{"_id":"6707078231dcf88c130693d4","slug":"the-audience-became-emotional-after-seeing-the-staging-of-sita-haran-kaithal-news-c-18-1-knl1004-495594-2024-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: सीता हरण का मंचन देख भावुक हुए दर्शक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: सीता हरण का मंचन देख भावुक हुए दर्शक
Thu, 10 Oct 2024 04:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 10 Oct 2024 04:15 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। प्राचीन श्री भवानी मंदिर में आदर्श नाटक क्लब की रामलीला में कलाकारों ने जटायु और रावण युद्ध, मारीच वध के प्रसंग का मंचन किया।
प्रसंग के पहले दृश्य में खर व दूषण के वध के बाद अपमान से आहत बहन शूर्पणखा रावण के दरबार में पहुंची। उसने रावण को खर व दूषण के वध की सूचना दी। उन्होंने कहा कि मेरी यह दशा वन में आए दो संन्यासियों ने की है। मैंने उनको आप का परिचय भी दिया था। कहा कि वे रावण को नहीं जानते। दूसरे दृश्य में रावण मामा मारीच के पास पहुंचता है।
इसके बाद तीसरे व अंतिम व तीसरे दृश्य में मारीच सोने के हिरण का रूप लेकर माता जानकी की कुटिया के पास पहुंचता है। सीता के कहने पर श्री राम उसको मारने के लिए पीछे चले जाते हैं। श्री राम मारीच को मारते हैं, तभी मारीच राम-राम चिल्लाता है। यह सुनकर माता सीता लक्ष्मण को मदद के लिए भेजती हैं।
लक्ष्मण रेखा खींचकर वह चले जाते है। इसी बीच रावण ब्राह्मण के रूप में भिक्षा मांगता है और सीता का हरण कर ले जाता है। जब दोनों भाई
लौटकर कुटिया पर आते है तो उनको सीता नहीं मिलती है। तब वे सीता की खोज करने निकल जाते है। जटायु घायल अवस्था में मिलते हैं तो सीता हरण की जानकारी मिलती है।
विज्ञापन
इसके साथ ही रामलीला का मंचन समाप्ति के बाद एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा ने भगवान राम की लीलाओं को पूरा देश देख रहा है। उनके जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि संस्कारों को जीवंत रखने के लिए रामलीला के मंच एक बेहतर माध्यम है। हमारी संस्कृति को बचाने में रामलीला का अहम योगदान है।
इस अवसर पर आदर्श नाटक क्लब के प्रधान बलबीर सैनी, एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा, हरवंस सीड़ा, मलकीत सीड़ा, पार्षद सुखबीर उर्फ काला पहलवान, हरपाल शर्मा, कुलदीप माजरा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
गुहला-चीका। प्राचीन श्री भवानी मंदिर में आदर्श नाटक क्लब की रामलीला में कलाकारों ने जटायु और रावण युद्ध, मारीच वध के प्रसंग का मंचन किया।
प्रसंग के पहले दृश्य में खर व दूषण के वध के बाद अपमान से आहत बहन शूर्पणखा रावण के दरबार में पहुंची। उसने रावण को खर व दूषण के वध की सूचना दी। उन्होंने कहा कि मेरी यह दशा वन में आए दो संन्यासियों ने की है। मैंने उनको आप का परिचय भी दिया था। कहा कि वे रावण को नहीं जानते। दूसरे दृश्य में रावण मामा मारीच के पास पहुंचता है।
इसके बाद तीसरे व अंतिम व तीसरे दृश्य में मारीच सोने के हिरण का रूप लेकर माता जानकी की कुटिया के पास पहुंचता है। सीता के कहने पर श्री राम उसको मारने के लिए पीछे चले जाते हैं। श्री राम मारीच को मारते हैं, तभी मारीच राम-राम चिल्लाता है। यह सुनकर माता सीता लक्ष्मण को मदद के लिए भेजती हैं।
विज्ञापन
लक्ष्मण रेखा खींचकर वह चले जाते है। इसी बीच रावण ब्राह्मण के रूप में भिक्षा मांगता है और सीता का हरण कर ले जाता है। जब दोनों भाई
लौटकर कुटिया पर आते है तो उनको सीता नहीं मिलती है। तब वे सीता की खोज करने निकल जाते है। जटायु घायल अवस्था में मिलते हैं तो सीता हरण की जानकारी मिलती है।
विज्ञापन
इसके साथ ही रामलीला का मंचन समाप्ति के बाद एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा ने भगवान राम की लीलाओं को पूरा देश देख रहा है। उनके जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि संस्कारों को जीवंत रखने के लिए रामलीला के मंच एक बेहतर माध्यम है। हमारी संस्कृति को बचाने में रामलीला का अहम योगदान है।
इस अवसर पर आदर्श नाटक क्लब के प्रधान बलबीर सैनी, एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा, हरवंस सीड़ा, मलकीत सीड़ा, पार्षद सुखबीर उर्फ काला पहलवान, हरपाल शर्मा, कुलदीप माजरा आदि मौजूद रहे।