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अभियानों के जरिये शिक्षा प्रक्रिया को खींच रहा है विभाग
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कैथल। स्कूली विद्यार्थियों को एससीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध करवाने के बजाय शिक्षा विभाग अभियानों के माध्यम से शिक्षा प्रक्रिया की गाड़ी खींचने का प्रयास कर रहा है। किताबों की कमी के चलते स्कूलों में एक के बाद एक ऐसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें विभाग विद्यार्थियों को बिना पुस्तक शिक्षा देने का दावा कर रहा है। इसके लिए विभाग ने पहले मेरी कॉपी-मेरी किताब अभियान चलाया और अब क्लास रेडीनेस कार्यक्रम की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
जिले के राजकीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को बीते दो वर्षों से पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। बीते सत्र के अंत में कुछ पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई गई थीं। ऐसे में विभाग अब उन बच्चों से पुस्तकें वापस लेकर नए विद्यार्थियों को दे रहा है ताकि किसी तरह काम चलता रहे। उन पुस्तकों में से भी कुछ तो गुम हो गई हैं और कुछ फट गई हैं। इसके कारण सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों को पुस्तकों की कमी से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने कहा कि बीते सत्रों में कोरोना महामारी के चलते पुस्तकें प्रकाशित नहीं हो पाईं। इसलिए विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकीं। विभाग अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को खेल-खेल में शिक्षा देने का प्रयास कर रहा है। जैसे ही पुस्तकें जिले में आएंगी, तुरंत स्कूलों में भिजवाकर विद्यार्थियों को दी जाएंगी।
पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में विभाग ने अप्रैल की शुरुआत में मेरी कॉपी-मेरी किताब अभियान शुरू किया। अब क्लास रेडीनेस कार्यक्रम चलाने की तैयारी में है। दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से विभाग बिना पुस्तकें विद्यार्थियों को पढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इसके तहत विद्यार्थियों के समूह बनाकर उन्हें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। अब देखना यह है कि आखिर विभाग के ये अभियान कहां तक सार्थक होंगे?
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जिले के राजकीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को बीते दो वर्षों से पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। बीते सत्र के अंत में कुछ पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई गई थीं। ऐसे में विभाग अब उन बच्चों से पुस्तकें वापस लेकर नए विद्यार्थियों को दे रहा है ताकि किसी तरह काम चलता रहे। उन पुस्तकों में से भी कुछ तो गुम हो गई हैं और कुछ फट गई हैं। इसके कारण सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों को पुस्तकों की कमी से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने कहा कि बीते सत्रों में कोरोना महामारी के चलते पुस्तकें प्रकाशित नहीं हो पाईं। इसलिए विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकीं। विभाग अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को खेल-खेल में शिक्षा देने का प्रयास कर रहा है। जैसे ही पुस्तकें जिले में आएंगी, तुरंत स्कूलों में भिजवाकर विद्यार्थियों को दी जाएंगी।
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पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में विभाग ने अप्रैल की शुरुआत में मेरी कॉपी-मेरी किताब अभियान शुरू किया। अब क्लास रेडीनेस कार्यक्रम चलाने की तैयारी में है। दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से विभाग बिना पुस्तकें विद्यार्थियों को पढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इसके तहत विद्यार्थियों के समूह बनाकर उन्हें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। अब देखना यह है कि आखिर विभाग के ये अभियान कहां तक सार्थक होंगे?
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