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पुराना बस स्टैंड पर मिठाई की दुकान में घुसे लड़ते हुए सांड़, दुकानदार घायल
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the animal created a furore
- फोटो : Kaithal
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पुराना बस स्टैंड के पास आपस में लड़ते हुए दो सांडों ने जमकर उत्पात मचाया और एक दुकान में घुस गए। सांडों ने आपसी लड़ाई में एक दुकानदार को भी चपेट में ले लिया। जिससे उसकी टांगों और बाजूओं पर चोटें लगी। आसपास के दुकानदारों ने लड़ते हुए सांडों को वहां से भगाने का भी प्रयास किया, लेकिन लाठियों और डंडों से भगाने बाद भी सांड लड़ते रहे। इससे बस स्टैंड के पर सड़क के दोनों तरफ जाम की स्थिति पैदा हो गई।
शुक्रवार को दुकानदारों ने सांडों को पकड़वाने की मांग लेकर रोष प्रकट किया। दुकानदार मनोज, राजेश कुमार, जय प्रकाश, नरेंद्र मदान, रमेश कुमार, बलराम, कदंब व प्रकाश ने बताया कि वीरवार को दो सांड शाम को करीब छह बजे डिवाइडर के पास आपस में लड़ने लगे। उन्होंने लाठी और डंडे लेकर उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन वे भागते हुए साथ लगती एक मिठाई की दुकान में घुस गए। दुकानदारों ने बताया कि जैसे ही सांड दुकान के अंदर घुसने लगे तो काउंटर उनकी टक्कर लगने से दीवार के साथ लग गया, जिससे वह टूटने से बच गया। दुकान के अंदर कोई ग्राहक नहीं था, जिस कारण जानी नुकसान होने से बच गया। दुकान के बाहर बेचने के लिए रखी करीब दो हजार रुपये की मिठाई सांडों की लड़ाई के कारण खराब हो गई। दुकानदारों ने जल्द से जल्द पशुओं को पकड़वाने की मांग प्रशासन से की
बाल-बाल बचा दुकानदार: दुकानदार नरेंद्र कुमार ने बताया कि जिस समय सांड दुकान में घुसे उस समय वह दुकान के गेट पर बैठा था। उनकी लड़ाई इतनी भयंकर थी कि अगर वह उनकी चपेट में आ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता है। सांडों से दुकान के अंदर काम कर रहे अन्य कर्मचारी पीछे के दरवाजे से भागकर बाहर निकल गए और वह और उसने खुद फ्रिज के पीछे छुपकर जान बचाई। उन्होंने कहा कि वैसे तो शहर में हर जगह सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा रहता है लेकिन अकेले छात्रावास रोड से लेकर पुराने इस स्टैंड तक भी दर्जनों की संख्या में पशु घूमते रहते हैं। जिला प्रशासन की ओर से शहर के इस बड़े मुद्दे की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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दुकानदार एवं गोपाल गोशाला के पूर्व प्रधान राजेश कुमार ने बताया कि इससे पहले भी बेसहारा पशुओं के कारण शहर में कई बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन इनसे कोई सबक नहीं ले रहा है। गोशाला प्रबंधक समिति के सदस्यों ने करीब डेढ़-दो महीने पहले मृत पशुओं को दबवाने और बेसहारा पशुओं को पकड़वाने की मांग को लेकर पिहोवा चौक पर जाम लगाया गया। उस समय प्रशासन की ओर से बेसहारा पशुओं को जल्द पकड़वाने का आश्वासन दिया गया था। अब तक उस आश्वासन के सार्थक नतीजे सामने नहीं आए हैं। उन्होंने मांग की कि पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जाए, ताकि लोगों को परेशानी से छुटकारा मिल सके।
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शुक्रवार को दुकानदारों ने सांडों को पकड़वाने की मांग लेकर रोष प्रकट किया। दुकानदार मनोज, राजेश कुमार, जय प्रकाश, नरेंद्र मदान, रमेश कुमार, बलराम, कदंब व प्रकाश ने बताया कि वीरवार को दो सांड शाम को करीब छह बजे डिवाइडर के पास आपस में लड़ने लगे। उन्होंने लाठी और डंडे लेकर उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन वे भागते हुए साथ लगती एक मिठाई की दुकान में घुस गए। दुकानदारों ने बताया कि जैसे ही सांड दुकान के अंदर घुसने लगे तो काउंटर उनकी टक्कर लगने से दीवार के साथ लग गया, जिससे वह टूटने से बच गया। दुकान के अंदर कोई ग्राहक नहीं था, जिस कारण जानी नुकसान होने से बच गया। दुकान के बाहर बेचने के लिए रखी करीब दो हजार रुपये की मिठाई सांडों की लड़ाई के कारण खराब हो गई। दुकानदारों ने जल्द से जल्द पशुओं को पकड़वाने की मांग प्रशासन से की
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बाल-बाल बचा दुकानदार: दुकानदार नरेंद्र कुमार ने बताया कि जिस समय सांड दुकान में घुसे उस समय वह दुकान के गेट पर बैठा था। उनकी लड़ाई इतनी भयंकर थी कि अगर वह उनकी चपेट में आ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता है। सांडों से दुकान के अंदर काम कर रहे अन्य कर्मचारी पीछे के दरवाजे से भागकर बाहर निकल गए और वह और उसने खुद फ्रिज के पीछे छुपकर जान बचाई। उन्होंने कहा कि वैसे तो शहर में हर जगह सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा रहता है लेकिन अकेले छात्रावास रोड से लेकर पुराने इस स्टैंड तक भी दर्जनों की संख्या में पशु घूमते रहते हैं। जिला प्रशासन की ओर से शहर के इस बड़े मुद्दे की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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दुकानदार एवं गोपाल गोशाला के पूर्व प्रधान राजेश कुमार ने बताया कि इससे पहले भी बेसहारा पशुओं के कारण शहर में कई बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन इनसे कोई सबक नहीं ले रहा है। गोशाला प्रबंधक समिति के सदस्यों ने करीब डेढ़-दो महीने पहले मृत पशुओं को दबवाने और बेसहारा पशुओं को पकड़वाने की मांग को लेकर पिहोवा चौक पर जाम लगाया गया। उस समय प्रशासन की ओर से बेसहारा पशुओं को जल्द पकड़वाने का आश्वासन दिया गया था। अब तक उस आश्वासन के सार्थक नतीजे सामने नहीं आए हैं। उन्होंने मांग की कि पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जाए, ताकि लोगों को परेशानी से छुटकारा मिल सके।