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मंदिर की ईंटें जर्जर होकर गिर रहीं, दीवार ढही

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 12:18 AM IST
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The bricks of the temple were falling into disrepair, the wall collapsed
The bricks of the temple were falling into disrepair, the wall collapsed - फोटो : Kaithal
देखरेख के अभाव में शिव मंदिर की ईंटें जर्जर होकर गिर रही हैं, इसकी दीवार भी ढह चुकी है। पुरातत्व विभाग ने इस स्मारक को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देते हुए 13 दिसंबर 1995 को संरक्षित धरोहर की घोषणा की थी। पुरातत्व विभाग की ओर से लगाए गए शिलालेख के अनुसार पंचरथ शैली में निर्मित इस राष्ट्रीय धरोहर का निर्माण काल सातवीं शताब्दी का माना गया है। इस शिव मंदिर का निर्माण बिना गारे के और फूल पत्तियों से महीन नक्काशी में तराशी गई ईंटों से किया गया है।
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यह मंदिर प्रारंभिक शैली के गुर्जर प्रतिहार कला का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस धरोहर का संबंध भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान कपिल से है। माना जाता है कि इस स्थान पर भगवान कपिल ने सांख्य शास्त्र की रचना कर अपनी मां देवहुति को ज्ञान दिया था। एक अनुश्रुति के अनुसार राजा शालिवाहन को इसी स्थान पर चर्म रोग से मुक्ति मिली थी। इसीलिए उन्होंने एक ही रात्रि में पवित्र कपिल सरोवर के किनारे पर पांच शिवाले बनवाए थे। जिनमें से एक शिवालय मूल रूप से मौजूद है, जिसे राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा मिला है।
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पिछले 26 वर्षों से संभाल तो दूर बिगड़ी है धरोहर की हालत
विश्व हिंदू परिषद जिला उपाध्यक्ष बीरभान निर्मल, जिला सहसंयोजक गोपाल भट्ट, प्रखंड अध्यक्ष राधेश्याम भट्ट, महामंत्री संजय सिंगला, विशाल शांडिल्य, नरेश वर्मा, धनराज गर्ग आदी ने बताया कि इस मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए 26 वर्ष हो चुके हैं। इन 26 वर्षों में इस स्मारक के दिन नहीं बहुरे। बीते सालों में इस धरोहर की संभाल पुरातत्व विभाग ने की ही नहीं। यह स्मारक लगातार जर्जर होकर गिर रहा है। इस धरोहर का राष्ट्रीय मानचित्र पर विवरण पढ़ कर श्रद्धालु इसे देखने के लिए आते हैं पर इसकी जर्जर हालात देख कर आस्था पर कुठाराघात ही होता है।
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बीरभान निर्मल ने बताया कि शिवालय के निचले हिस्से की हालात इतनी खराब हो चुकी है कि ईंटे अपने आप टूट कर गिरना आरंभ हो चुकी हैं। धरोहर की एक और की दीवार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि बिना संभाल के इस धरोहर का नीचे का हिस्सा बैठ जाने से यह कभी भी भरभरा कर गिर सकती है। संरक्षित क्षेत्र में ही स्थित एक अन्य मंदिर का गुंबद कभी भी गिर कर बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। हैरानी इस बात की है कि पिछले वर्ष मंदिर के इस गुंबद के गिर जाने के बाद पुरातत्व विभाग ने इसे पुन: बनवाया था पर दुर्भाग्य से वह निर्माण एक साल भी नही चल पाया। इसी परिसर में शनिवार को एक दिवार बरसात के बाद भरभरा कर बिखर गई।
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