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Kaithal News: प्रशासन की सूझबूझ से सुलझा कमालपुर गांव का विवाद

Wed, 21 May 2025 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 21 May 2025 12:28 AM IST
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The dispute of Kamalpur village was resolved due to the prudence of the administration
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। कलायत के गांव कमालपुर मेंं तालाब और श्मशान की भूमि को लेकर दो समुदायों के बीच बने तनाव को प्रशासन ने सूझबूझ से निपटा दिया। सालों से चल रहे विवाद में शनिवार से ही गांव में तनाव की स्थिति बनी थी।

सोमवार को एसडीएम अजय जांगडा, बीडीपीओ समिता, एसडीओ पंचायती राज रमेश कुमार ने पंडितों के श्मशान घाट में तार खिंचवा कर उसकी सीमा निर्धारित की और दोनों पक्षों में सहमति बनाई।
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इसके बाद समझौते के अनुसार तालाब से निकली मिट्टी को खसरा नंबर 133-134 व खसरा नंबर 183-184 संडील रोड़़ पर बने श्मशान घाटों में बराबर बराबर डलवाना शुरू करवा दिया। कमालपुर ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि रघुबीर, महिपाल, मनीराम और ईश्वर शर्मा ने बताया गांव में आपसी सहमति बन गई है।
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इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पुरी कार्यवाही संपूर्ण हुई। जाट समाज की तरफ से सौहार्द पूर्ण वार्ता के पहलुओं की जानकारी देते हुए लीलाराम, कुलदीप सिंह और मानसिंह ने बताया कि प्रशासन की उपस्थिति में जो समझौता हुआ उस पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई है। सभी गांव मेंं शांति और मेलजोल चाहते हैं।

लंबे समय से है विवाद ः खसरा नंबर 133-134 पर काफी लंबे समय से विवाद है। करीब 15 साल पूर्व ग्राम पंचायत के चुनाव में श्मशान की चारदिवारी बनाने का मुद्दा बना कर वोट के चक्कर में तनाव की शुरूआत हुई थी। गांव में इस मुद्दे को लेकर तनाव इतना बढ़ा की मामला उच्च न्यायालय में अभी चल रहा है जिसकी पेशी 25 मई को है। राजस्व रिकार्ड में यह भूमि कोल्हू के नाम दर्शाई गई है।

इस भूमि में एक तालाब बना हुआ है और पास ही पंडितों के श्मशान बने हैं। जाट समाज का कहना है कि जब सरकार ने खसरा नंबर 183-184 संडील रोड़ पर श्मशान के लिए जगह निर्धारित की हुई है तो संस्कार वहां होना चाहिए। उनका कहना है कि यह स्थान बस्ती के लगभग बीच में आ गया है जिस पर उन्हें आपत्ति है। पंडित समाज का कहना है कि यह श्मशान शुरू से ही है संडील रोड़ पर तो दो साल पूर्व बना है।

ऐसे शुरू हुआ था विवाद

एक सप्ताह पूर्व ग्राम पंचायत ने खसरा नंबर 133-134 में स्थित तालाब की खोदाई का प्रस्ताव डाला था। तालाब की खोदाई से निकलने वाली मिट्टी को जब इस खसरे में स्थित श्मशान घाट में डालना शुरू किया तो दूसरे समुदाय ने उसका विरोध कर दिया। तालाब से निकली मिट्टी को लेकर उपजे विवाद को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम कैथल व पुलिस बल को भेजा गया। एसडीएम ने दोनों पक्षों को बैठा कर इस बात पर राजी कर लिया की तालाब की खोदाई से निकलने वाली आधी मिट्टी एक श्मशान और आधी मिट्टी दूसरे श्मशान घाट में डाली जाऐगी। लगभग तीन तीन ट्रालियां दोनों श्मशान घाटों में जा भी चुकी थीं कि जाट समुदाय ने उसका फिर से भारी विरोध कर दिया। जिससे दोनों पक्षों में आपसी तनाव फिर से बढ़ गया। तीसरे दिन अब दोनों पक्षों की सहमति बनने के बाद ग्रामीणों व प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
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