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Kaithal News: जारी है स्कूलों की मनमानी
Fri, 05 Apr 2024 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 05 Apr 2024 01:19 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। निजी स्कूलों ने नया शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए दाखिल शुरू हो गए हैं। चिराग योजना के तहत एक लाख रुपये की आमदनी वाले परिवार जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, वह इस योजना के लिए दाखिला ले सकते हैं, लेकिन अधिकांश निजी स्कूल चिराग योजना के योग्य विद्यार्थियों के आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसके लिए अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस योजना के तहत 10 अप्रैल तक ही बच्चों के दाखिले हो सकते हैं।
इसके साथ ही सभी निजी स्कूलों में बच्चों से दाखिला फीस व अन्य खर्चों के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त फीस वसूल रहे हैं। प्रवेश के नाम पर स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। किताबें, स्टेशनरी और वर्दी पहले ही बाजार में महंगी हो चुकी है। पढ़ाई का बोझ बढऩे से अभिभावक चिंतित हैं।
अभिभावकों ने बताई समस्याएं
बच्चों की पढ़ाई का लगातार बढ़ रहा बोझ
मेरी बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती है। बस्तों के बोझ को देखकर समझ आता है कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है। दरअसल, निजी प्रकाशकों की किताबें महंगी होने के साथ भारी भी होती हैं। स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री पहले से महंगी है। फीस भी हर साल बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए, जितना कमाते हैं उससे ज्यादा तो बच्चों की पढ़ाई में ही लगता है। -रोहताश, अभिभावक
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फीस के हिसाब से नहीं मिल रही पढ़ाई की सुविधा
निजी स्कूल जिस हिसाब से फीस बढ़ा रहे हैं, उसकी बच्चों की पढ़ाई में सुविधा नहीं मिल रही है। हर वर्ष नई कक्षा में पुस्तकें बदल दी जाती हैं। पुरानी किताबें यदि किसी बच्चे से मिल भी जाए तो वे किसी काम की नहीं होती। छठी के बाद भी कई निजी प्रकाशकों की किताबें मंगवाई जाती हैं। तय दुकान से किताबें मंगवाने के लिए स्कूल संचालक कहते हैं। साफ है कि कमीशन का मामला है। सुनील कुमार, अभिभावक
जो भी स्कूल चिराग योजना के तहत आते हैं उन सभी को चिराग योजना के योग्य विद्यार्थियों के फॉर्म स्वीकार करने है। यदि सीटों से जयादा बच्चे होते हैं तो ड्रा से बच्चों को दाखिला दें। -विजय लक्ष्मी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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कैथल। निजी स्कूलों ने नया शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए दाखिल शुरू हो गए हैं। चिराग योजना के तहत एक लाख रुपये की आमदनी वाले परिवार जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, वह इस योजना के लिए दाखिला ले सकते हैं, लेकिन अधिकांश निजी स्कूल चिराग योजना के योग्य विद्यार्थियों के आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसके लिए अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस योजना के तहत 10 अप्रैल तक ही बच्चों के दाखिले हो सकते हैं।
इसके साथ ही सभी निजी स्कूलों में बच्चों से दाखिला फीस व अन्य खर्चों के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त फीस वसूल रहे हैं। प्रवेश के नाम पर स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। किताबें, स्टेशनरी और वर्दी पहले ही बाजार में महंगी हो चुकी है। पढ़ाई का बोझ बढऩे से अभिभावक चिंतित हैं।
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अभिभावकों ने बताई समस्याएं
बच्चों की पढ़ाई का लगातार बढ़ रहा बोझ
मेरी बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती है। बस्तों के बोझ को देखकर समझ आता है कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है। दरअसल, निजी प्रकाशकों की किताबें महंगी होने के साथ भारी भी होती हैं। स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री पहले से महंगी है। फीस भी हर साल बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए, जितना कमाते हैं उससे ज्यादा तो बच्चों की पढ़ाई में ही लगता है। -रोहताश, अभिभावक
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फीस के हिसाब से नहीं मिल रही पढ़ाई की सुविधा
निजी स्कूल जिस हिसाब से फीस बढ़ा रहे हैं, उसकी बच्चों की पढ़ाई में सुविधा नहीं मिल रही है। हर वर्ष नई कक्षा में पुस्तकें बदल दी जाती हैं। पुरानी किताबें यदि किसी बच्चे से मिल भी जाए तो वे किसी काम की नहीं होती। छठी के बाद भी कई निजी प्रकाशकों की किताबें मंगवाई जाती हैं। तय दुकान से किताबें मंगवाने के लिए स्कूल संचालक कहते हैं। साफ है कि कमीशन का मामला है। सुनील कुमार, अभिभावक
जो भी स्कूल चिराग योजना के तहत आते हैं उन सभी को चिराग योजना के योग्य विद्यार्थियों के फॉर्म स्वीकार करने है। यदि सीटों से जयादा बच्चे होते हैं तो ड्रा से बच्चों को दाखिला दें। -विजय लक्ष्मी, जिला शिक्षा अधिकारी।