतंगबाजी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक खेल हुआ करता था। मोहल्लों में कई टीमें बनती थीं और पेंच की लड़ाई मोहल्लों के बीच होती थी। हर खिलाड़ी अपनी टीम को जीत दिलाने के लिए पूरी मेहनत करता था। इस खेल में रणनीति, धैर्य और गति की भी परीक्षा होती थी। रोबिन का कहना है कि अब समय बदल गया है। युवा अधिकतर समय मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, जिससे पतंगबाजी जैसे खेलों में भागीदारी कम हो गई है। त्योहारों के दौरान भी अब पहले जैसी हलचल और उत्साह देखने को नहीं मिलता।
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